क्या पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए राजनीतिक मंथन का अवसर है ?
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पांच राज्यों मैं चल रहे विधानसभा चुनाव को कांग्रेस की नजर से देखें तो, इस चुनाव में पहली बार बहुत कुछ देखने को मिल रहा है जो पहले कभी नहीं देखा गया ?
बड़ी बात तो यह देखी जा रही है की इन चुनावों में कांग्रेस के बड़े रणनीतिकार और अपने आप को कद्दावर नेता समझने वाले नदारद दिखाई दे रहे हैं, खासकर वह नेता जो दस जनपथ यानी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के इर्द गिर्द रहा करते थे, वह नेता पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में नजर नहीं आ रहे हैं ! सबसे बड़ी और खास बात यह दिखाएं दे रही है कि असम से 5 बार राज्यसभा के सदस्य रहे पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह असम चुनाव में नजर नहीं आ रहे हैं! हालांकि कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की एक लंबी सूची जारी भी की थी मगर सूची में शामिल नेताओं की चर्चा मीडिया के भीतर कम ही सुनाई दे रही है, चर्चा केवल राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के चुनाव अभियान की ही हो रही है !क्या कारण है इसकी समीक्षा राजनीतिक पंडित और राजनीतिक विश्लेषक चुनाव नतीजों के बाद शायद करें ?
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में श्रीमती सोनिया गांधी की आवाज भी सुनाई नहीं दे रही है उनके बदले कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी की आवाज सुनाई दे रही है, राहुल और प्रियंका दोनों ने अपने अपने स्तर पर अलग-अलग राज्य के चुनावों की मजबूत कमान संभाल रखी है !
इन पांच राज्यों के चुनावों में असम ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस वापसी कर सकती है वहां प्रियंका गांधी ने चुनावी कमान अपने हाथों में ले रखी है साथ में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री बघेल को बड़ी जिम्मेदारी दी है, असम को लेकर एक सवाल जेहन में यह उठ रहा है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पार्टी में बघेल की तरह जिम्मेदारी क्यों नहीं दी,जबकि असम के अंदर मारवाड़ी व्यापारियों का गहरा प्रभाव है और बड़ी तादाद में असम के अंदर राजस्थान के लोग रहते हैं जो प्रभावशाली भी हैं ! राजस्थान में भी 3 विधानसभा क्षेत्रों मैं उपचुनाव होने हैं शायद इसीलिए अशोक गहलोत को असम की बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है वैसे गहलोत को केरल में चुनाव प्रभारी बनाया गया है !
यह चुनाव कांग्रेस के लिए राजनीतिक मंथन का अवसर है क्या,यदि इस नजरिए से देखें तो इस चुनाव में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में ज्यादातर युवा नेताओं का बोलबाला अधिक दिखाएं दे रहा है उस की अपेक्षा वरिष्ठ नेता कम ही नजर आ रहे हैं ऐसे में इस चुनाव के बाद कॉन्ग्रेस की कमान क्या युवा हाथों में होगी , और क्या पांच राज्यों का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के भीतर यह संकेत दे रहा है कि यह चुनाव राहुल या प्रियंका गांधी के लिए युवा टीम तैयार कर रहे हैं, इस का अभी इंतजार करना होगा जून तक क्योंकि कांग्रेस का नया अध्यक्ष जून माह में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को शायद मिल जाए !
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Devendra Yadav Sr. Journalist & Political Analytic |
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