पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव
राहुल गांधी "देखो और इंतजार करो "की नीति अपना रहे हैं?
वै से तो पश्चिम बंगाल TN, केरल, असम और पांडुचेरी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के संपन्न होने की तारीख में अभी तक लगभग डेढ़ महीने का समय बाकी है! पश्चिम बंगाल को छोड़ दे तो देश में बाकी चार राज्यों के विधानसभा चुनाव की अभी चर्चा कम ही सुनाई दे रही है ऐसा लग रहा है जैसे विधानसभा का चुनाव पांच राज्यों में नहीं होने के कारण अकेले बंगाल में ही हो रहा है!
जनता और राजनीतिक पंडित शायद बेसब्री से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की चुनावी सभाओं का इंतजार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल में अपनी पहली चुनावी सभा का शंखनाद कर रहे हैं जबकि राहुल गांधी की चुनावी सभा अभी बाकी है!
राहुल गांधी हमेशा चुनावी मौसम में सुर्ख़ियों में रहते हैं लेकिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं। लेकिन राहुल गांधी अभी तक सुर्ख़ियों में दिखाई नहीं दे रहे हैं। इस्की क्या वजह है? क्या राहुल गांधी "देखो और इंतजार करो की नीति पर काम कर रहे हैं? क्योंकि जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं क्या उन राज्यों में कांग्रेस की खुद की स्थिति ऐसी नहीं है कि वह वहां अपनी सरकार पर फैसला ले?
पांचों राज्यों में कांग्रेस ने वहां के क्षेत्रीय दलों के साथ चुनावी गठबंधन किया है। तमिल नाडु, केरल और असम मैं कांग्रेस गठबंधन के साथ सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है। लेकिन पश्चिम बंगाल में स्थिति विपरीत है जबकि बंगाल में कांग्रेस और वामदल मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में अभी भी तृणमूल कांग्रेस की स्थिति अन्य दलों से बहुत अच्छी है!
राहुल गांधी जिन मुद्दों को लेकर नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को लंबे समय से कटघरे में खड़ा कर रहे हैं उनसे किसान आंदोलन बेरोजगारी और सरकारी उपक्रमों का निजी करण करना, यह मुद्दा अब विधानसभा चुनाव में भी नजर आने लगा है।
आंदोलनकारी किसान दिल्ली बॉर्डर से उठकर पश्चिम बंगाल पहुंच चुके हैं, आंदोलनकारी किसान कृषि बिल और एसएमपी के मुद्दों के अलावा बेरोजगारी और निजीकरण की बात भी कर भाजपा को वोट नहीं देने की अपील कर रहे हैं।
जिन मुद्दों को चुनाव में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को उठाना था उन मुद्दों को आंदोलनकारी किसान उठा रहे थे? ऐसा भी नहीं है की कांग्रेस इन मुद्दों को नहीं उठा रही है? राहुल गांधी लगातार बेरोजगारी और निजीकरण के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन चुनाव में किसानों की समस्या बेरोजगारी और निजी करण को मुद्दा आंदोलनकारी किसानों ने बनाया है!
ऐसा भी नहीं है पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के नेता सक्रिय नहीं है, राहुल गांधी तमिल नाडु और केरल में लंबे समय से सक्रिय है वही असम में कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रियंका गांधी को भी सक्रिय देखा गया था! राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने TN केरल और असम में जनता से भावनात्मक लगाओ और आरोपों का इजहार किया!
राहुल गांधी ने क्रीमुआरों के साथ समुद्र में मछली पकड़ने और गोता लगा कर जनता से भावनात्मक संबंध बनाने का प्रदर्शन किया तो वही प्रियंका गांधी ने असम के चाय बागानों में जाफर चाय की पत्ती तोड़कर टोकरी में संगृहीत कर जनता से भावनात्मक संबंध बनाए!
प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के चुनावी भाषण के रूप में सुर्खियां नहीं मिलीं उससे ज्यादा सुर्खियां मोतीुआरों के साथ समुद्र में और चाय के बागान में चाय की पत्तियां तोड़ने पर दोनों नेताओं में सुर्खियां बटोरी थी। सोशल मीडिया और मुख्य मीडिया मैं यह दोनों वीडियो काफी सुर्खियां पाने से देखा गया है! राहुल गांधी पांच राज्यों के चुनावी मैदान में होने के बाद भी होने की तरह दिखाई नहीं दे रहे हैं! अभी भी सुर्ख़ियों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह और सुश्री ममता बनर्जी ही नज़र आ रहे हैं।
सवाल खड़ा होता है कि क्या राहुल गांधी "देखो और इंतजार करो की रणनीति पर काम कर रहे हैं? और राहुल गांधी की नजर 2024 के लोकसभा चुनाव पर, राहुल गांधी की नजर तीन कृषि कानून और एमएसपी पर किसानों का केंद्र सरकार के खिलाफ फर और बेरोजगार युवाओं वे निजीकरण के कारण सरकारी कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के केंद्र सरकार के प्रति उग्र पर है, पांच राज्यों के चुनावों में किसानों बेरोजगार युवाओं और सरकारी उपक्रमों में कार्यरत कर्मचारी भा ज पा को कितना नुकसान पहुंचता है? पर है? और इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव मैं क्या होगा और राहुल गांधी को क्या करना होगा?
कुल मिलाकर अभी तक यह रहस्य है इस रहस्य पर से शीघ्र कब हटे गा इसका अभी इंतजार करना होगा!
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देवेंद्र यादव |
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