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Thursday, March 18, 2021

3/18/2021 11:15:00 AM

क्या कांग्रेस और गांधी परिवार के बगैर तीसरा मोर्चा बनना संभव है? और मोर्चा बना भी तो क्या यह मजबूत  होगा ?

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जब जब भी देश में सत्ता पक्ष के खिलाफ राजनीतिक हवा बनती है तब तब विपक्ष की ओर से तीसरा मोर्चा बनने की आवाज सुनाई देने लगती है ! क्योंकि इस समय तीन कृषि कानूनों और निजी करण को लेकर देश में किसान और बैंक और बीमा कर्मचारी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। और देश के पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव चल रहे हैं। विपक्ष आंदोलन और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में से 2024 मैं होने वाले देश के आम चुनाव का रास्ता ढूंढ रहे हैं । 

क्या 2024 के आम चुनाव में सत्ताधारी भाजपा सरकार के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा करने की जरूरत है? और क्या इस समय यूपीए के रूप में खड़ा मोर्चा कमजोर है? यदि कमजोर है तो उसे मजबूत कैसे किया जाए इसकी जरूरत है या फिर यूपीए से अलग एक मजबूत मोर्चा खड़ा करने की जरूरत है? यह तमाम सवाल अब खड़े होने लगे हैं ?

 जहां तक राजनैतिक पार्टियों के गठबंधन का सवाल है।  देश में इस समय एन डी ए और यूपीए दो प्रमुख गठबंधन हैं ! इस समय एनडीए गठबंधन केंद्र की सत्ता में हे। इस गठबंधन की महत्वपूर्ण खूबी यह है कि भाजपा  लोकसभा में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी गठबंधन का धर्म निभा रही है।  दूसरा गठबंधन यूपीए का है जो अभी विपक्ष में है !

 अब सवाल उठता है कि दोनों गठबंधनोंं के बीच क्या तीसरा गठबंधन बनेगा? और यदि बना भी तो इसका नेता कौन होगा ?

यदि गठबंधन और गठबंधनोंं की राजनीति के इतिहास पर नजर डालें तो,  मजबूत नेता के अभाव में गठबंधन सरकारों को धरा शाही होते हुए भी देश ने देखा है और यदि गठबंधन का नेता मजबूत रहा है तो गठबंधन सरकारों को मजबूत सरकार के रूप में भी देश में देखा है !

 


अटल बिहारी वाजपेई श्रीमती सोनिया गांधी और अब नरेंद्र मोदी तीनों नेता गठबंधन राजनीति के मजबूत स्तंभ रहे हैं !

 अटल बिहारी वाजपेई और श्रीमती सोनिया गांधी ने मजबूती के साथ अपनी गठबंधन की सरकारें चलाई हैं वही वर्तमान सरकार नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व के कारण लगातार दूसरी बार सत्ता पर काबिज है !

 इससे पूर्व में गठबंधनओं की सरकारें बनी लेकिन वह ज्यादा दिन नहीं टिक पाई। मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह, चंद्रशेखर, देवेगौड़ा , गुजराल जैसे नेता गठबंधन सरकारों  मैं प्रधानमंत्री बने मगर ज्यादा दिन के लिए नहीं !

 बात तीसरा मोर्चा बनने की आहट की हो रही है क्या सोनिया गांधी अब उम्र दराज हो गई हैं? या वह बीमार रहती हैं इसलिए विपक्ष को नया नेता या नया मोर्चा खड़ा करने की आवश्यकता हो गई है मगर यहां भी एक सवाल खड़ा हो जाता है क्योंकि जहां से तीसरा मोर्चा बनने की आहट सुनाई दे रही है क्या वह नेता उम्र दराज नहीं है  शरद पवार भी उम्र दराज नेता है !


 विपक्ष कमजोर है और विपक्ष का मतलब यूपीए गठबंधन कमजोर है और यूपीए का मतलब कांग्रेस कमजोर है यह बात अक्सर सुनाई देती है।  और इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की यूपीए गठबंधन के लिए कॉन्ग्रेस का होना कितना महत्वपूर्ण है और यूपीए के इतिहास को देखें तो सोनिया गांधी का यूपीए का नेता होना भी कितना महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके नेतृत्व में यूपीए ने एक दशक तक केंद्र की सत्ता पर राज किया था, तब भी शरद पवार जैसे नेता मौजूद थे और आज भी मौजूद हैं !

क्या तीसरा मोर्चा युवाओं का बने जिसका नेतृत्व कोई युवा नेता करें क्योंकि जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे हैं उनमें असम और तमिल नाडु ऐसे राज्य हैं जहां चुनावी मैदान में युवा नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका नजर आ रही है !  तमिलनाडु में जयललिता और करुणानिधि की मौत के बाद और असम में गोगोई की मौत के बाद यह पहला चुनाव है जब दोनों राज्यों में चुनावी कमान युवाओं ने अपने हाथों में संभाल रखी है !


 तमिलनाडु में स्टालिन और असम में गौरव गोगोई दोनों युवा नेता है और दोनों ही नेता अपनी-अपनी सरकार बनाने के लिए चुनावी मैदान में हैं ! आंध्र प्रदेश मैं भी कमान युवा नेता जगनमोहन रेड्डी के हाथों में है बिहार में तेजस्वी यादव चिराग पासवान उत्तर प्रदेश में श्रीमती प्रियंका गांधी अखिलेश यादव जैसे युवा नेता है जो दमदार भी हैं और जिन्हें जनता भी पसंद करती है !

 केंद्र की राजनीति में यदि नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलने वाले विपक्ष के नेताओं पर नजर डालें तो कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी नंबर वन पर रहेंगे !

 राहुल गांधी अक्सर देश और जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हमेशा नजर आते रहे हैं !  अब देखना होगा कि तीसरा मोर्चा कब बनता है? और उसका नेतृत्व कौन करता है? तीसरा मोर्चा युवाओं का होगा या फिर उम्र दराज नेता ही उसका नेतृत्व करेंगे इसका इंतजार करना होगा !









देवेंद्र यादव (कोटा राजस्थान)

लेखक वरिष्ठ पत्रकार ओर राजनीतिक विष्लेशक हैं।

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