पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और देश के दो प्रमुख राजनीतिक दल, पोजीशन क्या ?
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जैसे-जैसे पांच राज्य के विधानसभा चुनाव के मतदान की तारीख नजदीक आती जा रही है वैसे वैसे चुनाव मैदान में उतरे राजनीतिक दलों की अपनी अपनी पोजीशन का आभास होता दिखाई देने लगा है !
मतदान मैं अब लगभग सवा महीना शेष बचा है, तमाम राजनीतिक पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं राष्ट्रीय नेताओं ने अपनी चुनावी सभाएं भी प्रारंभ कर दी है !
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो, यह चुनाव अजीब चुनाव है जिसमें किसी एक दल की पांचों राज्यों में सरकार बनती नजर नहीं आ रही है ! पांचो राज्य में राजनीतिक दलों में सरकारों का बटवारा होना तय है? सवाल यह है कि देश की दो प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कहां खड़ी हुई है इस पर देश की जनता राजनीतिक पंडित और राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर है !
कांग्रेस की नजर असम पर अधिक है क्योंकि कांग्रेस असम में अपनी सरकार बना सकती है वही भाजपा ने अपना पूरा गांव पश्चिम बंगाल में लगा रखा है उसे उम्मीद है की वह पश्चिम बंगाल में पहली बार अपनी सरकार बना सकती है ! लेकिन संकट अभी भी दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों के सामने कम नहीं है ! असम में कांग्रेस के सामने सत्तारूढ़ भा ज पा पार्टी की बड़ी चुनौती है तो वही बंगाल में भाजपा के सामने ममता बनर्जी की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की बड़ी चुनौती है !
कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी असम में अचानक सक्रिय होते दिखाई दिए इससे पहले कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रियंका गांधी ने भी अपना चुनावी दौरा किया कांग्रेस के दोनों ही नेता असम की जनता से भावनात्मक रिश्ते बनाते दिखाई दिए, राहुल और प्रियंका गांधी के असम की जनता से भावनात्मक संबंध क्या कांग्रेस को असम की सत्ता पर वापसी करा देगी, अभी बड़ा सवाल है लेकिन कांग्रेस जिस रणनीति के तहत असम में चुनावी मैदान में खड़ी हुई है उससे लगता है कि असम में उलटफेर हो सकता है !
पश्चिम बंगाल में भाजपा के सामने बड़ी चुनौती तृणमूल कांग्रेस से तो आ ही रही है लेकिन टिकट बंटवारे के बाद भाजपा के सामने अब चुनौती भाजपा के अंदर से ही मिलती हुई दिखाई दे रही है ! बंगाल में भाजपा ने बड़ी संख्या में अन्य दलों से शामिल हुए लोगों को चुनाव मैदान में उतारा है जिसको लेकर भाजपा के पारंपरिक कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, लेकिन इस नाराजगी का मतलब यह कतई नहीं लगाना चाहिए कि इससे भाजपा को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा बल्कि यह भाजपा के रणनीतिकारों की रणनीति का एक हिस्सा भी हो सकता है !
विरोधी दल भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को अपना वोट समझकर आराम से बैठ जाए और समझने लगे की भाजपा की नाराजगी के कारण उन्हें फायदा होगा यह विरोधी दलों की बड़ी भूल होगी क्योंकि ऐसी नाराजगी बिहार में भी और अन्य राज्यों में भी देखी गई थी लेकिन अंततः भा जा पा उन राज्यों में सफल हुई थी !
सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां अच्छे से समझ चुकी है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में उनके लिए जीत की सबसे बड़ी जमीन असम और बंगाल ही है अब देखना यह होगा कि 2 मई को पांच राज्यों की जनता क्या फैसला करती है.?
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देवेंद्र यादव, राजनीतिक विष्लेशक ओर पत्रकार कोटा, राजस्थान। |
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