देर से ही सही लेकिन समझ तो आई कांग्रेस को ?
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भारतीय जनता पार्टी चुनावों में अपना प्रदर्शन बेहतर क्यों करती है और क्यों जीतती है जबकि कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन कमजोर क्यों रहता है और क्यों हारती है?
इसकी वजह भाजपा के रणनीतिकार एक चुनाव में हार या जीत के बाद दूसरे चुनाव को जीतने की रणनीति बनाने में जुट जाते हैं जबकि कॉन्ग्रेस के अंदर स्वयंभू नेता अपने आप को बचाने या बेहतर बताने के जुगाड़ में जुटे रहते हैं, चुनावी जीत की रणनीति की जगह कांग्रेस के नेता अपने आप को कैसे स्थापित किया जाए इसकी रणनीति बनाने में अधिक दिखाई देते हैं ! गोवा कर्नाटक मध्य प्रदेश इसके जीते जागते उदाहरण है, राजस्थान में भी कुछ नजारा ऐसा ही था लेकिन राजस्थान को समय रहते हुए संभाल लिया !
जिन पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव इस समय चल रहे हैं उन विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले कांग्रेस के भीतर अंतः कल है, देखा गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर आवाज उठा कर अपनी कुंठा बता रहे थे, कांग्रेस के जिन नेताओं को पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों मैं जीत की रणनीति बनानी थी और चुनावों में भाग लेना था वह नेता कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर सवाल खड़े करते नजर आए !
शायद कांग्रेस का एक ऐतिहासिक सत्य यह है कि कांग्रेस लंबे समय तक देश की सत्ता पर रहती है तब कांग्रेस के भीतर कार्यकर्ताओं की कमी हो जाती है जबकि नेता ज्यादा हो जाते हैं, कार्यकर्ताओं का अभाव और नेताओं की भरमार कांग्रेस के कमजोर होने का कारण बन जाती है ! और जो कार्यकर्ता बचते भी हैं वह स्वयंभू नेताओं के कार्यकलापों के कारण अपने आप को कुंठित महसूस कर अपने घरों से बाहर नहीं निकलते हैं, ऐसे नेताओं की कांग्रेस के अंदर अधिक भरमार है जो अपने चुनाव दर चुनाव हारते रहे फिर भी वह अपने आप को कांग्रेस के भीतर कद्दावर नेता समझते रहे, ऐसे स्वयंभू नेताओं के कारण कांग्रेस उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश जैसे बड़े राज्य खोती चली गई, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस दशकों से सत्ता से बाहर है आज कांग्रेस देश के बहुत से राज्यों में चंद्र विधानसभा सीटों के लिए समझौता करने के लिए मजबूर है ऐसा क्यों जबकि इन राज्यों में कांग्रेस ने स्वयं की दम पर अपनी मजबूत सरकारें चलाई हैं !
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने की जगह कांग्रेस के रणनीति कार किसान आंदोलन मैं ज्यादा व्यस्त नजर आए जबकि भाजपा के रणनीतिकार पांच राज्यों में चुनाव कैसे जीता जाए इसकी रणनीति बनाते हुए नजर आए, भाजपा के रणनीतिकारों ने उन राज्यों पर ज्यादा ध्यान दिया जिन राज्यों में भाजपा अपनी सरकार बना सकती है भाजपा का ज्यादा फोकस पश्चिम बंगाल असम और पांडुचेरी पर नजर आया, और इन राज्यों में भा ज पा अच्छा प्रदर्शन भी करती हुई दिखाई दे रही है, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में खासकर पश्चिम बंगाल और असम में देखा जा रहा है की महंगाई बेरोजगारी और निजी करण को लेकर भाजपा की केंद्र सरकार कटघरे में खड़ी होती वहां भी भाजपा के रणनीतिकारों और नेताओं ने इन मुद्दों पर विपक्ष को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है ! पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा के नेता बेरोजगारी और महंगाई दोनों का मुद्दा स्वयं उठा रहे हैं और मतदाताओं को आश्वासन दे रहे हैं कि यदि वह सत्ता में आए तो महंगाई और बेरोजगारी पर अंकुश लगाएंगे !
कांग्रेस देर से ही सही संभली और चुनाव की कमान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रियंका गांधी ने अपने हाथों में भी राहुल गांधी दक्षिण में अपना फोकस रखने लगे जबकि प्रियंका गांधी ने पूरी तरह से असम की कमान अपने हाथों में ली परिणाम सामने हैं दक्षिण में तमिलनाडु में कांग्रेस नीत गठबंधन की संभावना अधिक दिखाई देने लगी वही असम के अंदर कांग्रेस की ऐसी स्थिति बन गई है कि वह सत्ता में वापसी कर सकती है !
असम कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित राज्य था जहां वह बड़े बहुमत के साथ अपनी सरकार बना सकती थी लेकिन असम में रणनीति बनाने में कुछ देरी हुई कांग्रेस को मारवाड़ी राजस्थानी को संभालने के लिए अशोक गहलोत सचिन पायलट जैसे नेताओं को पहले भेजना चाहिए था वही तेजस्वी यादव को भी पहले से सक्रिय करना चाहिए था लेकिन देर से ही सही सचिन पायलट और तेजस्वी यादव दोनों नेता असम गए जिसका प्रभाव 2 मई को परिणाम आने के बाद अवश्य देखने को मिलेगा, असम चुनाव में प्रियंका गांधी की युवा रणनीति भी कारगर सिद्ध होगी और यह रणनीति कांग्रेस के लिए भविष्य का वरदान भी सिद्ध होगी?
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Devendra Yadav Sr.Journalist & Political Analytic |
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