"बंगाल चुनाव 2021"
क्या भाजपा उत्तर प्रदेश की तरह प्रचंड बहुमत से जीतेगी या दिल्ली की तरह साफ हो जाएगी ?
कई बार चुनावी शोर और राजनीतिक पार्टियों के जीत के दावे के बीच, राजनीतिक पंडितों चुनावी विशेषज्ञ और जनता के अनुमान भी धरे के धरे रह जाते हैं और वह देखने को मिल जाता है जिसका अनुमान उन्होंने कभी लगाया भी नहीं था !
यह 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देखा था जब उत्तर प्रदेश में लग रहा था कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन सरकार बनाएगा कयास यह भी लगाए जा रहे थे कि, "मायावती की पार्टी बहुजन समाज एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की सत्ता में पुनः वापसी करेगी" लेकिन उत्तर प्रदेश के परिणाम भाजपा के पक्ष में आए पहली बार उत्तर प्रदेश में भाजपा ने न केवल पूर्ण बहुमत के साथ बल्कि प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाई और जिन दलों के बारे में यह अनुमान लगाया जा रहा था की वह लगातार जीतेंगे और वापसी करेंगे उनका प्रदर्शन शर्मसार करने वाला रहा !
2014 और 2019 में लगातार जीत के बाद भाजपा के नेता अति उत्साही आने लगे, भाजपा नेताओं का यह उत्साह दिल्ली विधानसभा के चुनावों में देखा गया। भाजपा नेताओं के उत्साह और चुनावी रणनीति को देखने से लगता था कि दिल्ली में भाजपा अपनी सरकार बना लेगी लेकिन जब परिणाम आए तब आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत के साथ हैट्रिक बनाई और भाजपा 10 का आंकड़ा भी नहीं छुपाई !
भाजपा को पश्चिम बंगाल मैं 2019 के लोकसभा चुनावों में पहली बार बड़ी सफलता मिली थी। उसके दर्जन भर से अधिक सांसद बने थे। 2019 लोकसभा चुनाव के अंदर पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिले समर्थन से भाजपा के नेता ओतप्रोत होकर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में चुनाव घोषणा होने से पहले ही से तैयारियों में जुट गए थे।
या यूं कहें 2019 की सफलता के बाद से ही भाजपा के नेता 2021 का विधानसभा चुनाव जीतने की तैयारी में जुट गए थे ! भाजपा के मुख्य रणनीतिकार गृहमंत्री अमित शाह दावा कर रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में इस बार 200 से अधिक सीट लेकर अपनी सरकार बनाएगी। अमित शाह के दावे का पता तो 2 मई को चलेगा जब बंगाल के चुनावों की मशीनें खुलेंगी और परिणाम घोषित होंगे।
लेकिन उत्तर प्रदेश और दिल्ली विधानसभा के चुनाव को केंद्र में रखकर बंगाल के चुनाव का विश्लेषण करें तो उत्तर प्रदेश में भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ चुनाव जीती थी और दिल्ली में उसे शर्म नाक हार मिली थी, उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी का जादू चल रहा था।
मोदी है तो मुमकिन है यह नारा लोगों के जहन में चढ़ा हुआ था, वही उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा ने क्षेत्रीय दलों से भी गठबंधन किया हुआ था और उस गठबंधन के कारण भी भाजपा को फायदा हुआ था लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा अकेले दम पर चुनाव लड़ी थी और दिल्ली चुनाव में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का जादू जनता पर असर कर रहा था केजरीवाल के जादू के सामने नरेंद्र मोदी का जादू नहीं चला और भाजपा को एक बुरी हार का सामना करना पड़ा। यदि दिल्ली विधानसभा के चुनाव से पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की तुलना करें तो बंगाल में भी भाजपा अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ रही है।
बंगाल में ममता बनर्जी का प्रभाव आज भी कम होता दिखाई नहीं दे रहा है। जहां तक प्रधानमंत्री मोदी के प्रभाव की बात करें तो, उनकी किसान सम्मान निधि योजना जो ममता बनर्जी सरकार ने बंगाल में लागू नहीं होने दी कारगर सिद्ध हो सकती है। भाजपा का फोकस किसान सम्मान निधि पर अधिक रहेगा।
भाजपा के नेता इस चुनाव में उज्जवला योजना का शायद कम ही जिक्र करेंगे क्योंकि गैस सिलेंडर के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है। इसलिए उसका जिक्र कम ही सुनाई देगा जबकि भाजपा ने इस योजना के तहत चुनावों में बड़ा फायदा उठाया था !
बंगाल में चुनाव परिणाम क्या होगा इसका अभी हमें इंतजार करना होगा और इंतजार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनाव सभाओं का भी करना होगा !
देवेंद्र यादव
कोटा, राजस्थान
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विष्लेशक हैं )
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