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Wednesday, April 21, 2021

4/21/2021 09:41:00 AM

कोविड-19 का दूसरा चरण "लॉकडाउन जरूरी है या राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी जरूरी है ?"



देश में बढ़ते कोरोना महामारी के प्रकोप ने देश के भीतर अनेक सवाल खड़े कर दिए ! ऑक्सीजन वेंटिलेटर अस्पताल में बेड की कमी होने के निरंतर समाचार सुनने को मिल रहे हैं वही जरूरत की दवाइयों में कमी और दवाइयों की कालाबाजारी होने के भी समाचार सुनाई दे रहे हैं !  कोरोना महामारी से पीड़ित लोगों की संख्या और पीड़ित लोगों की मौत की बढ़ती संख्या लोगों में घबराहट और तनाव पैदा कर रही है,  लोगों  के तनाव तनाव का एक कारण ऑक्सीजन वेंटिलेटर दवाइयां और अस्पताल में जगह नहीं मिलने का समाचार भी है,  ऐसे में सरकारों और स्वयंसेवी संस्थाओं को देश मैं एक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है या नहीं ? 


प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 20 अप्रैल मंगलवार के दिन देश के सामने आए और उन्होंने देश को संबोधित करते हुए जागरूकता पर ही बल दिया, उन्होंने नवरात्रि और रमजान का हवाला देते हुए संयम धैर्य और अनुशासन  बनाए रखने का संदेश दिया !

 इस समय देश के भीतर 2 सवाल उठ रहे हैं एक देश के भीतर संपूर्ण लॉकडाउन लगे और दूसरा सवाल देश में राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी लगे ?  इसी बीच सवाल यह खड़ा होता है की क्या लॉकडाउन और हेल्थ इमरजेंसी लगने के बाद बीमारी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी ? क्योंकि देश ने पिछले दिनों कोविड 19 के प्रथम चरण में संपूर्ण लॉकडाउन देखा था जो लंबे समय तक चला था इस लॉकडाउन के कारण कोरोना महामारी पर अंकुश तो लगा लेकिन देश के सामने आर्थिक बीमारी आकर खड़ी हो गई,  कोरोना महामारी के साथ ही देश आज  आर्थिक बीमारी से भी लड़ रहा है ऐसे में यदि संपूर्ण लॉकडाउन लग जाता है तो देश के सामने आर्थिक बीमारी का भी संकट  कोरोना महामारी से भी बड़ा खड़ा हो जाएगा ! 

देश में राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी लगाने का सवाल क्यों खड़ा हो रहा है?

इसका कारण कोरोना महामारी का बढ़ता प्रकोप तो हे ही साथ में बड़ा कारण यह है कि केंद्र और  राज्य सरकारों मैं बैठे नेताओं के बीच कोरोना महामारी को लेकर सामंजस्य और तालमेल का अभाव होना भी है सामंजस्य के स्थान पर  सत्ताधारी नेता एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आ रहे हैं, वैसे यह नई बात नहीं है कोरोना महामारी की देश में दस्तक देने के बाद से ही  पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप और प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था जो आज भी जारी है बीमारी अभी भी वही खड़ी हुई है जहां से वह शुरू हुई थी ! सवाल क्यों खड़ा होता है इसलिए की बढ़ते कोरोना महामारी के प्रकोप को देखते हैं महाराष्ट्र राजस्थान और दिल्ली राज्य सरकारों ने अपने-अपने राज्यों में लॉकडाउन लगा दिया है यह तीनों ही राज्य गैर भाजपा राज्य हैं जबकि भाजपा शासित राज्यों ने लॉकडाउन नहीं लगाया है बल्कि भाजपा शासित प्रदेश में हाई कोर्ट के कहने के बाद भी कुछ स्थानों पर लॉकडाउन नहीं लगाया ! इन्हीं बातों मैं सवाल पैदा किया की देश में राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी लगे और तमाम नियंत्रण केंद्र अपने हाथों में ले !

वैसे राष्ट्रीय हेल्थ इमरजेंसी लगाए जाने के बाद जो काम गति पकड़ते वह काम इमरजेंसी नहीं लगने के बाद भी हो रहे हैं ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश  के फार्मा उद्योग से जुड़े लोगों के साथ बात कर दवाइयों का उत्पादन बढ़ाने को कहा वही 18 साल से ऊपर वाले युवकों को भी कोरोना की वैक्सीन 1 मई के बाद देने का ऐलान किया और ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए ऑक्सीजन प्लांट की संख्या अधिक बढ़ाने की घोषणा भी की !

 प्रधान मंत्री की घोषणाओं से लग रहा है कि कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार की निरंतर राज्यों और संबंधित लोगों के साथ पुख्ता मॉनिटरिंग भी हो रही है, देश के ज्यादातर विशेषज्ञ का मानना और कहना है कि इस वक्त देश को जागरूकता और धैर्य रखने की सख्त जरूरत है जनता को पैनिक नहीं होना और ना ही पैनिक फैलाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए ! अत्यधिक जरूरत महसूस हो तभी अस्पतालों का  रुख करें अकारण ही अस्पतालों के अंदर भीड़ जमा नहीं करें, भीड़ होने के कारण हेल्थ कर्मियों और स्वयं भीड़ को भी असुविधा होती है इसलिए धैर्य और संयम रखें अफवाहों पर कम ध्यान दें !

Devendra Yadav
Sr.Journalist & Political Analytics


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