बंगाल चुनाव 2021
"बेगम'' का जवाब, शांडिल्य है क्या ?
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पश्चिम बंगाल विधानसभा का केंद्र में सत्तारूढ़ भा ज पा और पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के विकास कार्यों से निकलकर, भाजपा के चुनावी पारंपरिक मुद्दों पर आकर रुक गया है क्या ! 27 मार्च को पहले चरण के मतदान के बाद दूसरे चरण के मतदान के लिए भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की ओर से बेगम और गोत्र जैसे मुद्दे सामने दिखाई दिए, और सामने भाजपा के अपने राजनीतिक झंडे के अतिरिक्त भगवा झंडा भी गलियों चौराहों और सड़कों पर बेशुमार दिखाई दिए !
दूसरे चरण के मतदान से पहले पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र प्रमुख चुनावी केंद्र बना रहा क्योंकि नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही है इस सीट से भाजपा ने तृणमूल से भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री शुभेंदु अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा है शुभेंदु नंदीग्राम से ही विधायक भी हैं ! प्रथम चरण के मतदान के बाद सुश्री ममता बनर्जी ने नंदीग्राम पहुंचकर 4 दिन के लिए यहां अपना चुनावी डेरा डाल लिया था वही भाजपा के तमाम प्रमुख नेताओं ने भी नंदीग्राम पर ही अधिक फोकस डालना शुरू कर दिया ! दूसरे चरण का प्रचार थमने से पहले देश के गृहमंत्री अमित शाह ने नंदीग्राम में अपना रोड शो किया तो वही ममता बनर्जी ने भी एक चुनावी सभा को संबोधित किया !
इस बीच भाजपा के नेताओं ने ममता बनर्जी को " बेगम बताया तो वही ममता बनर्जी ने अपने आप को शांडिल्य ब्राह्मण बता कर अपना गोत्र बताया !
भाजपा के नेता क्या ममता बनर्जी को बेगम शब्द का इस्तेमाल कर उन पर मुस्लिम तुष्टिकरण का आरोप लगा रहे हैं और ऐसे बयान देकर क्या भाजपा के नेता ममता बनर्जी को चुनावी जाल में फसा रहे हैं?
ममता बनर्जी भाजपा के बेगम जैसे बयानों पर जवाब दें और वह भाजपा के जाल में फंस जाएं ऐसा देखा भी गया है जब ममता बनर्जी ने अपना गोत्र बताया, शायद भाजपा के रणनीतिकार यही तो चाहते थे और इसीलिए मुख्यधारा के मीडिया में ममता बनर्जी के गोत्र पर ही चर्चा होती हुई सुनाई दी मीडिया में चर्चा को भाजपा के नेता गिरिराज सिंह ने ज्यादा बल दिया जब उन्होंने बयान दिया कि ममता बनर्जी हार के डर से अब अपना गोत्र बता रही है !
ओवैसी ने भी इस पर बयान दिया ओवैसी का बयान भी मीडिया के भीतर चर्चा में रहा ऐसे में क्या ममता बनर्जी भा जा पा के जाल में फंसी हुई दिखाई देने लगी हैं ? और सुश्री ममता बनर्जी को दूसरे चरण के मतदान से पहले सारे विपक्ष की याद क्यों आई, ममता बनर्जी ने कहा कि सारे विपक्ष को भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए यही बात कुछ समय पहले मैंने अपने ब्लॉग में लिखी थी की बंगाल चुनाव पूरा होने से पहले क्या विपक्षी दल भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाएंगे, लेकिन अब विपक्ष के एकजुट होने का कोई फायदा नहीं है बल्कि विपक्ष की एकजुटता का फायदा अब भाजपा को ही मिलेगा क्यों,
क्योंकि बंगाल चुनाव में देखा जा रहा था की एक तरफ अकेली ममता बनर्जी हैं तो वही दूसरी तरफ भा ज पा के तमाम बड़े नेता और केंद्र सरकार में बैठे आला मंत्री हैं तो वही कांग्रेस और वामदल ओवैसी जैसे नेता है, बंगाल चुनाव से पहले भाजपा जहां भी चुनाव लड़ती थी वहां भाजपा के नेता यह प्रचार करते हुए दिखाई देते हैं कि एक तरफ अकेले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं तो वहीं दूसरी तरफ सारा विपक्ष है इसका फायदा अक्सर चुनावों में भाजपा को मिलता रहा है.
यह स्थिति इस समय बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी के पक्ष में बनती हुई दिखाई दे रही है .लेकिन ममता बनर्जी का आह्वान कि विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाएं ममता के लिए यह फायदे का सौदा नहीं है यदि इतिहास पर नजर डालें तो क्योंकि इसी तरह की रणनीति का फायदा भाजपा ने अक्सर उठाया है बंगाल में भाजपा एकला चालो रे वाले मुद्दे पर ममता बनर्जी के सामने फसी हुई दिखाई दे रही !
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस बार ऐसी कोई गलती नहीं की जिसके कारण वह भाजपा के जाल में फस जाए कांग्रेस इस बार राजनीतिक रणनीति के तहत अपना काम करती हुई दिखाई दी कांग्रेस अब अधिक फोकस असम चुनाव पर कर रही है, असम चुनाव में कांग्रेस ने राजस्थान के नेताओं को अधिक महत्व दिया क्योंकि असम के भीतर राजस्थान के मारवाड़ी यों का बड़ा प्रभाव है असम के व्यापार में मारवाड़ी यों की बड़ी भूमिका है इसीलिए असम का राष्ट्रीय प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह को बनाया वही मीडिया में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ को बड़ी जिम्मेदारी दी वही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट को असम पहुंचाया यह चारों ही नेता राजस्थान से हैं !
लौटते हैं पश्चिम बंगाल पर पश्चिम बंगाल में क्या विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट होगा और यदि एकजुट हुआ भी तो क्या अब इसका फायदा विपक्ष को मिलेगा या इसका बड़ा फायदा भाजपा को ही होगा ? बंगाल में 8 चरणों में चुनाव संपन्न होंगे 29 अप्रैल को अंतिम चरण का मतदान होगा पांच राज्यों में संपन्न हो रहे विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बंगाल चुनाव में होने वाली सभाओं पर सबकी नजर है प्रधानमंत्री की अंतिम सभा भी चुनावी माहौल को एकदम बदल देने की ताकत रखती है इसलिए सबकी नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभाओं पर अधिक होती है !
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Devendra Yadav Sr. Journalist & Political Analytic |
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