किसे कहते हैं भगवान ? भगवान की परिभाषा क्या है ?
बुद्ध कहलाते हैं , अरहर , अरिहंत , कहलाते हैं । विकार रूपी अरि, अर यानि दुश्मन ।
विकार रूपी दुश्मनों को जड़ से नष्ट कर दिया इसलिए बुद्ध अरिहंत ,अरहर भी कहलाते हैं ।
बुद्ध एक उपाधि है , भगवान एक उपाधि है । भग्ग का अर्थ है , नष्ट करना ।
हर इंसान अपने विकारों को भग्ग कर के खुद ही भगवान बनें इसलिए बुद्ध ने सत्य का मार्ग खोजा ।
सत्य चेतना का प्रवाह हर इंसान की काया के भीतर है , जिसे आप सब ईश्वर अल्लाह ,राम ,खुदा , वाहेगुरु ईशु आदि नामों से पुकारा करते हो उसका तो कोई नाम ही नहीं है ,उसे बुद्ध ने सत्य का ,ओर उस सत्य चेतना के प्रवाह को काया के भीतर देख लो ऐसा रास्ता बता दिया ,वो मार्ग ही , अशोक चक्र है , धम्म पथ है ,जिसे विपश्यना पथ भी कहते हैं । धन्य हैं बैधिसत्व डा. भीमराव अम्बेडकर जी जिन्होंने अनंत दुखों से मुक्ति का मार्ग , हमें राष्ट्रीय ध्वज पर अंकित करके , अशोक चक्र के रूप में , दे दिया है ,केवल संविधान से ही हमें , निर्वाण प्राप्त करने का मार्ग ,जिसकी खोज बुद्ध ने की थी उस विपश्यना पथ को राज़ चिह्न के रूप में , बाबासाहेब ने हमें दे दिया है ।
अनंत सुखों का मार्ग ही अशोक चक्र है ।
दुखों से छुटकारा पाने का मार्ग ही अशोक चक्र है ।
अपनी काया के भीतर ही परम सत्य चेतना को देखने का मार्ग ही अशोक चक्र है ।
सत्य काया के भीतर है उसे शरीर के भीतर ही खोजों ।
जिस राम ईश्वर अल्लाह की तलाश आपको है उसे काया के भीतर जाकर विपश्यना करके देखो ,होगा तो मिल ही जायेगा उसके लिए बाहर न भटको ।
जरा सोचो सत्य काया के भीतर है तो बाहर कैसे मिलेगा , जप तप ब्रत उपवास पूजा पाठ कर्मकांड यज्ञ हवन आदि करनें से सत्य नहीं मिलेगा ।
आओं दस दिन के लिए विपश्यना करके पूरा विद्या सीखें ।
हम भारत के लोग सभी राष्ट्रीय ध्वज पर कदम कदम चलें और विश्व शांति स्थापित करें ।
Writer- Rajesh Shakya, Lecturer
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