क्या देश को, बंगाल से भाजपा और नरेंद्र मोदी का विकल्प मिलेगा ?
क्या पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव 2024 के आम चुनावों की पटकथा लिख रहा है ?
इसकी चर्चा बंगाल विधानसभा चुनाव के चौथे चरण के मतदान के बाद राजनैतिक गलियारों में एक बार फिर से होने लगी है, इस चर्चा का कारण पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी का वह आह्वान है जिसमें उन्होंने भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट होने की अपील की है !
सुश्री ममता बनर्जी की विपक्ष को एकजुट होने की अपील इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि विपक्ष लंबे समय से एकजुट होने का प्रयास कर रहा है मगर विपक्ष अपने प्रयासों में सफल नहीं हो पा रहा है उसकी वजह कहीं ना कहीं ममता बनर्जी भी रही हैं, विपक्ष ने कई दफा एकजुट होने का प्रयास किया लेकिन कई बार विपक्ष की मीटिंग मे ममता बनर्जी को अनुपस्थित होते देखा गया, अब स्वयं ममता बनर्जी विपक्ष से भाजपा के खिलाफ एकजुट होने की अपील कर रही हैं और उनकी इस अपील ने देश की राजनीति को एक बार फिर से गर्म कर दिया है, 2 मई को बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम क्या होंगे इसका तो अभी इंतजार करना होगा और इंतजार भा ज पा के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता का भी करना होगा ?
जहां तक भाजपा के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता का सवाल है यह सवाल तब ही खड़ा होता है जब किसी राज्य के विधानसभा चुनाव होते हैं ! बात दिल्ली विधानसभा चुनाव की करें या फिर बिहार विधानसभा चुनाव की उस समय भी ऐसी आवाज सुनाई दी थी ! दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय राजनीतिक पंडित और विशेषज्ञ यह कहने लगे थे कि भा जा पा का विकल्प आम आदमी पार्टी होगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकल्प अरविंद केजरीवाल होंगे लेकिन आज आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की स्थिति क्या है ! बिहार विधानसभा चुनाव के दरमियान भी कुछ ऐसा ही सुनाई दिया था की बिहार विधानसभा का चुनाव भा जा पा का राजनीतिक भविष्य तय करेगा लेकिन चुनाव परिणामों के बाद क्या हुआ और आज क्या स्थिति है ! अब बिहार और दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद एक बार फिर से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की आवाज सुनाई देने लगी है, यह आवाज शायद इसलिए भी वजन रखती है क्योंकि बंगाल विधानसभा चुनाव में भा जा पा से सीधा मुकाबला तृणमूल कांग्रेस का है वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सामना मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी कर रही हैं ! आजादी के बाद पश्चिम बंगाल मैं दशकों तक शासन करने वाली पार्टी कांग्रेस और वामपंथी दल नदारद से नजर आ रहे हैं, ऐसे में यदि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस अपनी सरकार बना लेती हैं और सुश्री ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के रूप में अपनी हैट्रिक बना लेती हैं तो यह आने वाले 2024 के आम चुनावों पर बड़ा असर डालेगा खासकर भाजपा की राजनीति पर !
क्या कारण है की विपक्ष कमजोर है और विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट नहीं हो पा रहा है ? राजनीतिक पंडितों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इस पर विश्लेषण तो किया लेकिन उन तथ्यों को शायद नजर अंदाज किया, दरअसल भाजपा के रणनीतिकारों ने राजनैतिक रणनीति के तहत देश के विभिन्न राज्यों में अपना जो नया केडर बनाया है उसके डर में ज्यादातर भागीदारी क्षेत्रीय दलों के कार्यकर्ताओं और नेताओं की है, इसका उदाहरण पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस है पश्चिम बंगाल में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को तोड़कर अपना नया केडर तैयार किया, कुछ ऐसा ही उसने कांग्रेस के कैडर को भी तोड़कर भाजपा में शामिल करा कर किया !
विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि विपक्ष के नाम पर केवल क्षत्रप ही बच्चे हैं इन क्षत्रप के पास अपना ना तो मजबूत जनाधार है और ना ही मजबूत केडर है। इसलिए विपक्ष भाजपा के मुकाबले कमजोर नजर आ रहा है। विपक्ष के पास जो मजबूत जनाधार वाले नेता और कार्यकर्ता थे उन्हें भाजपा ने एक एक कर भाजपा में शामिल कर लिया है ! इस कारण विपक्ष के पास मजबूत नेताओं और कार्यकर्ताओं की कमी हो गई ! अब विपक्ष के पास केवल क्षत्रप बच गए हैं जिनका अपना राजनैतिक स्वार्थ विपक्षी एकता मैं आड़े आ जाता है। और इसीलिए बार-बार विपक्षी एकता नेस्तनाबूद होती नजर आती है !
फिर भी बंगाल से विपक्षी एकता के लिए जो स्वर उठा है उसे अभी नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता है !
सवाल यह है कि क्या ममता बनर्जी बंगाल में हैट्रिक लगाएगी और क्या है ट्रिक के बाद ममता बनर्जी विपक्ष की सर्व सम्मत नेता होंगी क्योंकि शिवसेना भी बार-बार यह संदेश दे रही है कि विपक्ष को एकजुट होना चाहिए उनका इशारा शरद पवार को विपक्ष का नेता बनाने की तरफ है ?
फिलहाल विपक्ष के नाम पर यूपीए गठबंधन देश में है और उस गठबंधन की चेयर पर्सन कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी हैं ! और सोनिया गांधी ने यूपीए को मजबूती के साथ संभाल कर भी रखा है सोनिया गांधी के नेतृत्व में केंद्र में यूपीए की एक दशक तक सरकार भी रही है !
कॉन्ग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी होने के बाद, कांग्रेस सत्ताधारी भाजपा पार्टी के बाद देश की सबसे बड़ी पार्टी भी है, भाजपा के बाद देश की नजर कॉन्ग्रेस पार्टी पर ही अधिक रहती है ,इसलिए सवाल यह खड़ा होगा की यदि विपक्ष एकजुट होता हे तो क्या गठबंधन का स्वरूप नया होगा ? और उस गठबंधन का चेयर पर्सन कौन होगा ? क्या सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही देश का तमाम विपक्ष भाजपा के खिलाफ एकजुट होगा, या सोनिया गांधी के स्थान पर नया चेयर पर्सन होगा, और क्या विपक्षी एकता का नया चेयर पर्सन कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी होंगे क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के नेता के नाम पर भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ अकेले राहुल गांधी विरोध करते नजर आते हैं और राहुल गांधी ही विपक्ष की ओर से भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ हमेशा चर्चा में रहते हैं ! यदि ममता बनर्जी की बात करें तो ममता बनर्जी भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ चर्चा में इसलिए दिखाई दे रही है,क्योंकि उनकी बंगाल की सत्ता विधानसभा चुनाव में खतरे में नजर आ रही है? ममता बनर्जी उस खतरे से आहत होकर ही विपक्ष की एकता की बात कर रही हैं! होने वाले एकजुट विपक्ष का नेता गैर कांग्रेसी होगा ? और क्या कॉन्ग्रेस इस चुनौती को सहज स्वीकार कर नई विपक्षी एकता के साथ लग जाएगी ? यह तमाम सवाल है जिनके जवाब का अभी इंतजार करना होगा?
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Devendra Yadav Sr.Journalist & Political Analytics |
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