Hand-Picked/Weekly News

Travel
Thursday, April 15, 2021

4/15/2021 08:37:00 AM
1

बंगाल चुनाव में चौथे चरण के बाद यूं अचानक राहुल गांधी का जाना?


बंगाल चुनाव, "खेला होवे, सोनार बांग्ला और दीदी ओ दीदी " जैसे नेताओं के द्वारा दिए गए स्लोगनों के कारण देशभर में  चर्चित रहा है ! बंगाल चुनाव के चौथे चरण की समाप्ति के बाद पांचवें चरण के प्रचार के अंतिम दिन 14 अप्रैल को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने बंगाल में पहुंच कर एक बार फिर से बंगाल चुनाव को चर्चा में लाकर खड़ा कर दिया है ! सवाल यह उठ रहा है कि लगभग आधार चुनाव खत्म होने के बाद अचानक राहुल गांधी बंगाल चुनाव में क्यों पहुंचे ?  जबकि राहुल गांधी  पश्चिम बंगाल से सटे राज्य असम में चुनावी प्रचार कर रहे थे उस समय राहुल गांधी बंगाल क्यों नहीं पहुंचे !

जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम में भी और बंगाल में भी पहले दिन से बराबर चुनावी रैलियां और जन सभाएं कर रहे हैं!

राहुल गांधी के बंगाल चुनाव में अचानक पहुंचने से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आह्वान विपक्षी एकता भी तार तार हो गई !

सुश्री ममता बनर्जी ने एक बार नहीं बल्कि दो बार भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लड़ने के लिए बंगाल में तमाम विपक्षी दलों को एक होने का आह्वान किया था,  ममता बनर्जी का संकेत स्पष्ट था की कॉन्ग्रेस वामदल और ओवैसी की पार्टी ममता बनर्जी के साथ खड़े होकर भा ज पा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव में एकजुट होकर सामना करें !

 ममता बनर्जी के आह्वान के बाद और कांग्रेस के बंगाल चुनाव में  राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जैसे बड़े नेता के नहीं पहुंचने के कारण ऐसा लग रहा था की शायद भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी के आह्वान पर तमाम विपक्ष एकजुट हो गया है लेकिन 14 अप्रैल को उस अटकल से राहुल गांधी ने बंगाल पहुंचकर ममता बनर्जी को और नरेंद्र मोदी को घेरकर पर्दा उठा दिया है की बंगाल में कांग्रेस गठबंधन भी भाजपा के खिलाफ अकेले चुनावी मैदान में है, जहां तक विपक्षी एकता का सवाल है क्या ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता की अपील करने में देरी कर दी ?

ममता बनर्जी को विपक्ष से एकता की अपील विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले करनी चाहिए थी,  ममता बनर्जी ने विपक्ष से एकता की अपील तब की जब ममता बनर्जी बंगाल चुनाव में भाजपा के सामने फस गई हैं ! क्या ममता बनर्जी को यह विश्वास नहीं था कि भा जा पा बंगाल में अपना रूद्र रूप भी दिखा सकती है और वह सरकार बनाने की स्थिति में भी आ सकती है शायद ममता बनर्जी को ऐसा अनुमान होता तो जो बात ममता विपक्षी एकता की आज कर रही है वह बात चुनाव की घोषणा होने से पहले भी कर सकती थी ! गत दिनों बिहार में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में आरजेडी ने भी सूज भुज से काम किया और तेजस्वी यादव ने कांग्रेस से अपना गठबंधन बरकरार रखा और परिणाम जो भी  निकला लेकिन बिहार में कांग्रेस नीत गठबंधन ने साझा चुनाव लड़ा वैसा ही गठबंधन चुनाव से पूर्व पश्चिम बंगाल में भी ममता बनर्जी कर सकती थी !

 राहुल गांधी चौथे चरण के बाद बंगाल चुनाव में पहुंचे और उन्होंने अपनी पहली सभा में बंगाल की जनता से कहा कि मैं यहां चुनाव के उद्देश्य से नहीं आया हूं बल्कि मैं यहां बंगाल की जनता को सावधान और सचेत करने आया हूं,  राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बंगाल को लेकर नीतियों पर भी कटाक्ष किया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी घेरा !  राहुल गांधी का बंगाल चुनाव में दिया गया भाषण कोई खास भाषण नहीं था उन्होंने वही बातें दोहराएं जो बातें वह लगातार प्रत्येक चुनाव में बोलते आ रहे हैं हां बंगाल की उनकी चुनावी सभा में जनता ने राहुल गांधी का तेज भी देखा दुख और दर्द और गुस्सा भी देखा ! दुख यह था कि नोटबंदी जीएसटी और कोरोना महामारी के बाद से लेकर अब तक राहुल गांधी देश को इनसे होने वाले नुकसान और संकट के बारे में जनता को समझा रहे हैं दर्द इस बात का है कि जनता राहुल गांधी के दुख और दर्द को ठीक से समझ नहीं पा रही है गुस्सा उस मुख्यधारा के मीडिया पर था जो सरकार के साथ मिलकर सच्चाई को छिपा रही है उस पर बात नहीं कर रही है और ना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किए जा रहे हैं बल्कि 24 घंटे टीवी चैनलों पर मोदी का गुणगान किया जा रहा है राहुल गांधी ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में मीडिया पर यह आरोप लगाया है !

राहुल गांधी के अचानक बंगाल चुनाव में जाने के बाद बंगाल चुनाव के केंद्र में अभी तक नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी ही नजर आ रहे थे अब जनता को और देश को राहुल गांधी भी नजर आएंगे ! बंगाल चुनाव  कोरोना महामारी को लेकर भी चर्चा में है चर्चा इस बात की हो रही है कि एक तरफ देश में कोरोना महामारी से हाहाकार मचा हुआ है तो वहीं देश के जिम्मेदार नेता चुनावी रेलिया और जनसभाएं कर रहे हैं सबसे बड़ा सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की रैलियों पर खड़ा हो रहा है ऐसे में राहुल गांधी के अचानक पश्चिम बंगाल चुनाव में पहुंचने के बाद राहुल गांधी से पहले चुनावी रैलियां करने वाले नेताओं को क्या ताकत मिली है,  क्योंकि कोरोना महामारी को लेकर महामारी के प्रवेश से लेकर आज तक राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को कटघरे में खड़े करते आए हैं।

 चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े हो रहे थे चुनाव आयोग ने बंगाल चुनाव को लेकर 16 अप्रैल को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है क्या यह एक इत्तेफाक है की 14 अप्रैल को राहुल गांधी का बंगाल चुनाव में प्रवेश करना और 16 अप्रैल को चुनाव आयोग के द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाना, जबकि चुनाव आयोग सर्वदलीय बैठक पहले भी बुला सकते थे, 16 अप्रैल की बैठक में क्या निर्णय होगा इसका अभी इंतजार करना होगा !

Devendra Yadav
Sr.Journalist & Political Analytics


1 Comments:

THANKS FOR COMMENTS