राष्ट्रीय आपदा: सुना है, लेकिन देखा नहीं है?
विश्व के सबसे बड़े युवा देश के युवाओं ने शायद राष्ट्रीय आपदा के बारे में ठीक वैसे ही सुना होगा की आजादी के 70 साल बाद भी देश में कुछ नहीं हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू देश को बर्बाद कर दिया? क्योंकि देश के युवा भारत में ना तो राष्ट्रीय आपदा को और ना ही 70 साल मैं देश के अंदर कितना कुछ हुआ और नाही उसने पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के लिए क्या-क्या किया था यह युवा भारत ने नहीं देखा है?
युवा भारत को तो बस एक ही पता है जो उसने देश के कर्णधार नेताओं के श्री मुख से सुना है!
और तो और देश में जो चंद लोग बचे हैं जिन्होंने राष्ट्रीय आपदा और आजादी के बाद 70 साल में देश के अंदर क्या क्या हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के अंदर क्या-क्या किया इसे अपनी आँखों से देखा था वह भी शायद गया था हैं, उन्हें भी अब स्मरण नहीं आ रहा है क्योंकि देश में ज्यादा आबादी वाले युवाओं की है जिन्होंने इतिहास को ना तो कभी पढ़ा है और ना ही याद किया है तो उन्हें सिर्फ नेताओं के श्री मुख से निकला वाक्य ही याद है!
इस बार पूरे विश्व और देश में कोरोना महामारी को लेकर हाहकार मचा हुआ है!
पिछले एक साल से कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में तांडव मचा रखा है, WHO ने इस बीमारी को विश्व की महामारी घोषित कर दिया है!
भारत में यह बीमारी अपना पहला चरण समाप्त कर दूसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है जिसने इन दिनों देश के अंदर तांडव मचा रखा है! इस बीमारी को रोकने के लिए देश और देश के विभिन्न राज्यों की सरकार पहले दिन से ही प्रयास कर रही थी सरकारों को इसमें सफलता भी मिली देश इस बीमारी को रोकने के लिए आत्मनिर्भर भी बना लेकिन दूसरा चरण कब तेजी से आ गया इसकी शायद यह भी पता है। नहीं चला पहले चरण से बच ही रहे थे की अचानक से दूसरे चरण भी आ धमका! दूसरा चरण पहले चरण से अधिक घातक नजर आ रहा है वही देश में कोरोना महामारी को लेकर पहले चरण से अधिक दूसरे चरण में राजनीति होती हुई दिखाई दे रही है, चर्चा पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों और कुंभ मेले को लेकर हो रही है, हालांकि ऐसी वाक्य पहले चरण में भी देखा गया क्योंकि बीमारी देश में पहली बार देखी गई थी इसलिए देश की जनता ने राजनीति को नजर अंदाज कर अपने आप को बीमारी से बचाने पर अधिक ध्यान दिया!
चर्चा पांच राज्यों के चुनावों को लेकर अधिक हो रही है की देश में कोरोना महामारी ने तांडव मचा रखा है, और नेता पांच राज्यों में चुनावी प्रचार करने में व्यस्त नजर आ रहे हैं! जब नेताओं ने चुनावी रैली रोड शो और जनसभा करने का आरोप लगता है तो नेता अपनी सफाई में चुनाव आयोग को केंद्र बनाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और चुनाव में वापस व्यस्त हो जाते हैं!
क्योंकि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जो देश के संविधान पर चल रहा है! केंद्र में भले ही एक पार्टी की सरकार है लेकिन देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग हिस्सों की सरकारें हैं! कोरोना महामारी को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच भी राजनीति होती दिखाई दी है कि राजनीति नहीं इस बात पर भी हो रही है की किस राज्य में किस पार्टी की सरकार है और उस राज्य में कोरोना का प्रबंधन कैसा है इस पर भी राजनीतिक दलों के बीच आपस होती राजनीति होती हुई दिखाई दे रही है! यहीं से सवाल वह उठता है, जिसने सुना है लेकिन देखा नहीं है, राष्ट्रीय आपदा का सवाल, राष्ट्रीय आपदा क्या होता है पता नहीं जो आपदा कोरोना महामारी के रूप में देश की जनता देख रही है क्या वह राष्ट्रीय आपदा है इसका निर्णय कौन करेगा वह नेता जो इस समय पांच राज्यों के चुनावों में व्यस्त हैं या वह जनता जिसने राष्ट्रीय आपदा के बारे में बताया है। बताया गया है। केवल सुना है लेकिन देखा नहीं है की राष्ट्रीय आपदा घोषित कैसे होती है और राष्ट्रीय आपदा घोषित होने के बाद किन-किन कार्यों पर प्रतिबंध लग जाता है क्या राष्ट्रीय आपदा के समय देश के अंदर चुनाव भी हो सकते हैं? क्या इसका फैसला भी चुनाव आयोग ने किया है? या फिर यह निर्णय केंद्र की सरकार राष्ट्रीय आपदा के तहत लेती है? गतिविधि देश में कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं होनी चाहिए जिससे संक्रमण और अधिक फैले हो! कोरोना महामारी ने देश में तांडव मचा रखा है विभिन्न राज्यों की सरकारों ने अपने स्तर पर अपने हस्तक्षेप के प्रयास शुरू कर दिए हैं!
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देवेंद्र यादव सीनियर जर्नलिस्ट एंड पॉलिटिकल एनालिटिक्स |
जिस देश में प्रधान मंत्री के लिए चुनाव जीतना जनता की सेहत पर भारी हो और जिस देश की जनता अस्पताल एवं स्कूल कॉलेज के बजाय मंदिर मस्जिद मुद्दे पर वोट करती हो उसका तो सत्यानाश निश्चित है
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