विपक्ष के सुझाव और सवाल पर क्यों भड़के सत्ता पक्ष के नेता ?
ऑक्सीजन : निर्यात, लीकेज और लूट !
कोरोना महामारी के दूसरे चरण ने 21 अप्रैल बुधवार को मरीजों और मृतकों की संख्या में ऐतिहासिक बढ़ोतरी कर, अपना तांडव जारी रखा, वहीं पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने भी अपना आरोप और प्रत्यारोप का दौर भी जारी रखा !
कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रियंका गांधी ने कोरोना महामारी से एकजुट होकर लड़ाई लड़ने का सुझाव देकर अपील की तो वही श्रीमती गांधी ने ऑक्सीजन की कमी और ऑक्सीजन के निर्यात को लेकर केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर घेरा ! सत्ता पक्ष के नेताओं ने प्रियंका गांधी के आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया !
पक्ष और विपक्ष के आरोपों के बीच जहां देश में ऑक्सीजन को लेकर आहा कार मचा हुआ है वही दूसरी तरफ महाराष्ट्र के नासिक से हृदय विदारक खबर भी सामने आई जहां ऑक्सीजन का टैंकर अस्पताल के अंदर लीकेज हो गया और लीकेज के कारण सारी ऑक्सीजन जो वेंटीलेटर पर मरीज थे उनके काम आने वाली थी वह काम नहीं आई और 22 मरीजों की मौत हो गई !
दूसरी घटना मध्य प्रदेश के दमोह से आई जहां अस्पताल के अंदर पीड़ित लोगों ने अस्पताल के गोदाम में रखें ऑक्सीजन के सिलेंडर लूट लिए ! ऑक्सीजन लूटने वाले लोगों को आशंका थी की अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी है ऐसा ना हो की उन्हें जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन नहीं मिले ऐसे में वहां लूटपाट शुरू हो गई !
तीसरी बड़ी और अहम घटना पक्ष और विपक्ष के आरोपों के बीच एसी निकलकर सामने आई जिसने भविष्य को लेकर देश को शायद आगाह कर दिया है की आने वाले दिनों में क्या हो सकता है ? आवाज हरियाणा से आई और आवाज किसी साधारण व्यक्ति की तरफ से नहीं आई बल्कि हरियाणा के गृह मंत्री अनिल बीज के श्री मुख से निकलकर सामने आई की दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार के ऑक्सीजन के ट्रक को लूट लिया!
जब एक सरकार दूसरी सरकार के ऑक्सीजन ट्रक को लूट रही है उसके सामने दमोह की घटना तो मानो एक साधारण सी घटना है !
भाजपा नेता हरियाणा सरकार के गृह मंत्री अनिल विज के बयान और दमोह में ऑक्सीजन की लूट क्या यह संदेश दे रही है कि देश के अंदर कोरोना महामारी और उसके बचाव मैं हो रही असुविधा के कारण अराजकता का माहौल बनता जा रहा है क्या ?
कोरोना महामारी को लेकर देश में हाहाकार और ऑक्सीजन दवाइयों और अस्पतालों में बेड को लेकर एक तरफ अफरा-तफरी मची हुई है तो वही कोरोना महामारी की लड़ाई को जीतने के लिए तैयार हेल्थ वर्कर्स भी व्यवस्थाओं को लेकर नाराज दिखाई दे रहे हैं ! इस समय देश में एक ही तरह की आवाज सुनाई दे रही है,
" जब तुम रहते ज्यों के त्यों, ताल कमंडल जाते क्यों "
जब देश में कोरोना महामारी का पहला चरण आया था उस दौर मैं राज्य सरकारों के बेहतर प्रबंधन और जनता के धैर्य विश्वास ने कोरोना महामारी पर देश को आंशिक जीत दिलाई थी मगर सत्ता में बैठे नेता इस जीत को गलती से पूर्ण जीत समझ बैठे और जीत का जश्न मनाने लगे लेकिन जश्न के बीच ही कोरोना महामारी ने देश पर दूसरी बार आक्रमण किया जो पहले से अधिक घातक था ! दुश्मन के आक्रमण की रणनीति को विश्व में भारत से अधिक और कौन सा देश होगा जो अच्छे से समझता होगा क्योंकि इतिहास गवाह है भारत ने दुश्मनों के के ई खतरनाक आक्रमणों को झेला है, लेकिन देश कोरोना महामारी के दूसरे आक्रमण को कैसे नहीं समझ पाया यह एक सवाल है ?
जहां तक कोरोना महामारी के पहले चरण की बात करें तो पहले चरण में जनता के धैर्य विश्वास और राज्य सरकारों के बेहतर प्रबंधन के कारण देश ने कोरोना महामारी पर सफलता पाई थी लेकिन पहले चरण मैं ही राज्य सरकारों में केंद्र सरकार से गुहार लगानी शुरू कर दी थी की राज्य सरकारों के पास धन का अभाव हो गया है केंद्र सरकार राज्य सरकारों को आर्थिक मदद दे और यह मदद तुरंत मुहैया कराई जाए राज्य सरकारें अपने हक का जीएसटी का पैसा देने के लिए केंद्र सरकार के सामने गिड़गिड़ा ते हुए भी नजर आई !
अब सवाल वही खड़ा हुआ है की क्या इस समय राज्य सरकारों की माली हालत ठीक है या कमजोर है? और इसी कमजोरी के कारण वह कोरोना महामारी से ठीक से जंग नहीं लग पा रही है !
पहले चरण की ही तरह दूसरे चरण में भी बड़ी जिम्मेदारी राज्य सरकारों के सिर पर दिखाई और सुनाई दे रही हैं ! ऐसे में कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार की जिम्मेदारी क्या हो इस पर भी अब सवाल उठने लगे हैं ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist & Political Analytics |
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