"सिस्टम का अर्थ, ब्यूरोक्रेसी और राजनेताओं की जुगलबंदी हे क्या ?
हार्ट फेल, किडनी फेल, लीवर फेल और फेफड़े फेल, यह वह वैज्ञानिक शब्द है, जिनके बारे में जनता तब सुनती है। जब किसी इंसान की मृत्यु हो जाती है तब डॉक्टर कहता है " हार्ट फेल होने के कारण हम आपके पेशेंट को नहीं बचा पाए हम माफी चाहते हैं !
इन दिनों कोरोना महामारी के बीच, एक शब्द 24 अप्रैल शनिवार को मीडिया के माध्यम से तेजी से सुनाई दिया की सिस्टम के फेल हो जाने के कारण देश में कोरोना तेजी के साथ बढ़ रहा है और जान-माल को नुकसान हो रहा है! सिस्टम राजनैतिक शब्द है जिसका इस्तेमाल वैज्ञानिक शब्द हार्ट फेल किडनी फेल लिवर फेल फेफड़े फेल होने के समान ही किया जा रहा है जैसे डॉक्टर मरीज की मृत्यु का ठीकरा मरीज पर ही छोड़ देता है की हमने तो मरीज को बचाने की बहुत कोशिश की मगर खेद है कि मरीज का हार्ट फेल हो गया इसलिए उसकी मृत्यु हो गई !
अब सवाल उठता है कि पेशेंट को उसके परिजन अस्पताल में इसीलिए तो लेकर गए थे की डॉक्टर मरीज की बीमारी को ठीक करें, हॉट किडनी फेफड़े और लीवर को ठीक करें यह ना कहे की,इनके फेल होने के कारण मरीज की मौत हो गई फिर वह डॉक्टर ही क्या जो मरीज की बीमारी को भापकर उसकी बीमारी का इलाज नहीं करें बल्कि यह कहे कि सारी हार्ट फेल होने के कारण मरीज की मृत्यु हो गई !
एक बात और, आम आदमी के संज्ञान में, हॉट फेल किडनी फेल लीवर फेल शब्द तब आते हैं जब देश के किसी बड़े आदमी की मृत्यु होती है तब मीडिया के माध्यम से आम जन को पता चलता है कि बड़े नेता की मृत्यु किस कारण से हुई ? कोरोना महामारी से उत्पन्न स्थितियों के बारे में भी मीडिया ही बता रहा है कि सिस्टम के फेल होने के कारण देश में यह परिस्थितियां बनी है !
मीडिया, हॉट फेल और सिस्टम फेल को लेकर किसकी जिम्मेदारी इसको नहीं बताता है बल्कि ऐसा लगता है जैसे मीडिया कुछ छिपा रहा है उसे याद है लेकिन बता नहीं रहा है ?
जनता डॉक्टर इसलिए बनाती है की वह मरीज की तकलीफ को समझे और उसका उपचार करें ठीक वैसे ही जनता अपना जनप्रतिनिधि इसलिए चुनती है कि वह जनता की समस्याओं को समझे और उसका समाधान करें ना कि सिस्टम फेल होने जैसे शब्दों का प्रयोग करें !
सिस्टम क्या है सवाल यहां खड़ा होता है क्या सिस्टम ब्यूरोक्रेसी और राजनेताओं की जुगलबंदी है ! इसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव विभिन्न राज्यों में लोकसभा और विधानसभा के उप चुनाव पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव से समझे ! कोरोना महामारी ने जब देश में दूसरी बार अपनी दस्तक दी और हाहाकार अफरा तफरी मची तब देश के भीतर से एक आवाज उठी की नेता चुनावों में व्यस्त हैं चुनाव आयोग को चुनाव निरस्त कर देना चाहिए या फिर नेताओं की चुनावी सभाओं और रैलियों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए लेकिन चुनाव आयोग ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया वही राजनेता अपनी सफाई में दलील देते रहे कि यह काम चुनाव आयोग का है की वह चुनाव करवाता है या नहीं या रैलियों और चुनावी सभाओं को रद्द करता है या नहीं !
राजनेताओं को जनता के आरोपों के बीच चुनाव आयोग पर लगे आरोपों पर भी डिफेंस करते देखा गया ! पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव बगैर रोक-टोक के चंद दिनों बाद 29 अप्रैल को समाप्त हो जाएंगे, मगर कोरोना महामारी अभी भी जस की तस बनी हुई है बल्कि अपना विकराल रूप दिन प्रतिदिन दिखा रही है ! यहीं से मीडिया में सिस्टम शब्द का उदय हुआ है क्योंकि जनता चुनाव खत्म होने के बाद देश के कर्णधार नेताओं से सवाल करेगी की जब देश में महामारी तांडव मचा रही थी तब आप कहां थे और यह सवाल अभी भी जनता की ओर से उठ भी रहा है, शायद इसी का जवाब सिस्टम का फेल होना है मगर उसमें यह नहीं बताया जा रहा है कि सिस्टम को चलाने वाले लोग कौन है ! अभी इंतजार करना होगा अभी तो बचाओ वाली डिक्शनरी में अनेक शब्द और होंगे जो मीडिया के माध्यम से एक एक कर सुनाई देंगे !
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