"आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है !
जरूरत पड़ने पर ही निर्माण होगा !
कोविड-19 ने देश को, आवश्यकता ही निर्माण की जननी है इसका एहसास करा दिया ! हालांकि शब्द यह नहीं है, ऐतिहासिक शब्द तो आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है सही वाक्य यह है !
लेकिन कोविड-19 ने भारत के सामने नए शब्द आवश्यकता ही निर्माण की जननी है का उदय किया और कोविड 19 ने अनेक क्षेत्र में निर्माण कर आत्मनिर्भर बनाया ! मास्क पीपीई किड्स वेंटीलेटर और वैक्सीन इसमें भारत आत्मनिर्भर बना, क्योंकि कोविड-19 के दौर में देश के पास इन आवश्यक सामग्रियों का अभाव था मजेदार बात यह भी सामने दिखाई दी की भारत जिसमें आत्मनिर्भर था उसी सामग्री को लेकर देश में आज अफरा-तफरी और हाहाकार देखने को मिल रहा है ! ऑक्सीजन, भारत दुनिया का सबसे बड़ा वह देश है जहां ऑक्सीजन का सर्वाधिक उत्पादन होता है, लेकिन कोरोना महामारी के दूसरे दौर में ऑक्सीजन को लेकर ही सबसे ज्यादा आहा कार मचा हुआ है और सवाल खड़े हो रहे हैं ! कोरोना महामारी के इस दौर में सबसे ज्यादा मौत होने का कारण ऑक्सीजन की कमी होना बता रहे हैं ! जिक्र सिस्टम को लेकर भी हो रहा है क्योंकि सरकार बता रही है कि देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
जबकि अस्पताल बता रहे हैं कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोरोना मरीजों की मौत हो रही है! ऑक्सीजन प्राण वायु आजादी के बाद से लेकर आज तक विभिन्न सरकार प्राण वायु को लेकर गंभीर भी थी और आज भी गंभीर हैं लेकिन गंभीरता का एहसास तब हुआ जब उसकी गंभीर आवश्यकता पड़ी ! आजादी के बाद प्राण वायु ऑक्सीजन पर देश के अंदर दो स्तर पर कार्य हुआ एक नेचुरल प्राणवायु दूसरा आर्टिफिशियल प्राणवायु नेचुरल प्राणवायु के लिए वृक्षारोपण जैसे सघन अभियान देशभर में चलाए गए वहीं दूसरी तरफ ऑक्सीजन के प्लांट लगाए गए
देश में नेचुरल और आर्टिफिशियल प्राणवायु ऑक्सीजन का भंडार होने के बाद भी आज कमी क्यों महसूस की जा रही है ? इस पर देश के भीतर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसी पर मंथन और चिंतन दोनों चल रहे हैं,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी पर चिंतन और मंथन कर घोषणा की है कि प्रत्येक जिले में ऑक्सीजन प्लांटों का निर्माण किया जाएगा, यह अच्छी खबर है इस पर किसी भी प्रकार की कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए क्योंकि आवश्यकता ही निर्माण की जननी है और देश को आज इसकी आवश्यकता है !
कोविड-19 के दूसरे चरण ने सरकार और बड़े-बड़े मेडिकल कॉलेज और नामी ग्रामी अस्पतालों के निर्माताओं को भी एक गंभीर संदेश दिया है, खासकर मेडिकल कॉलेज और नामी ग्रामी अस्पताल के निर्माताओं के लिए यह संदेश अधिक महत्वपूर्ण है ! बड़े-बड़े अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाने वाले निर्माताओं ने अपने अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अत्याधुनिक सुविधाओं का अंबार लगाया मगर उन्हें शायद कभी इस बात का एहसास कतई नहीं हुआ होगा की उन्हें ऑक्सीजन का प्लांट भी अपने परिसर में लगाना चाहिए था, शायद इसका एहसास उन्हें अब हो रहा होगा ! मेडिकल कॉलेज और बड़े-बड़े अस्पतालों ने बिजली के लिए अपने परिसर में करोड़ों रुपया खर्च कर सोलर ऊर्जा के प्लांट तो जरूर लगवा रखे होंगे मगर शायद वह ऑक्सीजन प्लांट लगवाना भूल गए क्योंकि उनके सामने ऑक्सीजन का गंभीर माजरा पहली बार सामने आया होगा देर से ही सही लेकिन अब क्या बड़े-बड़े अस्पतालों के निर्माता इस विषय को गंभीरता से लेंगे और अपने अपने परिसरों में ऑक्सीजन के प्लांट लगाएंगे ?
क्योंकि मौजूदा दौर में ऑक्सीजन की कमी और कमी के कारण मरीजों की मौत के समाचार ज्यादातर इन अस्पतालों से ही आ रहे हैं !
अब देखना यह होगा कि इन अस्पतालों के निर्माता ऑक्सीजन को लेकर कितने गंभीर हैं इसका एहसास जनता को तब होगा जब जनता इनके परिसर में ऑक्सीजन के प्लांट भी लगे हुए देखेगी जिसका हमें इंतजार करना होगा !
![]() |
Devendra Yadav Sr. Journalist |
0 Comments:
Post a Comment
THANKS FOR COMMENTS