" संविधान " मजबूत है,उसे समझना कठिन है क्या ? नेता अधिक समझदार हैं,या ब्यूरोक्रेट ?
देश में संविधान को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है लेकिन 2014 के बाद संविधान को लेकर कुछ ज्यादा ही चर्चा होती हुई सुनाई देने लगी है ! संविधान और संविधान के अंदर लिखें गए अधिकारों की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है, चर्चा संविधान की मजबूती को लेकर होती है की हमारा संविधान बहुत मजबूत है, वही इस बात का भी विरोध सुनाई देता है की संविधान की हत्या हो रही है ! 2014 के बाद यदि संविधान की चर्चा पर नजर डालें तो, सत्ता के भीतर बैठे नेता और सत्ता के बाहर बैठे नेताओं ने कई बार संविधान का पाठ पढ़ाया है जो आज भी जारी है ! समान नागरिकता कानून के खिलाफ आंदोलन हो या तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन हो या फिर बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन हो सभी को संविधान की याद आई ! निर्वाचित सरकारों को गिराना और सरकार गिरा कर अपनी सरकार बनाना तब भी संविधान की चर्चा सामने आई !
संवैधानिक संस्थाओं और नेताओं पर उठते सवाल भी संविधान की चर्चा को बल दे रहे हैं ! जब देश में संविधान को लेकर इतनी चर्चा हो रही है, ऐसे में यह कैसे संभव होता की,संविधान की चर्चा कोरोना महामारी में नहीं हो, कोविड-19 के दूसरे दौर में संविधान की चर्चा सुनाई देने लगी है, चर्चा आमजन के स्वास्थ्य के अधिकार को लेकर हो रही है !
हनुमान जयंती के दिन मंगलवार 27 अप्रैल को, दिन भर चर्चा दिल्ली सरकार के द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट के जजों और उनके परिवार वालों को, कोविड-19 के दौर में अशोका होटल के भीतर सो कमरों का कोविड अस्पताल बनाने पर हुई ! चर्चा आम नागरिक और खास नागरिक मैं फर्क और उनके संवैधानिक अधिकारों को लेकर हुई !
चर्चा प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार है, होने को लेकर हुई !
चर्चा इस बात पर भी हुई की न्याय विभाग को अलग से स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था है !
दिल्ली सरकार के हुक्म और व्यवस्था ने देश के भीतर यह सवाल खड़ा कर दिया की नेता अधिक समझदार हैं या ब्यूरोक्रेट ?
इसका खुलासा दिल्ली स्थित पांच सितारा अशोका होटल ने किया की, नेता ब्यूरोक्रेट से ज्यादा समझदार होते हैं ! कैसे? कोरोना महामारी के दूसरे दौर में दिल्ली सरकार की अव्यवस्थाओं को लेकर, पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को जमकर फटकार लगाई, हाईकोर्ट की फटकार से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार की जमकर फजीहत हुई ! देश भर में दिल्ली उच्च न्यायालय की चर्चा होने लगी की जनता की खैर खबर लेने के लिए देश में न्याय व्यवस्था मौजूद है.
क्योंकि देश के अन्य राज्यों में भी वहां के न्यायालय जनहित में कोरोना महामारी को लेकर व्यवस्थाओं पर कठोर सवाल खड़े कर रहे थे माहौल सत्ताधारी नेताओं के खिलाफ बनता जा रहा था और जनता न्यायालय के पक्ष में खड़ी दिखाई देने लगी थी मगर दिल्ली सरकार ने एक आदेश देकर और पांच सितारा होटल में कॉविड अस्पताल बनाकर यह सिद्ध कर दिया कि अधिक समझदार ब्यूरोक्रेट नहीं बल्कि नेता है मंगलवार 27 अप्रैल को देशभर में चर्चा इसी बात को लेकर होती रही की एक तरफ देश के आम नागरिकों को अस्पताल में बेड नहीं मिल रहे और ना ही अन्य सुविधाएं लेकिन दूसरी तरफ खास लोगों को पांच सितारा होटल में तमाम सुविधाओं का इंतजाम किया जा रहा है !
हालांकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार 27 अप्रैल को ही इसका खंडन किया है कि उन्होंने दिल्ली सरकार को इस प्रकार का कोई आदेश नहीं दिया है कि वह पांच सितारा होटल के भीतर उनके लिए कोविड अस्पताल बनाएं ! अब देश की नजर इस पर है कि अशोका होटल के भीतर बनाए गए कॉविड अस्पताल में आमजन भी भर्ती होंगे या नहीं !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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