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Saturday, April 17, 2021

4/17/2021 08:35:00 PM

"हम आस लगाए बैठे हैं, वह वादा करके भूल गए !



इन दिनों राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के अंदर सचिन पायलट खेमे के नेता यही पुराने फिल्मी गीत गुन गुना रहे होंगे ? क्योंकि पिछले दिनों राजस्थान प्रदेश कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट खेमे ने अचानक जो बगावत की थी, और बगावत के बाद पार्टी हाईकमान ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच समझौता करा कर जो वादा किया था शायद उस वादे पर अमल होते अभी तक दिखाई नहीं दे रहा है, बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्तियां एक के बाद एक अपनी मनपसंद किए जा रहे हैं !

 ताजा उदाहरण राजस्थान आवासन मंडल के अध्यक्ष पद पर स्वायत्त शासन मंत्री शांति कुमार धारीवाल की है ! आवासन मंडल के अध्यक्ष का पद हमेशा राजनीतिक कार्यकर्ता को मिलता रहा है ! शायद राजस्थान मैं यह पहला उदाहरण होगा की आवासन मंडल के अध्यक्ष का पद भी आवासन मंडल के मंत्री को मिला है और इसीलिए इस पर राजनीतिक गलियारों मैं चर्चा भी होने लगी है की शांति कुमार धारीवाल स्वयं इस विभाग के मंत्री हैं फिर उन्हें आवासन मंडल के अध्यक्ष का अतिरिक्त भार क्यों सौंपा जा रहा है?

 जबकि इस पद पर  गहलोत अपने किसी एक मजबूत कार्यकर्ता को संतुष्ट कर  सकते थे ! सरकार में  ऐसे  अनेक  बोर्ड  और निगम है , जिनकेअपने मंत्रालय हैं  और  उनके मंत्री भी हैं इनमें  ही  राजनीतिक नियुक्तियां  होती हैं और  राजनीतिक नियुक्तियां  सत्ताधारी पार्टी  अपने अनुरूप  अपने कार्यकर्ताओं को  राजनीतिक नियुक्तियां देकर  संतुष्ट करती है,  राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी छोड़कर और निर्दलीय विधायक जो कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे हैं उनमें से कई विधायकों को इन पदों पर नियुक्त  करने की चर्चा भी हो रही थी ! चर्चा आवासन मंडल के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति होने को लेकर है ! 

राजस्थान में आवासन मंडल कई सालों से गुमनाम की स्थिति में है आवासन मंडल की पहले की तरह सक्रियता भी नजर नहीं आ रही है ऐसे में स्वास्थ्य शासन मंत्री शांति धारीवाल को आवासन मंडल का अध्यक्ष बनाना क्या संकेत दे रहा है, क्या प्रदेश का आवासन मंडल  वापस से जीवित होगा क्योंकि प्रदेश की जनता शांति कुमार धारीवाल की कार्य करने की शैली को भली-भांति जानती हैं शांति धारीवाल ने स्वायत्त शासन मंत्रालय को एक बड़ा आयाम दिया था और एहसास कराया था की स्वायत्त शासन मंत्रालय कितना बड़ा  और महत्वपूर्ण मंत्रालय होता है !इस मंत्रालय को पहचान धारीवाल ने ही दिलाई थी ऐसे में धारीवाल राजस्थान आवासन मंडल को भी एक बार फिर से जीवित करेंगे !  


फिलहाल सवाल यह है कि इसे सचिन पायलट खेमा पचा पाएगा या नहीं क्योंकि पायलट की नाराजगी इस बात को लेकर थी की कांग्रेस की सरकार होने  के बाद भी कांग्रेस के कर्मठ और ईमानदार कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है कार्यकर्ताओं को अपनी ही पार्टी की सरकार  मैं उचित सम्मान नहीं मिल रहा है और इसी बात को लेकर पिछले दिनों कांग्रेस के भीतर बगावत हुई थी, लेकिन पार्टी हाईकमान ने स्थिति को संभाला और समझौता हुआ कार्यकर्ताओं को सम्मान देने का लेकिन दिन गुजर गए स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है ! स्थिति को सुधारने के लिए उच्च स्तरीय समन्वय समिति भी  बनी राष्ट्रीय प्रभारी महामंत्री को भी बदला गया प्रदेश कांग्रेस संगठन में कुछ बदलाव भी हुआ लेकिन जो होना था वह आज  तक नहीं हुआ है ना तो मंत्रिमंडल का पुनर गठन हुआ  और ना ही राजनैतिक नियुक्तियां  हुई!  राजनीतिक नियुक्तियां और मंत्रिमंडल पुनर्गठन को लेकर अक्सर चर्चाएं होती हुई जरूर सुनाई दी ! 

सचिन पायलट भले ही सार्वजनिक रूप से चुप दिखाई दें,  लेकिन उनके भीतर नाराजगी  अभी भी  बरकरार  है, पायलट समर्थक नेता और विधायक तो आज भी  अपनी सरकार के द्वारा अपने ही लोगों की अनदेखी करने का सार्वजनिक रूप से  आरोप लगाकर आवाज बुलंद कर रहे हैं! क्या सचिन पायलट खेमा 2 मई तक चुप है 2 मई को राजस्थान में 3 विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव का परिणाम आएगा क्या परिणाम आने के बाद पायलट खेमा अपनी नाराजगी को अंतिम परिणाम तक लेकर जाएंगे यह कहना अभी जल्दबाजी होगी ।लेकिन नाराज खेमे की ओर से आवाज कुछ ऐसी ही सुनाई दे रही है कि 2 मई के बाद शायद आर पार की लड़ाई हो ! पहले चुनाव और अब कोरोना महामारी का संकट ऐसे में असंतुष्ट नेताओं के सामने पुराने फिल्मी गीत गुनगुनाने के अलावा शायद कुछ और बचा नहीं है, क्योंकि गहलोत सरकार अपने तीसरे वर्ष की समाप्ति की ओर है,  और इस समय प्रदेश कोरोना महामारी से जूझ रहा है ! ऐसे में शायद बाकी बचा समय भी गहलोत पूरा कर लेंगे ?

Devendra Yadav
Sr.Journalist & Political Analytics




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