नेता ओर जनता के बीच टूटता भरोसा, उसके बीच अपनेपन की मिसाल बनता राजस्थान !
कोविड-19 के दूसरे दौर में जनता की सर्वाधिक नाराजगी अपने जनप्रतिनिधियों के प्रति अधिक दिखाई दे रही है, भले ही जनता की नाराजगी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ धरातल पर नजर नहीं आ रही है मगर पीड़ित परिवारों के मुरझाए चेहरों पर यह नाराजगी साफ दिखाई देती है ! नेताओं के प्रति नाराजगी और गुस्सा जनता के उस शब्द से देखा जा सकता है जब जनता आरोप लगाती है कि चुनावी सभाओं में कोरोना नहीं होता है, जनता का नेता के प्रति कितना गुस्सा है इसका एहसास करा देता है !
कोविड-19 के दूसरे चरण मैं पक्ष विपक्ष के नेताओं के बीच एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी युद्ध स्तर पर चल रहा है, पक्ष विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का वाक युद्ध जारी रहने के बाद भी राजस्थान अभी भी मिसाल बनकर देश के सामने खड़ा है ! संकट की घड़ी में राजनेताओं का जनता के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारी क्या होती है और क्या होनी चाहिए यह देश को राजस्थान बता रहा है जब केंद्र में भाजपा की सरकार है और राजस्थान में कांग्रेस की !
राजस्थान में कोरोना की लड़ाई जीतने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत एक साथ खड़े नजर आते हैं ! राजस्थान भी कोरोना महामारी के भयावह प्रकोप के साथ महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश दिल्ली छत्तीसगढ़ जैसे राज्य की कतार में खड़ा हुआ है जहां प्रकोप अधिक है मगर अन्य प्रभावित राज्यों की तरह राजस्थान अभी भी राजनीतिक प्रशासनिक और जन सेवाभावी के रूप में धैर्य के साथ, मजबूती के साथ कोरोना महामारी का मुकाबला करता हुआ दिखाई दे रहा है, राजस्थान के संदर्भ में अच्छी बात यह देखी जा रही है की यहां कोरोना को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीति नहीं हो रही है बल्कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अगुवाई में पक्ष और विपक्ष दोनों मिलकर एक साथ कोरोना के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं !
राजस्थान की राजनीति में, कोटा के दो चर्चित नाम, जिन्हें राजस्थान की राजनीति में, " ओम शांति " के उपनाम से भी जाना जाता है, ओम बिरला और शांति कुमार धारीवाल दोनों की परिपक्व राजनीति और प्रशासनिक कूटनीति के कारण भी राजस्थान के अंदर कोरोना महामारी को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनने दिया बल्कि सहयोगात्मक रणनीति के तहत राजस्थान में दोनों दल भाजपा और कांग्रेस मिलकर समस्या का समाधान करने में लगे हुए हैं, जबकि अन्य राज्यों से इस प्रकार की खबरें कम सुनाई देती हैं बल्कि कोरोना पर राजनीति होने के अधिक समाचार सुनाई देते हैं जबकि यह समय राजनीति करने का कतई नहीं है इस समय सबको एकजुट होकर अपने अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए।
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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