"उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022" क्या गैर राजनीतिक संगठन जीत और हार मैं अहम भूमिका निभाएंगे ?
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद और कोरोना महामारी के दूसरे दौर के प्रकोप में कमी आने के बाद, 2022 में संपन्न होने वाले उत्तर प्रदेश उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारी पर चर्चा तेज होने लगी है !
2022 में देश के 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं !
2022 के विधानसभा चुनाव में भी उत्तर प्रदेश 2021 के विधानसभा चुनाव मैं पश्चिम बंगाल की तरह खास चुनाव होगा ?
खास इसलिए क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी दोनों उत्तर प्रदेश से ही संसद में पहुंचते हैं ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश की अपनी सरकार बचानी है और श्रीमती सोनिया गांधी को उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनानी है !
उत्तर प्रदेश की तुलना पश्चिम बंगाल से क्यों की जा रही है क्योंकि पश्चिम बंगाल में भी, उत्तर प्रदेश से उलट भाजपा को पश्चिम बंगाल में अपनी सरकार बनानी थी और ममता बनर्जी को अपनी सरकार बचानी थी ! पश्चिम बंगाल में भाजपा नाकाम रही जबकि ममता बनर्जी कामयाब हुई !
बात मुद्दे की यह है कि क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दलों की जीत और हार का फैसला गैर राजनीतिक संगठन करेंगे ? और वह गैर राजनीतिक संगठन कौन-कौन से हैं जो पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक दलों के लिए चुनावी प्रचार का काम करेंगे ?
उत्तर प्रदेश से जिन दो संगठनों के नाम राजनीतिक गलियारों में निकलकर सुनाई दे रहे हैं उनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और किसान संगठन प्रमुख हैं ! आर एस एस उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा के लिए काम करेगा वही किसान संगठन भाजपा के खिलाफ प्रचार का काम करेंगे !
आर एस एस की तरफ से भाजपा के लिए प्रचार का ऐलान सार्वजनिक रूप से तो नहीं किया गया है लेकिन किसान नेता राकेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा के खिलाफ प्रचार करने का सार्वजनिक एलान कर दिया है ! ऐसे में क्या यह समझा जाए की उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव मैं राजनीतिक दल अपनी जीत के लिए गैर राजनीतिक दलों पर निर्भर होते हुए दिखाई देंगे ?
गत दिनों संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव में भी इन दोनों संगठनों की अहम भूमिका दिखाई दी थी ! पश्चिम बंगाल में किसान संगठनों ने तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में और भाजपा के खिलाफ चुनाव प्रचार किया था जिस मैं तृणमूल कांग्रेस को सफलता मिली और उसने राज्य में लगातार तीसरी बार अपनी सरकार बनाई क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी पश्चिम बंगाल की तरह नजारा देखने को मिलेगा ! पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी भाजपा तृणमूल कांग्रेस असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी और कांग्रेस वामदल में स्वतंत्र चुनाव लड़ा था कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है जहां भा ज पा सपा बसपा कांग्रेस सहित अन्य दल अलग-अलग चुनाव लड़ते हुए दिखाई देंगे !
पश्चिम बंगाल की तरह उत्तर प्रदेश में भी बहू कोनिए मुकाबला होता हुआ दिखाई दे रहा है उत्तर प्रदेश में बिहार की तरह बड़े-बड़े चुनावी गठबंधन होते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं ! उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की प्रमुख खासियत यह है कि विधानसभा चुनाव में जो प्रमुख पार्टियां भाग लेंगी वह सभी पार्टी राज्य में अपनी-अपनी सरकारें चला चुकी हैं ! कांग्रेस बहुजन समाज पार्टी समाजवादी पार्टी और अब भा ज पा यह सभी राज्य में सरकार बना कर चला चुकी है ! कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी में तो एक बार नहीं बल्कि कई बार अपनी सरकार बनाई है, कांग्रेस दशकों से उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार नहीं बना आ रही है, जबकि मायावती भी लगभग एक दशक से बाहर है !
जहां तक के डर की बात करें तो भा जा पा बसपा और सपा के पास अपने अपने मजबूत केडर हैं जबकि कांग्रेस के पास बड़ा केडर अभी भी नहीं है, श्रीमती प्रियंका गांधी के प्रयासों से राज्य में इस समय कॉन्ग्रेस भी कुछ हद तक मजबूत दिखाई दे रही है लेकिन मजबूत के डर की बात करें तो अभी भी मजबूत खेड़ा समाजवादी पार्टी के पास मौजूद है ! राजनीतिक पार्टियों के केडर के बावजूद क्या गैर राजनीतिक कैडर राजनीतिक पार्टियों का उत्तर प्रदेश में भविष्य तय करेगा यह देखना होगा इंतजार कीजिए ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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