बंगाल में "यास" तूफान ठंडा पड़ा, लेकिन राजनीतिक तूफान गर्म हो गया !
Mr. Prime minister, Mr. Mann ki baat Prime minister मुझे खत्म करने की साजिश नाकाम रहेगी, हम लडेंगे ओर जीतेंगे। हम किसी से नहीं डरते, जो डर गया वो मर गया। बिल्कुल यही शब्द ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहे थे। अब बंगाल का सियासी घटनाक्रम परवान चढ़ने लगा है।
वर्ष 2021 पश्चिम बंगाल के लिए तूफान बनकर आया ! पहले विधानसभा चुनाव के रूप में आया, इस चुनावी तूफान में देश की बड़ी-बड़ी राष्ट्रीय पार्टियों को धरा शाही कर दिया ! कांग्रेस और वामदलों के पुराने बरगद के पेड़ को जड़ सहित उखाड़ कर फेंक दिया वही भाजपा, अपनी जड़ को बरकरार रखने में कामयाब रही, लेकिन भा जा पा को अफसोस होगा की उसकी डालियां एक एक कर चुनावी तूफान में क्यों गिरी !
बंगाल में तृणमूल कांग्रेस विधानसभा चुनावों में अपनी जीत की हैट्रिक लगाने का जश्न मना ही रही थी की, बंगाल में यश नामक कुदरती तूफान ने दस्तक दे दी, यश तूफान ने बंगाल में भीषण तबाही मचाई !
इस तबाही का जायजा लेने दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल पहुंचे ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तूफान से तबाही का जायजा ले ही रहे थे कि बंगाल में एक और राजनीतिक तूफान आ खड़ा हुआ ! बंगाल की मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा आहूत की गई जायजा मीटिंग में देर से पहुंची और जल्दी से उठ कर चली गई !
यहां से ही बंगाल में राजनीतिक तूफान की शुरुआत हो गई !
बंगाल में लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज हुई तृणमूल कांग्रेस कि नेता मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी, पर आरोप लगने लगा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक को हल्के में लिया और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया !
वही तृणमूल कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि इस अहम बैठक में पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी को क्यों निमंत्रण दिया ! बंगाल राजनीतिक तूफान की अहम बात यदि कोई है तो वह बंगाल के चीफ सेक्रेटरी अपन बंदोपाध्याय के अचानक त्याग पत्र देने और उन्हें मुख्यमंत्री का प्रमुख सलाहकार नियुक्त करने की है ! ज्ञात रहे केंद्र सरकार ने चीफ सेक्रेटरी को दिल्ली तलब होने का आदेश दिया था लेकिन बंधोपाध्याय ने दिल्ली तलब होने से पहले ही अपना त्यागपत्र दे दिया ! इस घटना को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य अलग हटकर देखें तो यह केंद्र सरकार कि मोदी सरकार के लिए एक बड़ी घटना है जब एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी ने केंद्र सरकार के आदेश की पालना नहीं कर अपने पद से त्यागपत्र देकर चुनौती दी है !
बंगाल के राजनीतिक तूफान को राजनीतिक गलियारों में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चंद दिनों पहले ही राज्य विधानसभा के चुनाव में पूरी ताकत झोंकने के बाद भी भा ज पा बुरी तरह से तृणमूल कांग्रेस से चुनाव हारी थी !
चुनावी तूफान और यश तूफान तो ठंडा पड़ गया है लेकिन बंगाल में राजनीतिक तूफान अभी भी गर्म है ! चुनावी तूफान से हुई हानि की समीक्षा राजनीतिक दल कर ही रहे थे की यास तूफान से हुई तबाही की समीक्षा केंद्र और राज्य सरकारें करने लगी लेकिन अब राजनीतिक पंडित बंगाल में उठे राजनीतिक तूफान से भविष्य में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस को होने वाले नुकसान की भी समीक्षा करने में लग जाएंगे, क्योंकि यश तूफान के बाद बंगाल में आए राजनीतिक तूफान से होने वाले संभावित खतरों को देखते हुए मुख्यमंत्री सुश्री ममता बनर्जी रणनीति बनाने में लग गई हैं, ममता बनर्जी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ललकारना शुरू कर दिया है !
मई महीना भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के लिए अहम महीना है एक तरफ भा जा पा अपनी केंद्र सरकार के 7 वर्ष पूरे होने पर खुश हो रही है तो वही तृणमूल कांग्रेस बंगाल लगातार तीसरी बार जीतने का जश्न मना रही है तो वही सारा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है लेकिन राजनीति अभी भी कोरोना महामारी पर हावी है !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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