कांग्रेस: जमीनी युवा नेता कौन और क्या है हकीकत?
देश के राजनैतिक गलियारों में अक्सर यह चर्चा चलती रहती है कि, देश की सबसे पुरानी और सबसे मजबूत समझी जाने वाली पार्टी कांग्रेस की इतनी पतली हालत कैसे और क्यों हो गई है ?
चर्चा कांग्रेस के उम्र दराज और युवा नेताओं की योग्यता और जनता के बीच उनकी अपनी ताकत को लेकर भी सुनाई देती है ! चर्चा उम्र दराज नेताओं और युवा नेताओं के बीच उपेक्षा और अपेक्षा को लेकर भी होती है !
यदि उम्रदराज नेताओं और युवा नेताओं की अपेक्षा और उपेक्षा पर चर्चा करें तो, 2014 से पहले और 2014 के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम की बात करनी होगी ? 2014 से पहले और उसके बाद, अपने आप को उपेक्षित होने का बहाना कर सबसे पहले उम्र दराज नेताओं ने कांग्रेस को छोड़ा था यह सिलसिला युवा नेता ज्योतिरादित्य और जतिन प्रसाद के बाद अभी भी जारी है ! अब समझ नहीं आ रहा है कि कांग्रेस के भीतर उपेक्षित कौन है युवा नेता या फिर उम्र दराज नेता क्योंकि बुरे वक्त में पार्टी का दामन तो युवा नेता भी छोड़ रहे हैं तो वही उम्र दराज भी !
बात दोनों प्रकार के नेताओं की तरजीह देने पर उठे सवालों पर भी करनी होगी ! जहां तक अपेक्षा और उपेक्षा की बात है यह दोनों शब्द अवसर या मौका मिलने और नहीं मिलने पर आकर टिक जाते हैं ! जिन्हें सत्ता और संगठन के भीतर अवसर मिलता है वह अपने आप को उपेक्षित महसूस नहीं करते हैं और जिन्हें मौका नहीं मिलता वह अपने आप को उपेक्षित महसूस करते हैं और यहीं से संगठन में विवाद उठापटक और अफरा-तफरी का खेल शुरू हो जाता है !
राजनीति में यह खेल अकेले कांग्रेस के भीतर ही नहीं होता है बल्कि यह खेल देश की तमाम राजनीतिक पार्टियों के भीतर होता है ! सत्ताधारी भाजपा भी इसमें अछूती नहीं है यह खेल वहां भी देखने को मिलता है हाल ही में देश ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के अंदर खेला होते हुए देखा है !
बात कांग्रेस की हो रही है और बात उपेक्षा की हो रही है बात उम्र दराज और युवा नेताओं की हो रही है और यह बात इसलिए हो रही है क्योंकि कांग्रेस के युवा नेता संगठन में अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं इस उपेक्षा के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया है और राजस्थान में सचिन पायलट अपने आप मैं उपेक्षित महसूस कर नाराज चल रहे हैं !
ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद के कांग्रेस छोड़ भा ज पा में शामिल होने के बाद और सचिन पायलट के नाराज होने पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा चली की कांग्रेस पर उम्र दराज नेताओं ने अपना कब्जा कर रखा है वह नेता युवा नेताओं को आगे नहीं बढ़ने दे रहे हैं इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद जैसे नेताओं ने कॉन्ग्रेस को छोड़ा यदि यह बात सही है तो युवा नेताओं से पहले बहुगुणा भाई बहन सहित की उम्र दराज नेताओं ने कांग्रेस को छोड़ा था और वह भाजपा में शामिल हुए थे लेकिन तब यह आरोप नहीं लगा की युवा नेताओं के कारण उन्होंने कांग्रेस को छोड़ो !
जहां तक युवा नेताओं की उपेक्षा और अपेक्षा करने का सवाल है तो कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद को जनता के बीच अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर दिया था ज्योतिरादित्य सिंधिया को उत्तर प्रदेश में श्रीमती प्रियंका गांधी के साथ लगाया था सिंधिया के पास उत्तर प्रदेश में पश्चिम उत्तर प्रदेश की चुनावी कमान थी, ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2019 का लोकसभा चुनाव कॉन्ग्रेस बुरी तरह से हारी !
कॉन्ग्रेस हाईकमान ने जतिन प्रसाद को भी बड़ा नेता बनाने के मकसद से पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रभारी बनाकर भेजा जिसका परिणाम क्या निकला यह देश ने देखा पहली बार पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने विधानसभा की एक भी सीट नहीं जीती ! कॉन्ग्रेस आलाकमान ने समय-समय पर युवा नेताओं को उनको उनकी राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर दिया लेकिन युवा नेता अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में नाकाम रहे और उस नाकामी को छिपाने के लिए वह अपने आप को उपेक्षित बताकर अवसर ढूंढते रहे ! मौजूदा वक्त में कांग्रेस की कमजोरी का एक मुख्य कारण यह भी है की कांग्रेस के पास मौजूदा वक्त में जातिगत और क्षेत्रीय कद्दावर नेता नहीं है और जो है वह अपनी राजनीतिक जमीन को लंबे समय के लिए संभाल कर नहीं रख पाए !
क्योंकि मौजूदा समय में बात राजस्थान कांग्रेस और सचिन पायलट की हो रही है कांग्रेस के पास अवसर है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के लिए खास है और सचिन पायलट उत्तर प्रदेश के पश्चिम क्षेत्र के रहने वाले हैं बड़े खानदानी नेता है इसलिए पश्चिम उत्तर प्रदेश मैं सचिन पायलट का खासा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए कांग्रेस को वहां पायलट को बड़ी जिम्मेदारी देनी चाहिए बल्कि पायलट को उत्तराखंड में भी जिम्मेदारी देनी चाहिए !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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