राजस्थान मे कांग्रेस की सियासत में कौन किसकी ढाल बनेगा ?
अशोक गहलोत-निर्दलीय और बसपा विधायक !
सचिन पायलट -- नाराज विधायक !
राजस्थान कांग्रेस की राजनीतिक उठापटक अजीब मोड लेती हुई दिखाएं दे रही है, जहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का खेमा हाईकमान पर अपना अपना प्रेशर बनाते हुए दिखाई देने लगे हैं ! कॉन्ग्रेस और कांग्रेस हाईकमान के लिए राजस्थान कांग्रेस की सियासत का संग्राम, "इधर गिरो तो कुआं ओर इधर गिरो तो खाई" के समान होती हुई दिखाई देने लगी है ! राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में आए तूफान को अभी तक यह समझा जा रहा था की प्रदेश में भा जा पा मध्य प्रदेश की तर्ज पर कमल खिलाना चाहती है लेकिन रविवार 20 जून को सचिन पायलट का अलवर दौरा, और दौरे के दरमियान सचिन पायलट के स्वागत में उमड़ी भीड़ ने और प्रदेश के निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी के कुल 19 विधायकों के बयान ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मचा दी !
दोनों और के खेमा के बयान वीर योद्धाओं के बयानों से लगता है कि, प्रदेश में भाजपा को कमल खिलाने के लिए ज्यादा मेहनत कर ने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ भाजपा को इतनी भर जरूरत पड़ेगी कि वह अपना नेता पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे को मानते हैं या नहीं ? कांग्रेस में जिस प्रकार से असंतोष और नाराजगी चल रही है उसे देखने से लगता है कांग्रेस ने यूरो कप फुटबॉल की तरह भाजपा को पेनेल्टी दे दी है अब देखना यह है कि भा जा पा पेनल्टी लेने के लिए किस शूटर को भेजती है ! यदि भाजपा श्रीमती वसुंधरा को पेनल्टी लेने भेजती हैं तो गोल होना निश्चित है! गहलोत समर्थक और पायलट समर्थक बयान वीर विधायक योद्धाओं के बयानों से ऐसा भी लग रहा है जैसे यूरो कप फुटबॉल मैच में आत्मघाती गोल भी कर दिया हो, क्योंकि निर्दलीय और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के बयानों पर नजर डालें तो उनके बयान कुछ ऐसा ही बयां कर रहे हैं !
प्रदेश कांग्रेस में सत्ता की दहलीज पर कौन सा धड़ा प्रभावशाली है और कौन सा धड़ा कमजोर है यदि इस पर बात करें और फिर एक बार निर्दलीय विधायक और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के बयान की बात करें तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का खेमा आज भी सचिन पायलट के खेमे से अधिक मजबूत दिखाई दे रहा है !
राजस्थान में कांग्रेस सरकार की अभी भी मजबूत और पूरी चाबी अशोक गहलोत के हाथों में है ! अशोक गहलोत के पास कांग्रेस की सरकार चलाने के लिए आज भी निर्दलीयों और बहुजन समाज पार्टी के विधायकों का समर्थन प्राप्त है यदि पायलट खेमा पहले की तरह इस बार भी बगावत करता है तो इससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है क्योंकि इस बार पायलट के साथ उतने विधायक नजर नहीं आएंगे जितने की पहले नजर आए थे ! और शायद इसे पायलट व्यक्तिगत रूप से समझ भी रहे हैं इसलिए वह पहले की तरह इस बार जल्दबाजी में कोई खतरा नहीं उठा रहे हैं बल्कि वह जनता के बीच जाकर भविष्य के लिए अपनी ताकत का हाईकमान को एहसास करा रहे हैं यह पायलट की अच्छी और परिपक्व रणनीति है क्योंकि अब राजस्थान में सरकार चलाने के लिए समय भी कम बचा है ऐसे में सचिन पायलट यदि पूरे प्रदेश का दौरा करें तो यह उनके भविष्य के लिए शुभ संकेत होगा !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
nice
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