Hand-Picked/Weekly News

Travel
Tuesday, June 22, 2021

6/22/2021 09:14:00 AM

इसे बेबसी समझे, मजबूरी समझे या फिर राजनीतिक रणनीति ?



अशोक गहलोत का मुख्यमंत्री के रूप में तीसरा कार्यकाल ! जनता की नजर से इसे देखें तो उनका यह कार्यकाल भी उनकी कार्य शैली के अनुसार बेहतर है !

कोविड-19 महामारी के प्रथम चरण और द्वितीय चरण में बेहतर प्रबंधन बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतर उपचार और वैक्सीनेशन के रूप में गहलोत का कार्यकाल याद किया जाएगा !

कोविड-19 महामारी का प्रकोप लगातार होने के बाद भी राज्य का विकास नहीं रुका, कोविड-19 के साथ-साथ राज्य का विकास भी होता रहा !

जिसका परिणाम कांग्रेस ने दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव जीत कर देखा वही निकाय और पंचायत राज चुनाव में भी कांग्रेस के पक्ष में अच्छे परिणाम आए !

लेकिन प्रदेश में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति के परिणाम तीसरे कार्यकाल में बेहतर नजर नहीं आ रहे हैं, मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच में जो रस्साकशी पहले थी वह आज भी बरकरार है, बल्कि तीसरे कार्यकाल की समाप्ति का जैसे-जैसे समय नजदीक आ रहा है  वैसे- वैसे गहलोत और पायलट के बीच राजनैतिक द्वंद बढ़ता जा रहा है ! दोनों गुटों के बीच बात गद्दारी और वफादारी पर आकर टिक गई है, सवाल जनता को समझने के लिए पेचीदा है की कांग्रेस के भीतर गद्दार कौन है और कौन वफादार है ? सवाल इसलिए खास है क्योंकि जहां से गद्दार शब्द निकल कर आया है वह कांग्रेस में शामिल होने से पहले कांग्रेस के टिकट पर जीत कर विधानसभा नहीं पहुंचे थे बल्कि वह निर्दलीय और बहुजन जन समाज पार्टी से जीतकर विधायक बने थे और उन्होंने बाद में कांग्रेस का दामन थाम लिया तब उन्हें भी बहुजन समाज पार्टी ने गद्दार कहा था !

यदि बात वफादारी की करें तो यह कैसी वफादारी है जब नाराज होकर पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ गुड़गांव में जाकर बैठ गए तब ऐसा लगने लगा था की राजस्थान में भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी, सरकार तो बच गई मगर सस्पेंस अभी भी बरकरार है, क्योंकि पायलट नाराज है ?


मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तीसरे कार्यकाल पर नजर डालें तो महामारी विकास और उपचुनाव और स्थानीय चुनाव में गहलोत को निश्चित रूप से कामयाबी मिली लेकिन तीसरे कार्यकाल में अशोक गहलोत स्वयं बेबस से नजर आए !

अशोक गहलोत चाह कर भी इस बार अपने खास सिपहसालार की बड़ी राजनीतिक नियुक्तियां नहीं कर पाए, और ना ही वह अनुभवी कद्दावर नेताओं को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर पाए! भरत सिंह जितेंद्र सिंह मालवीय प्रदुमन सिंह राम नारायण मीणा परसराम मोरदिया जैसे नेता मंत्रिमंडल से बाहर है ! अशोक गहलोत जिनकी पहचान देशभर में अपने कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान देने के रूप में जाने जाति है, उसकी झलक तीसरे कार्यकाल में नजर नहीं आ रही है, धर्मेंद्र राठौर संजय बाफना पंकज मेहता जैसे वफादार साथी अभी तक राजनीतिक नियुक्ति नहीं पा सके  हैं, बल्कि इस बार गहलोत ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के स्थान पर सेवानिवृत्ति के बाद आला अधिकारियों को नियुक्त करवाया, हाउसिंग बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण विभाग में किसी अनुभवी और वफादार नेता की नियुक्ति होती आई है उस पर इस बार स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल की नियुक्ति कर दी जबकि यह पद किसी कार्यकर्ता के पास होना चाहिए था !इन नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के भीतर और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बनी हुई है चर्चा इस बात को लेकर है की यह सम्मान कांग्रेस के कर्मठ कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए था वह सम्मान गहलोत ने सेवानिवृत्ति के बाद कुछ आला अधिकारियों को क्यों दे दिया ! अशोक गहलोत के सामने प्रथम और द्वितीय कार्यकाल में तीसरे कार्यकाल से बड़ी चुनौती संगठन के भीतर से मिल रही थी क्योंकि प्रथम और द्वितीय कार्यकाल के समय कांग्रेस के भीतर राजस्थान में परसराम मदेरणा राजेश पायलट शिवचरण माथुर नटवर सिंह जगन्नाथ पहाड़िया  हीरालाल देवपुरा रामनारायण चौधरी नारायण सिंह सुश्री गिरिजा व्यास जैसे नेता मौजूद थे जो लगातार अशोक गहलोत को चुनौती दे रहे थे ! उस समय अशोक गहलोत ने चुनौतियों का मुकाबला किया और बेबसी को अपने करीब फटकने तक नहीं दिया !  प्रथम चरण में अशोक गहलोत ने अपने चहेतों दामोदर थानवी सोनी जैसे लोगों को राजनीतिक नियुक्ति दी दूसरे चरण में भी उन्होंने धर्मेंद्र राठौर गोदारा सहित अनेक अपने खास लोगों को नवाजा  ! लेकिन इस बार अभी तक ऐसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा है ऐसा लगता है कि यह क्या गहलोत की बेबसी है या लाचारी है या फिर राजनैतिक रणनीति है! सचिन पायलट की नाराजगी का एक प्रमुख कारण यह भी है !

सचिन पायलट की नाराजगी का एक हिस्सा यह भी है कि गहलोत सरकार वफादार और कर्मठ कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्ति नहीं दे रही है, बदले में गहलोत सरकार सेवानिवृत्ति के बाद एक के बाद एक अधिकारियों को नियुक्त कर सही है !

 

Devendra Yadav
Sr. Journalist

0 Comments:

Post a Comment

THANKS FOR COMMENTS