तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कवायद !
क्या यह समय उचित है ?
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर और देश के कद्दावर नेता शरद पवार के बीच हुई दो मुलाकात और मुलाकात के बाद शरद पवार के घर पर हुई राष्ट्रीय मोर्चा की अहम बैठक ने देश के भीतर यह सवाल खड़ा कर दिया की क्या 2024 के आम चुनाव में भा जा पा को हराने के लिए तीसरा मोर्चा बनेगा ? और यदि मोर्चा बना भी तो उसमें कौन-कौन से क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल शामिल होंगे और तीसरे मोर्चे का अध्यक्ष कौन होगा और 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का चेहरा कौन होगा ?
पश्चिम बंगाल विधानसभा के नतीजे आने से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बयान दिया था की अब वह किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी रणनीति नहीं बनाएंगे ?
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजे आने के बाद पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बनी ! इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर थे ! बंगाल चुनाव के परिणाम आने के कुछ दिनों बाद ही प्रशांत किशोर एनसीपी नेता शरद पवार से मिलने अचानक से उनके घर पहुंच जाते हैं और मिलने के बाद वह बयान देते हैं कि यदि सारा विपक्ष एकजुट होकर चुनाव लड़े तो विपक्ष को 2024 में 300 से भी अधिक सीटें मिल सकती हैं उनके इस बयान के बाद ही देश में एक बार फिर से तीसरे मोर्चे की कवायद शुरू हो गई ! और यह कवायद प्रशांत किशोर के शरद पवार से दूसरी बार मिलने और उसके बाद पवार के घर पर राष्ट्रीय मोर्चा की बैठक होने से अधिक चर्चा में आ गई ! शरद पवार के घर पर राष्ट्रीय मोर्चा की आहूत बैठक में सबसे बड़ा चेहरा मेजबान शरद पवार ही थे, जिसको लेकर सवाल भी खड़े होने लगे की बैठक में अन्य कोई बड़ा चेहरा मौजूद क्यों नहीं था खासकर कांग्रेस को लेकर सवाल उठा !
एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि बंगाल में भाजपा के हार जाने के बाद और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लगातार तीसरी बार जीतने के बाद क्या भा जा पा 2024 का आम चुनाव हार जाएगी, जबकि अभी आम चुनाव होने में 3 वर्ष का समय बाकी है और इस बीच उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, उन राज्यों में विपक्ष की और भाजपा की स्थिति क्या होगी इसे भी देखना होगा !
दूसरा सवाल यह खड़ा होता है की इस समय देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है, देश का मतलब वह राज्य भी हैं जहां गैर भाजपा पार्टियों की सरकारें हैं और उनमें से कई पार्टियां ऐसी हैं जो तीसरा मोर्चा का हिस्सा वन सकते हैं लेकिन मौजूदा वक्त में क्या उनके पास कोरोना से जूझने के अतिरिक्त तीसरा मोर्चा खड़ा करने के लिए समय है ! और यदि वह कोरोना संकट की इस घड़ी में तीसरा मोर्चा खड़ा करने की कवायद में जुटेंगे तो उन पर सवाल खड़े होंगे ?
यदि इस वक्त विपक्ष ने तीसरा मोर्चा खड़ा करने मैं तेजी दिखाई तो यह भाजपा के लिए विपक्ष को घेरने के लिए एक बड़ा मुद्दा होगा ? भाजपा और उसके नेताओं के पास विपक्ष को कटघरे मैं खड़ा करने के लिए एक बड़ा मुद्दा हाथ लग जाएगा !
भाजपा के पास कहने को यह हो जाएगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोदी सरकार कोरोना महामारी से देश को बचाने के लिए रणनीति बना रही है ,वहीं दूसरी तरफ विपक्ष भाजपा और मोदी को हराने के लिए रणनीति बना रहा है !जनता के साथ और देश के साथ कौन ? यह सवाल भाजपा खड़ा कर सकती है ?
शायद कांग्रेस इसे अच्छे से समझ रही है इसलिए वह अभी अपने आप को तीसरा मोर्चा से अलग रख रही है क्योंकि कोरोना को लेकर कांग्रेस और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी भा ज पा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर हैं और देश की नजर अब धीरे-धीरे कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी पढ़ती हुई नजर आ रही है !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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