राजस्थान: कांग्रेस और भाजपा मैं एक जैसी बीमारी ? और क्या हाईकमान के पास नहीं है दवाई ?
राजस्थान देश का वह राज्य है जहां कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियां बारी बारी से राज करती आई है ! आजादी के बाद 1977 तक लगातार राजस्थान कांग्रेस की सरकार रही ! लेकिन 1977 मैं जनता पार्टी की सरकार बनी और राज्य में पहली बार गैर कांग्रेस की सरकार बनी और पहली बार राज्य का गैर कांग्रेसी नेता भैरों सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने ! हालांकि पहली बार शेखावत ढाई साल तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे उसके बाद एक बार फिर से 1980 में कांग्रेस ने सरकार बनाई जो 1990 तक रही लेकिन 1990 में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपनी सरकार बनाई और मुख्यमंत्री एक बार फिर भैरव सिंह शेखावत बने शेखावत सरकार 2003 तक चली उसके बाद कांग्रेस ने एक दशक बाद अपनी सरकार बनाई और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बने !यहीं से राज्य में भाजपा और कॉन्ग्रेस के बीच पांच पांच साल वाला दौर शुरू हो गया !
और यहीं से दोनों पार्टियों के भीतर युवा राजनीति का पहली बार दौर शुरू हुआ जब कांग्रेस के कद्दावर नेता हरिदेव जोशी शिवचरण माथुर जगन्नाथ पहाड़िया जैसे नेताओं की मौजूदगी के बाद अशोक गहलोत पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने! अशोक गहलोत सरकार के 5 साल बाद जब प्रदेश में एक बार फिर से भाजपा की सरकार बनी तब भाजपा के कद्दावर नेता भैरों सिंह शेखावत ललित किशोर चतुर्वेदी भंवर लाल शर्मा हरि शंकर भा वड़ा जैसे कद्दावर नेताओं की मौजूदगी में श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया पहली बार राज्य की मुख्यमंत्री बनी !
कांग्रेस में अशोक गहलोत और भा जा पा में श्रीमती वसुंधरा राजे दोनों नेता बारी बारी से राज्य के मुख्यमंत्री बनते आ रहे हैं लेकिन अब राज्य में अपनी अपनी पार्टियों के भीतर इन दोनों ही नेताओं का विरोध होना शुरू हो गया है ! दोनों नेताओं का विरोध इस समय चरम पर है, और दोनों ही नेताओं के उपचार के लिए दोनों पार्टियों के हाईकमान के दरवाजे खटखटा य जा रहे हैं !
लगता है दोनों ही पार्टियों के भीतर रोग पुराना है, शायद हाईकमान को समझ नहीं आ रहा है कि इस रोग की दवाई क्या हो और दवाई कौन सी दी जाए जिससे रोग ठीक हो जाए !
कांग्रेस में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट सीधे चुनौती दे रहे हैं वही कांग्रेस के भीतर अशोक गहलोत के बाद कौन इस कड़ी में डॉ रघु शर्मा डॉक्टर सीपी जोशी जैसे नेता भी शामिल है जो खुलकर तो नजर नहीं आ रहे हैं लेकिन पर्दे के पीछे वह भी राज्य का मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं !
अशोक गहलोत के बाद नेता कौन हो इस दौड़ में पहला नाम डॉक्टर सीपी जोशी का आता है सीपी जोशी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दूसरे कार्यकाल के समय मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए थे क्योंकि सीपी जोशी 1 वोट से विधानसभा का चुनाव हार गए थे ! इस समय वह राज्य विधानसभा के अध्यक्ष हैं सीपी जोशी गहलोत के साथ राज्य के एक बड़े कद्दावर नेता भी हैं !
सचिन पायलट के जैसे ही सीपी जोशी भी उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष थे जब राज्य में भाजपा की सरकार थी और उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने विधानसभा का चुनाव जीता था लेकिन सीपी जोशी स्वयं विधानसभा का चुनाव हार गए ! और सीपी जोशी मुख्यमंत्री नहीं बन पाए! मुख्यमंत्री बने अशोक गहलोत !
लेकिन सचिन पायलट विपरीत परिस्थितियों में कांग्रेस के अध्यक्ष थे और उनकी अध्यक्षता में कांग्रेस ने राज्य विधानसभा का चुनाव लड़ा कांग्रेस जीती स्वयं सचिन पायलट भी विधानसभा का चुनाव जीते लेकिन वह भी सीपी जोशी की तरह मुख्यमंत्री नहीं बन पाए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बने !
जैसा विरोध कांग्रेस के भीतर मुख्यमंत्री को लेकर है वैसा ही विरोध भाजपा के अंदर भी दिखाई दे रहा है ! कांग्रेस और भाजपा के भीतर एक और समानता नजर आ रही है वह यह है कि भाजपा के भीतर राजपूत नेतृत्व को हटाकर जो नेतृत्व सामने खड़ा होने को दिखाई दे रहा है वह भी राजपूत ही नजर आ रहा है इसी तरह कांग्रेस के भीतर भी पिछड़ी जाति के नेता को हटाकर जो नेता सामने नजर आ रहा है वह भी पिछड़ी जाति से ही है ऐसे में दोनों ही पार्टियों के अंदर अन्य जाति के नेता पर्दे के पीछे से अपनी बारी आने का इंतजार करते हुए अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं !
वसुंधरा के बाद कौन जो नाम सामने आ रहे हैं उनमें राजेंद्र राठौड़ गजेंद्र सिंह शेखावत दीया कुमारी राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जैसे राजपूत नाम सुनाई दे रहे, जबकि गुलाबचंद कटारिया ओम माथुर जैसे नेता लंबे समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं! श्रीमती वसुंधरा राजे का तोड़ भाजपा के पास दीया कुमारी के रूप में है इसका अभी इंतजार करना होगा !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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