पश्चिम बंगाल का राजनीतिक घमासान!
पश्चिम बंगाल, चुनाव से पहले और चुनाव संपन्न होने के बाद, भी राजनीतिक अखाड़ा बना हुआ है! राज्य में तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी बार सरकार बनने के बाद, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक जोर आजमाइश का खेल अभी भी चल रहा है !
पश्चिम बंगाल के चीफ सेक्रेटरी रहे अल्पन मुखोपाध्या को केंद्र की भाजपा सरकार दिल्ली तलब तो नहीं करवा पाई लेकिन पश्चिम बंगाल मैं भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते लगभग 33 विधायक तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के लिए रास्ता तलाश रहे हैं ?
यह अभी राजनीतिक अटकलें हैं जो इस समय देश के राजनीतिक गलियारों में बड़ी सुर्खियां बनी हुई है !
भाजपा के नवनिर्वाचित विधायकों के बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की संभावना और अटकलें राजनीतिक गलियारों में सवाल खड़े करते हुए भी दिखाई दे रहे हैं ! सवाल यह है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा होने से पहले भा जा पा में शामिल हुए तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा के टिकट पर जीतने के चंद दिनों बाद ही अपनी घर वापसी क्यों चाहते हैं, जबकि अभी तो भाजपा के विधायकों ने ठीक से विधानसभा में जीत की शपथ भी नहीं ली होगी !
पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक सुर्खियों पर चुनाव से पहले और चुनाव के नतीजे आने के बाद बाद की घटनाओं पर चर्चा करें तो, यह राजनीतिक सुर्खियां तृणमूल कांग्रेस की नेता सुश्री ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है क्या ? और क्या सुश्री ममता बनर्जी अपनी राजनैतिक रणनीति से भा ज पा कांग्रेस और वामदल को चुनावी मैदान में जीत कर मात दी है क्या ?
विधानसभा चुनाव की घोषणा होने से पहले और घोषणा होने के बाद मैंने अपने ब्लॉग मैं लिखा था कि तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर जो विधायक और नेता भा जा पा में शामिल हो रहे हैं क्या वह ममता बनर्जी की एक राजनीतिक रणनीति है ?
और जब चुनाव के समय ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता की ऑडियो वार्ता सार्वजनिक हुई थी तब भी मैंने लिखा था कि क्या तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नेता अभी भी ममता बनर्जी के संपर्क में है क्या, और क्या ममता बनर्जी का असली खेला यही है क्या ?
तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और विधायक बने नेताओं की घर वापसी की सुर्खियां, सवाल खड़े करती है कि क्या यह ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति का एक हिस्सा थी क्योंकि जो नेता तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे उन नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे और चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस भ्रष्टाचार के आरोपों से धीरी नजर आ रही थी जिसका नुकसान तृणमूल कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में होता भी नजर आ रहा था !
ऐसे में मुकुल राय और शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा में शामिल होकर तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलों को आसान कर दिया जो आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लग रहे थे वह आरोप चुनाव के वक्त तृणमूल कांग्रेस के लिए ढाल बनकर सामने दिखाई दिए !
मुकुल राय शुभेंदु अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं के कारण विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर भा जा पा कॉन्ग्रेस और वामदल फायदा उठाते वह फायदा इन नेताओं के भाजपा में शामिल होते ही इन दलों के लिए नुकसान बन गया !
और इसका सारा फायदा तृणमूल कांग्रेस ने उठा लिया जबकि यदि यह तृणमूल कांग्रेस में ही बने रहते तो इसका नुकसान तृणमूल कांग्रेस को उठाना पड़ता !
अब जबकि मुकुल राय सहित भाजपा के बड़ी संख्या में विधायकों की घर वापसी की अटकलें लग रही है तब सवाल खड़ा होता है कि इन नेताओं के भाजपा में शामिल होना सुश्री ममता बनर्जी की राजनीतिक रणनीति थी और जिसके कारण वह लगातार
तीसरी बार सत्ता में आई !
एक सवाल यह भी है कि क्या भाजपा बंगाल में ऑपरेशन कमल खिलाने के लिए कोई राजनीतिक चाल चल रही है क्या ?
वैसे सुश्री ममता बनर्जी के पास मौजूदा वक्त में इतना बड़ा बहुमत है कि जिसमें आराम से सेंधमारी करना भाजपा के लिए कोई आसान काम नहीं है ? घर वापसी की सुर्खियां अंजाम तक कब पहुंचेगी इसका अभी इंतजार करना होगा ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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