राज्यों के क्षत्रप क्या अभी भी मोदी के लिए चुनौती बने हुए हैं ?
2014 के आम चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं लालकृष्ण आडवाणी मुरली मनोहर जोशी और यशवंत सिन्हा जसवंत सिंह को भाजपा के भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया हो।
लेकिन मोदी हिंदी भाषी प्रदेशों के कद्दावर और वरिष्ठ नेताओं श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया शिवराज सिंह चौहान रमन सिंह और अब योगी आदित्यनाथ को भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में भेजने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं ?
राजस्थान छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भाजपा 2018 का विधानसभा चुनाव हारी थी, इन तीनों ही राज्यों में लंबे समय से भाजपा और राज्य के अंदर श्रीमती वसुंधरा राजे शिवराज सिंह चौहान और रमन सिंह का राजनैतिक बोलबाला था जो आज भी बरकरार है, चाहे छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की मौजूदा समय में सरकार नहीं है फिर भी रमन सिंह और वसुंधरा राजे का राजनीतिक कद अभी भी दोनों राज्यों में बरकरार है !
मध्यप्रदेश में भाजपा कांग्रेस की निर्वाचित सरकार को गिरा कर कमल खिलाने में कामयाब रही लेकिन वहां भा जा पा का आलाकमान शिवराज सिंह चौहान को नहीं बदल पाई ! मध्यप्रदेश में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर नरोत्तम मिश्रा और विजयवर्गीय जैसे नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी की कतार में देखे गए मगर राजनीतिक अटकलों के बीच अंततः मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ही बने !
राजस्थान में भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर भाजपा ने ऑपरेशन कमल खिलाने का प्रयास किया, भा ज पा कुछ हद तक कांग्रेस के भीतर बगावत करवाने में कामयाब भी रही, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों को लेकर लंबे समय तक नाराज होकर बैठे रहे, अटकलें लगने लगी कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर ही राजस्थान में भी भाजपा कमल खिलाएगी चर्चा जोरों पर थी मगर चर्चा यह भी सुनाई दी की यदि राजस्थान में कमल खिला तो कमल सिंहासन पर बैठेगा कौन ?
कमल सिहासन पर बैठने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे का नाम प्रमुखता से सामने आया लेकिन लंबे समय से कमल सिहासन पर बैठने का प्रयास राजस्थान के अन्य नेता भी कर रहे हैं मगर वसु मैडम के रहते उनका नंबर नहीं आ रहा है। ऐसे में कयास लगने लगा की इस बार कमल सिहासन पर वसुंधरा नहीं बल्कि भाजपा का अन्य कोई नेता बैठेगा इसके लिए जोधपुर के गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम सामने आया नाम ओम माथुर और भूपेंद्र यादव का भी दबी जुबान सामने आया अंदर खाने एक नाम लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का भी था, मगर राजस्थान का मिजाज अन्य राज्य की राजनीति से अलग हटकर है राजस्थान में आज भी भाजपा की ओर से एकमात्र कद्दावर नेता श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया ही हैं और उनके बगैर प्रदेश में कमल खिल ना आसान नहीं है हुआ भी ऐसा ही,लंबे समय तक चली कशमकश के बाद कॉन्ग्रेस अपनी सरकार बचाने में कामयाब हुई चर्चा और आरोप लगा कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार श्रीमती वसुंधरा राजे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मित्रता के कारण बच गई !
यहां उल्लेख करने वाली बात यह भी है कि श्रीमती वसुंधरा राजे और रमन सिंह दोनों ने अपने अपने पुत्रों को राजनीतिक विरासत के लिए तैयार कर दिया है श्रीमती वसुंधरा राजे के पुत्र दुष्यंत सिंह चौथी बार लोकसभा के सदस्य बने वही रमन सिंह के पुत्र भी सांसद बने शिवराज सिंह चौहान के पुत्र भी राजनीति में सक्रिय नजर आने लगे हैं, श्रीमती वसुंधरा राजे के पुत्र लगातार चौथी बार सांसद बनने के बाद भी केंद्र सरकार में मंत्री नहीं बन पाए इसकी कसक भी श्रीमती वसुंधरा राजे के मन में है !
जहां तक भाजपा के क्षेत्रीय नेताओं की बात करें तो राजस्थान मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह ही हरियाणा और गुजरात की भी हालत ऐसी ही है जहां एक बार जम् जाने के बाद नेता हटने का नाम नहीं ले रहे हैं !
नया मामला अब उत्तर प्रदेश को लेकर सामने आया है जो राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है ! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर अटकलें लगाई जा रही है कि हाईकमान आगामी विधानसभा का चुनाव भाजपा के किसी अन्य नेता के नेतृत्व में लड़े ?
उत्तर प्रदेश में भी किस्सा कुर्सी का शुरू हो गया है, देखना यह होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव में तालाब में से कमल तोड़कर कौन लेकर आता है और कमल सिहासन पर कौन बैठता है। इंतजार करना होगा ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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