क्या योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के विश्वास पर खरे नहीं उतरे?
उत्तर प्रदेश भाजपा के भीतर सरकार के नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलें और सुर्खियां, देश के राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चुनौती बना हुआ है !
राजनीतिक गलियारों में राजनीतिक विश्लेषकों के द्वारा अनेक अटकलें लगाई जा रही है। रविवार 6 जून को भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी राधा मोहन और राज्यपाल आनंदीबेन के बीच हुई मुलाकात भी सुर्खियां बनी और अटकले सुनाई दी की राधा मोहन ने राज्यपाल आनंदीबेन को एक चिट्ठी दी है सच्चाई क्या है इसका अभी तक पता नहीं चला है मगर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर गर्म रहा !
देश के विभिन्न राज्यों में संपन्न होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के स्टार प्रचारक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपने गृह राज्य उत्तर प्रदेश में वह कैसे स्टार नहीं रह सकते यह बात हजम नहीं होती, लेकिन राजनीतिक गलियारों में विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं इसलिए इस सवाल का जवाब भी खोजना होगा !
क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वास पर खरे नहीं उतरे ? इस सवाल पर गहराई से विचार करना होगा, क्योंकि उत्तर प्रदेश वह राज्य है जहां से पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर नरेंद्र मोदी 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने थे तब उन्होंने कहा था कि मैं यहां आया नहीं मुझे तो गंगा मां ने बुलाया है, और इसके बाद मोदी 2019 का लोकसभा चुनाव भी बनारस से ही लड़े, जाहिर है की देश की नजर उत्तर प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बनारस संसदीय क्षेत्र पर अधिक रहती है ! यदि उत्तर प्रदेश में और उत्तर प्रदेश में भी बनारस में कोई घटना घटती है तो उसकी सीधी आहट दिल्ली के रेस कोर्स रोड पर सुनाई देती है, जहां बनारस उत्तर प्रदेश के सांसद नरेंद्र मोदी रहते हैं !
कोविड-19 की दूसरी लहर ने गंगा की लहरों में शवों को तेर ते हुए देखा ! विपक्ष ने सीधा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर किया यही नहीं विदेशी मीडिया ने भी गंगा में तैरती हुई लाशों को दिखाया ! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी बनारस की जनता से मुखातिब होकर भावुक हुए और रोने लगे ! क्या कोविड-19 का दूसरा चरण उत्तर प्रदेश में दूसरा मुख्यमंत्री खोजने के लिए जिम्मेदार है ?
क्योंकि उत्तर प्रदेश मैं महामारी के इंतजामों को लेकर उठ रहे सवालों पर विपक्ष ने योगी आदित्यनाथ को कम घेरा जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अधिक घेरा क्योंकि नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश से सांसद हैं ! यही नहीं गंगा के तटों की तस्वीरों को देख विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ पर सीधा हमला किया !
भाजपा के प्रवक्ता और नेता टीवी चैनलों पर दलील देते हुए दिखाई दिए कि उत्तर प्रदेश में मृत्यु के बाद जल समाधि लेने का रिवाज है ! शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ गंगा तट की घटना से आहत हुए हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर यह दर्द दिखाई भी दिया था जब वह बनारस के लोगों से बात कर भावुक हुए और उनकी आंखों से आंसू आने लगे थे ! ऐसा भी नहीं है कि योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी से निपटने के प्रबंध नहीं किए, योगी लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे और स्वयं कोरोना पॉजिटिव हो गए और जैसे ही वह नेगेटिव हुए वैसे ही वह राज्य के अनेक जिलों में कोरोना महामारी से निपटने की व्यवस्थाओं का जायजा लेने निकल पड़े शायद योगी ही देश के एकमात्र मुख्यमंत्री होंगे जिन्होंने संकट की घड़ी में जिलों का तूफानी दौरा किया !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि पर विपक्ष उत्तर प्रदेश मैं कोरोना महामारी के दरमियान हुई घटनाओं पर ही सवाल खड़े नहीं कर रहा है बल्कि सवाल कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन भी कर रहा है !
तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन पंजाब प्रांत से शुरू हुआ था जिसे भाजपा ने कांग्रेस प्रायोजित एक प्रांत का आंदोलन बता कर खारिज करने का प्रयास किया लेकिन यह आंदोलन तीव्र और मजबूत उत्तर प्रदेश के किसानों के कारण हुआ और इसका नुकसान भाजपा को पश्चिम बंगाल चुनाव में देखने को मिला ! उत्तर प्रदेश के आंदोलनकारी किसान सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहे हैं ! क्या योगी उत्तर प्रदेश के किसानों को संभालने में भी नाकाम रहे? आंदोलनकारी किसान बार-बार एक ही बात दोहरा रहे हैं की यदि तीनों कृषि बिल वापस नहीं लिए तो किसान पश्चिम बंगाल की तरह उत्तर प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ प्रचार करेंगे ? यदि भाजपा के रणनीतिकार इसी पर चिंता कर चिंतन कर रहे हैं तो इस नाजुक घड़ी में भा जा पा की नैया पार उत्तर प्रदेश में कौन सा नेता लगा सकता है यदि ठीक से मंथन किया तो वह नाम देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का होगा ?
राजनाथ सिंह ही एकमात्र ऐसे नेता है जो मौजूदा स्थिति को संभाल कर आगामी विधानसभा चुनाव को मजबूती के साथ लड़ सकते हैं और जीत भी दिला सकते हैं ! राजनाथ सिंह किसानों को भी मना सकते हैं ! और जरूरत पड़ने पर एक मजबूत चुनावी गठबंधन भी खड़ा कर सकते हैं ! वही सत्ता और संगठन के बीच सामंजस्य बैठा सकते हैं!
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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