प्रधानमंत्री का मुफ्त वैक्सीन देने का ऐलान
" तेरी भी जय और मेरी भी जय "
आरोप-प्रत्यारोप वाद विवाद और कशमकश के बाद आखिर 7 जून सोमवार को वह घड़ी आ ही गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति को बदल कर पुरानी योजना को लागू कर 18 साल से ऊपर वाले सभी लोगों को मुफ्त में वैक्सीन लगाने की घोषणा कर दी !
मुफ्त वैक्सीन देने की घोषणा के बाद, मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा और सुर्ख़ियों का दौर भी शुरू हो गया !
चर्चा होने लगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के दबाव में आकर मुफ्त वैक्सीन का ऐलान किया वही विपक्ष की तरफ से खासकर कांग्रेस की तरफ से यह बात सामने आई की राहुल गांधी और डॉक्टर मनमोहन सिंह केंद्र सरकार से मुफ्त वैक्सीन देने की मांग कर रहे थे ! और सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से वैक्सीन नीति लेकर जवाब मांगा हे ! दोनों बातें अपनी अपनी जगह सही है !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुफ्त वैक्सीन की घोषणा कर क्या उस कहावत को चरितार्थ किया है की " सांप भी ना मरे और लाठी भी ना टूटे " मतलब मुफ्त वैक्सीन की घोषणा की क्रेडिट कांग्रेस को भी ना मिले और सुप्रीम कोर्ट के दबाव की तोहमत भी मोदी सरकार पर नहीं लगे ! क्या मुफ्त वैक्सीन की घोषणा इस ओर ही इशारा कर रही है ? " तेरी भी जय हो और मेरी भी जय हो "
कॉन्ग्रेस और राज्य सरकारें केंद्र सरकार से मुफ्त वैक्सीन देने की मांग कर रहे थे अब घोषणा हो गई इसलिए उनकी भी जय हो जो मांग कर रहे थे और जिन्होंने घोषणा की उनकी भी जय हो !
जब परिवार के सदस्यों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा होता है तब न्यायालय पहला काम दो भाइयों के झगड़े को समझौता करा कर न्याय दिलाता है, क्या राज्य और केंद्र पक्ष और विपक्ष के बीच वैक्सिंग को लेकर चल रहे वाद विवाद आरोप-प्रत्यारोप को न्यायालय ने अप्रत्यक्ष रूप से समाप्त करवा दिया है ? अब वैक्सीन पर राजनीति नहीं होनी चाहिए कौन जीता कौन हारा इस पर बात नहीं होनी चाहिए बल्कि लक्ष्य कोरोना महामारी पर जीत की होनी चाहिए !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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