साल 1991 आज क्यों याद किया जा रहा है ? दो राजनीतिक खोजें जिसने इतिहास रचा !
Devendra Yadav
वर्ष 1991 को आज के दिन क्यों याद किया जा रहा है !
1991 देश के लिए दर्दनाक भरा वर्ष भी था जब देश ने राजीव गांधी के रूप में अपने महान नेता को आतंकवादी हमले में खोया था, राजनीतिक रूप से इसलिए यह वर्ष दर्द भरा था, आर्थिक रूप से भी 1991 देश के लिए दर्द भरा था क्योंकि देश का विदेशी खजाना चिंताजनक स्तर पर कम हो गया था और देश के सोने को गिरवी रखना पड़ा था, देश की अर्थव्यवस्था बहुत कमजोर हो गई थी ! 1991 मैं देश के आम चुनाव हुए जिसमें कांग्रेस को 232 सीटें मिली और इस चुनाव में सबसे बड़ा दल बनकर उभरी क्योंकि चुनाव प्रचार के दरमियान कॉन्ग्रेस नेता पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हो गई थी इसलिए कांग्रेस के सामने राजीव गांधी के बाद नेता कौन यह एक बड़ी चुनौती आकर खड़ी हो गई थी, चुनौती उस समय और अधिक गंभीर हो गई थी जब डॉ शंकर दयाल शर्मा ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए कांग्रेस संसदीय दल का नेता बनने से इंकार कर दिया था लेकिन उसी समय श्रीमती सोनिया गांधी ने आंध्र प्रदेश के कद्दावर नेता पूर्व मुख्यमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को खोज निकाला और पीवी नरसिम्हा राव को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुन लिया गया और वह देश के दसवें प्रधानमंत्री बन गए, श्रीमती सोनिया गांधी ने पीवी नरसिम्हा राव की खोज की तो वही पीवी नरसिम्हा राव में देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए तत्कालीन रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ मनमोहन सिंह की खोज की और उन्हें देश का वित्त मंत्री बनाया ! यह एक ऐसा दौर था जब वैश्विक मंदी चल रही थी और उस मंदी की चपेट में भारत बुरी तरह से फंसा हुआ था !
पीवी नरसिम्हा राव और डॉ मनमोहन सिंह की जोड़ी ने देश से लाइसेंस राज को खत्म किया और देश में उदारीकरण की नीति को लागू किया और देश को वैश्विक आर्थिक मंदी से निकाला ! डॉ मनमोहन सिंह के वह 15 वर्ष 5 साल देश के वित्त मंत्री के रूप में और 10 साल देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनका यादगार कार्यकाल रहा है इन 15 वर्षों में डॉ मनमोहन सिंह ने देश को दो बार वैश्विक मंदी से उभार कर विश्व पटल पर भारत को आर्थिक रूप से मजबूत देश के रूप में खड़ा कर दिया था !
अब जबकि भारत विश्वव्यापी कोरोना महामारी जैसे संकट का सामना कर रहा है, कोरोना महामारी के कारण देश को आर्थिक संकट से भी जूझना पड़ रहा है ऐसे मैं देश 1991 के उस दौर को याद कर रहा है जिस कठिन दौर से डॉ मनमोहन सिंह ने भारत को निकाला था !
अब सवाल उठता है कि क्या डॉ मनमोहन सिंह के अनुभव और उनके सुझाव भारत को इस कठिन दौर से निकाल सकते हैं ? यह निर्भर करता है वर्तमान भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इच्छा शक्ति पर , क्योंकि डॉ मनमोहन सिंह देश को आर्थिक संकट से उभारने के लिए के लिए, सरकार को निरंतर सुझाव देते आ रहे हैं, डॉ मनमोहन सिंह सरकार को समय-समय पर आर्थिक संकट के लिए आगाह भी करते आ रहे है !
शायद देश इसीलिए आज 30 साल पुरानी यादों को याद कर रहे हैं, उस समय डॉ मनमोहन सिंह ने भारत को आर्थिक मंदी से कैसे निकाल कर भारत को ताकतवर देश बनाया था !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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