प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में 3 दिन नहीं बल्कि 3 महीने का कैंप करना होगा क्या ?
-Devendra Yadav-
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी तीन दिवसीय दौरे पर पहुंची हैं ! प्रियंका गांधी का दोरा इसलिए भी महत्व रखता है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 15 जुलाई को एक दिवसीय दौरे पर अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी गए थे जहां उन्होंने के इ विकास कार्यों की आधारशिला रखी और शिलान्यास भी किए ! इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्य और कोरोना महामारी के मैनेजमेंट की तारीफ की ! प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों से भी जोड़ कर देखा जा रहा है !
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तर प्रदेश के एक दिवसीय दौरे के दूसरे दिन 16 जुलाई शुक्रवार को श्रीमती प्रियंका गांधी तीन दिवसीय दौरे पर उत्तर प्रदेश पहुंच गई ! लखनऊ पहुंचने के बाद उन्होंने महात्मा गांधी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और उत्तर प्रदेश में खराब कानून व्यवस्था के खिलाफ धरने पर बैठ गई ! पत्रकारों से मुखातिब होते हुए श्रीमती प्रियंका गांधी ने भाजपा सरकार और उसकी नीतियों को आड़े हाथों लिया !
प्रियंका गांधी के लखनऊ पहुंचते ही हवाई अड्डे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जबरदस्त स्वागत किया कार्यकर्ताओं द्वारा जबरदस्त स्वागत और उनके कार्यक्रमों में उमड़े जन सैलाब को देखकर लगता है श्रीमती प्रियंका गांधी को अब जबकि उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव नजदीक हैं उन्हें अपने तीन दिवसीय दौरे की जगह चुनाव तक उत्तर प्रदेश में ही अपना पड़ाव डाल देना चाहिए ! यह बात अक्सर उठती है कि श्रीमती प्रियंका गांधी कुछ दिन के लिए उत्तर प्रदेश आती हैं और आ कर चली जाती हैं ! कार्यकर्ताओं में जो जोश और उत्साह उनकी मौजूदगी में रहता है वैसा उत्साह और जोश उनके चले जाने के बाद लगातार बरकरार नहीं रहता है ! जहां तक मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की बात करें तो, उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं मैं जोश और उत्साह नजर आ रहा है मगर जो नेता पीढ़ी दर पीढ़ी कांग्रेस के नाम की मलाई खा रहे थे वह नेता आज नदारद दिखाई दे रहे हैं, श्रीमती प्रियंका गांधी को उत्तर प्रदेश में स्थाई कैंप करके इसी पर मंथन करना चाहिए और रणनीति बनानी चाहिए की, राज्य के विभिन्न स्तर के चुनाव में लंबे समय से मलाई खा रहे नेताओं को चुनाव लड़ने के लिए तरजी देनी चाहिए, या फिर उन जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देना चाहिए,जो संकट के समय आज प्रियंका गांधी के साथ और कांग्रेस के साथ खड़े हुए हैं !
जब से प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की कमान सीधे अपने हाथों में ली है तब से कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं का मनोबल बड़ा है, उसकी वजह यह है कि प्रियंका गांधी भी सीधे आम कार्यकर्ताओं से स्वयं संवाद करती हैं ,जबकि इससे पहले प्रदेश के बड़े नेता आम कार्यकर्ताओं को श्रीमती प्रियंका गांधी राहुल गांधी और सोनिया गांधी के करीब भी फटकने तक नहीं देते थे यही वजह रही कि प्रदेश में कांग्रेस कमजोर होती हुई चली गई लेकिन प्रदेश कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अब प्रियंका गांधी के रूप में एक उम्मीद जगी है, देखा गया है की प्रियंका गांधी भी अपने कार्यकर्ताओं की उम्मीद पर खरी उतरने का भरसक प्रयास कर रही है ! उत्तर प्रदेश की जन समस्याओं को लेकर अक्सर प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ आवाज भी उठाती रही हैं, यही नहीं प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश के आमजन की दुख तकलीफ में भी उनके साथ खड़ी हुई दिखाई देती हैं ! Covid-19 के समय मजदूरों के पलायन को लेकर देश में हाहाकार मचा तब प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के प्रवासी मजदूरों को विभिन्न राज्यों से अपने गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बसों का इंतजाम किया वही पीड़ित परिवार के घरों पर राशन भी पहुंचाया ! अब सवाल यह उठता है कि प्रियंका गांधी लगातार उत्तर प्रदेश की जन समस्याओं को प्रमुखता से उठाती रही लेकिन उनकी बात आमजन तक पहुंची या नहीं यह काम उन नेताओं का था जो नेता बरसों से कांग्रेस के नाम पर मलाई खा रहे थे, वह नेता तो श्रीमती प्रियंका गांधी के बाद उत्तर प्रदेश में कहीं नजर तक नहीं आते जबकि आम कार्यकर्ता भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आए दिन सड़कों पर नजर आते हैं !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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