आम आदमी पार्टी के बढ़ते कदम ! राजनीतिक नुकसान किसको ? भाजपा या कांग्रेस को ?
-Devendra Yadav-
लगातार दिल्ली जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राजनीतिक हौसले बुलंद दिखाई दे रहे हैं !
आम आदमी पार्टी लगातार देश के विभिन्न राज्यों में अपनी पार्टी का विस्तार करने में जुटी हुई है !
कोरोना महामारी के समय दिल्ली में क्या हुआ ? और विपक्ष कोरोना महामारी को लेकर केजरीवाल सरकार पर लगातार हमला करता रहा लेकिन इसकी परवाह किए बगैर आम आदमी पार्टी गोवा गुजरात पंजाब और उत्तराखंड उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति बनाती हुई नजर आई ! खास बात तो यह की मीडिया और राजनीतिक गलियारों में आम आदमी पार्टी की रणनीति या तो नजर नहीं आती या फिर उसकी रणनीति को राजनीतिक पंडित और मीडिया दरकिनार कर देते हैं !
आम आदमी पार्टी की विस्तार वादी राजनीति से किस पार्टी को नुकसान होगा और किस पार्टी को इससे फायदा होगा ? इसे समझने के लिए पहले दिल्ली को समझना होगा ? दिल्ली में लगातार 15 साल तक सरकार चलाने वाली कॉन्ग्रेस को आम आदमी पार्टी ने पलक झपकते ही सत्ता से ना केवल बाहर किया बल्कि बुरी तरह से चुनाव हराया, इसके 5 साल बाद आम आदमी पार्टी लगातार जीती और कांग्रेस दिल्ली विधानसभा से पूरी तरह से बाहर हो गई, यही नहीं इसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पढ़ा कांग्रेस दिल्ली लोकसभा की 7 सीटों में से एक भी सीट पर चुनाव नहीं जीत पाई ! आम आदमी पार्टी के प्रभाव ने दिल्ली में भाजपा से ज्यादा नुकसान कांग्रेस को पहुंचाया, जबकि भाजपा के पास विधानसभा में बिल्कुल कम सीटें हैं लेकिन लोकसभा की सारी सीटें भाजपा के पास है !
गोवा और गुजरात से आम आदमी पार्टी के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव और कदम के अच्छे समाचार आ रहे हैं ! गुजरात और गोवा में इस समय भाजपा की सरकार है ! गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दोनों ही राज्यों में अपनी सरकार बनाते बनाते रह गई थी ! गोवा में तो कांग्रेस नीत गठबंधन के पास बहुमत भी था इसके बावजूद कॉन्ग्रेस वहां अपनी सरकार नहीं बना पाई !
अब इन दोनों ही राज्यों में आम आदमी पार्टी ने अपने राजनैतिक पैर अधिक पसार लिए ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी किस पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाएगी कांग्रेसी या भा जा पा, इसका उत्तर कांग्रेस ही होगा क्योंकि भाजपा के पास आज भी दोनों राज्यों में अपना मजबूत पारंपरिक वोट है और अपना मजबूत के डर भी ! आम आदमी पार्टी इन दोनों ही राज्यों में कॉन्ग्रेस के वोट में अधिक सेंधमारी करेगी, इस कारण नुकसान कांग्रेस को ही होगा जो पिछले दिनों दिल्ली में भी देखा गया आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में भी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर जबरदस्त सेंधमारी की थी और उसी की वजह से केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं और कांग्रेस न केवल दिल्ली की सत्ता से बाहर है बल्कि विधानसभा के अंदर भी नहीं है !
कहने का मतलब यह है की जहां-जहां आम आदमी पार्टी जाकर चुनाव लड़ेगी वहां वहां भाजपा को कम बल्कि कांग्रेस को अधिक नुकसान होगा ! चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के रणनीतिकार हार की समीक्षा कैसे करते हैं, और समीक्षा करते भी हैं या नहीं यह भी एक सवाल है, क्योंकि दशकों से देश के जिन राज्यों में कॉन्ग्रेस सत्ता से बाहर है उनमें से बिहार उत्तर प्रदेश उड़ीसा तमिल नाडु आंध्र प्रदेश पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में कॉन्ग्रेस भाजपा की वजह से सत्ता से बाहर नहीं है बल्कि वहां के क्षेत्रीय दलों की वजह से सत्ता से बाहर है ! जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार पश्चिम बंगाल मैं भाजपा क्षेत्रीय दलों के वजह से कांग्रेस से अधिक मजबूत है, क्योंकि समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी जेडीयू जेसी क्षेत्रीय पार्टियों के पास आज जो अपना वोट बैंक है वह वोट बैंक कभी कांग्रेस का हुआ करता था ! कमोबेश कांग्रेस की यही स्थिति दक्षिण भारत नॉर्थ ईस्ट के राज्य में भी है, बल्कि यह कहे कि नार्थ ईस्ट में क्षेत्रीय दलों की मदद से इन प्रदेशों में भा जा पा मजबूत हुई है और कांग्रेस कमजोर हुई है ! भाजपा ने नार्थ ईस्ट में जाकर पहली बार कई राज्यों में अपनी सरकारें भी बनाई हैं ! भाजपा प्रयास दक्षिण में भी ऐसा ही कर रही है लेकिन गत दिनों संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में वह तमिलनाडु में तो सफल नहीं हो पाई लेकिन पांडुचेरी में वह सफल हो गई ! क्षेत्रीय दलों के कारण कांग्रेस को ना केवल विधानसभा चुनाव में नुकसान हो रहा है बल्कि लोकसभा चुनाव में भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है जबकि भाजपा राज्यों में भले ही अपनी सरकार नहीं बना पा रही है लेकिन उसे लोकसभा चुनाव में उनमें से कई राज्यों में लोकसभा की अच्छी सीटें मिल रही है ! क्या यही वजह है भाजपा पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत मिलने के बाद भी क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर केंद्र सरकार को चला रही है ? शायद भाजपा के रणनीतिकार अच्छे से जानते हैं की उसे क्षेत्रीय दलों के कारण ही पूर्ण बहुमत और प्रचंड बहुमत मिला है क्षेत्रीय दलों को लोकसभा में सीटें मिली या नहीं लेकिन भाजपा को क्षेत्रीय दलों के कारण क्षेत्रीय दलों का वोट मिला और उस वोट के कारण भाजपा को लोकसभा की सीट मिली, शायद इसीलिए भाजपा के रणनीतिकार प्रचंड बहुमत होने के बाद भी केंद्र में गठबंधन की सरकार चला रहे हैं !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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