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Tuesday, July 20, 2021

7/20/2021 04:41:00 PM

बीएसफोर संगठन ने आदिवासी जनजाति के वंचित खैरवा जाति के परिवारों के संवैधानिक अधिकारों के हनन के संदर्भ का राष्ट्रपति को भिजवाया ज्ञापन




बीएसफोर के राष्ट्रीय सचिव संदीप निमेश ने बताया कि राजस्थान के बारां जिले के  आदिवासी अंचल किशनगंज शाहबाद तथा अटरू, छबडा मे निवास करने वाले खैरवा जनजाति के लोग अपने भारतीय संविधान मे प्रदत्त अधिकारों से आज भी वंचित हो रहे है। जबकि राजस्थान सरकार की अनुसूचि में अनुसूचित जनजाति के अधीन केथोडी, काथोडी, खैरवार, जनजाति मे शामिल है। इसी जाति के लोग बारां जिले में खैरवा जनजाति के नाम से जाने जाते है एवं इनकी आपस मे रिश्तेदारी राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाडा, उदयपुर संभाग के लोगों मे मिलती है। यह जनजाति बरसों से जंगलो पर अपनी आजीविका चलाती आती थी। लेकिन सरकार के द्वारा जंगलों में खेर के वृक्ष से कत्था निकालने का काम प्रतिबंधित किया है तब से यह लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए खुली व बन्धुआ मजदुरी कर रहे है। इनमें शिक्षा का स्तर 1 प्रतिशत से भी कम है। क्योंकि संवैधानिक अधिकारों के अन्तर्गत जनजाति का प्रमाण पत्र इन लोगांे को अभी तक राजस्थान सरकार ने जारी नही किया है। 

जबकि बारां जिले में 25-30 गावों मे ये आबादी निवास करती है एवं इनकी आबादी 30 हजार के लगभग है। जिनको राजस्थान सरकार के द्वारा अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। बारां जिले में निवास करने वाली सहरिया आदिवासी जनजाति के लोगों को मुफ्त में राजस्थान सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा घी, दाल, तेल एवं गेंहू प्रतिमाह दिया जाता है। इसी तरह से खैरवा जनजाति के लोगों को भी सरकार के द्वारा घी, दाल, तेल एवं गेंहू प्रतिमाह मुफ्त दिया जाता है। जबकि सहरिया जनजाति के लोगों को जनजाति प्रमाण पत्र सरकार के द्वारा जारी किया जाता है लेकिन खैरवा जनजाति को यह प्रमाण पत्र जारी नही किया है। राजस्थान में केथोडी, काथोडी, खैरवार जनजाति मे शामिल है। लेकिन बारां जिले के इसी जाति के लोग जनजाति के अधिकार से वंचित है। जिसकोे भारत सरकार ओर राजस्थान सरकार लगातार अनदेखा करती चली आ रही है। इनका रहन-सहन, खान-पान आज भी आजादी के पूर्व जैसा ही है। यह जनजाति मध्यप्रदेश राजस्थान के सीमावर्ती इलाके मे पायी जाती है। यह जनजाति अभी वर्तमान मे दोर में लुप्त प्राय होती जा रही है। 

पूर्व में भी एक ज्ञापन राष्ट्रपति महोदय को इस सन्दर्भ मे भिजवाया गया था। साथ ही राजस्थान सरकार के जनजाति क्षैत्रीय विकास मन्त्री एवं मुख्यमन्त्री राजस्थान सरकार को भी इस बाबत् अवगत करवा दिया गया है। लेकिन राजस्थान सरकार अपनी ओर से अभिशंषा राष्ट्रपति महोदय को नही भिजवा रहे है।



बीएसफोर के राष्ट्रीय सचिव संदीप निमेश ने बताया कि   हम संगठन की ओर से यह मांग करते है किः-

1. खैरवा जनजाति के लोगों को जनजाति का प्रमाण पत्र राजस्थान सरकार द्वारा जारी करवाने का निर्देश प्रदान करें।

2. इसी जाति के लोगों को हथियादह बान्ध परियोजना के डूब क्षैत्र मे आए विस्थापित परिवारों को राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के किनारे पुर्नवासित किया जाये। 

3. वर्तमान में बान्ध परियोंजना का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। लेकिन स्थानीय प्रशासन जिला कलक्टर एसडीएम के द्वारा इन लोगों को पहले पुर्नवास करना था। उसके बाद परियोजना का कार्य शुरू किया जाना था। लेकिन इन परिवारों का पुर्नवास किए बिना निर्माण कार्य शुरू कर दिया। वर्तमान मे ये परिवार डूब खैत्र मे आए हथियादह गांव मे ही निवास कर रहे है। परिस्थितियां बरसात की है। यदि बरसात होती है ओर पानी का भराव बांध मे हो जाता है तो इस जाति के लोग अपनी जान माल की हिफाजत नही कर पाएंगे। जिसका जिम्मेदार जिले का प्रशासन होगा। 

4. इसलिए बान्ध का कार्य तुरन्त रूकवाया जाये तथा पहले पुर्नवास किया जाए। 

 भारत के संविधान मे प्रदत्त जनजाति के अधिकारों से खैरवा जनजाति के लोगों को वंचित नही रखते हए इनका जनजाति का प्रमाण पत्र राजस्थान सरकार को जारी करने का निर्देष दिए जाए एवं इनके संवैधानिक अधिकारों संरक्षण की व्यवस्था की जाए। 

बीएसफोर के राष्ट्रीय सचिव संदीप निमेश ने बताया कि इस ज्ञापन की प्रतिलिपि सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु:-

1. मुख्यमन्त्री राजस्थान सरकार। 

2. जिला कलक्टर।

3. उपखण्ड अधिकारी किशनगंज। को भी भिजवाई गई हैं।

तथा ज्ञापन के दौरान टीकम शाक्य बीएसफोर के संस्थापक, कमल बैरवा भीमआर्मी ग्रामीण बारां जिलाध्यक्ष, उस्मान भाई भीमआर्मी किशनगंज नगर अध्यक्ष, नैना सहरिया, बाबूभाई भाकियू तहसील अध्यक्ष, भीमराज नागर, आत्माराम सहरिया, रोशनलाल खैरूआ, आदि एसडीएम किशनगंज के समक्ष मोजूद रहे

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