कांग्रेस : कार्यकारी अध्यक्ष मजबूती के लिए या असंतोष को दूर करने के लिए !
लंबे समय से हाशिए पर पड़ी कांग्रेस, कांग्रेस के भीतर राज्य स्तर पर बदलाव करती हुई नजर आ रही है लेकिन यह बदलाव क्यों किया जा रहा है और इस बदलाव से कांग्रेस क्या हासिल करना चाहती है यह समझ से परे है ? देश के अनेक राज्यों का कांग्रेस के भीतर का असंतोष सड़कों पर सुनाई दे रहा है, लंबे समय से पार्टी हाईकमान राज्यों के असंतोष को समाप्त करने का प्रयास भी कर रहा है, लेकिन हाईकमान को राज्य के असंतोष को दूर करने में बड़ी सफलता अभी तक नहीं मिल पा रही है क्योंकि हाईकमान के प्रयासों के बावजूद भी राज्यों का विवाद अभी भी जस का तस दिखाई दे रहा है ! ताजा खबर यह आ रही है कि पार्टी हाईकमान विभिन्न राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा कार्यकारी अध्यक्षों की भी नियुक्ति करने में जुट गया है कई राज्यों में कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्तियां भी जा चुकी है और कई राज्यों में कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्तियां होनी है ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि राज्यों में मजबूत अध्यक्ष होने के बाद भी हाईकमान को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की जरूरत क्यों पड़ रही है जबकि राज्यों के भीतर अध्यक्ष के अलावा जंबो कार्यकारिणी भी बनी हुई है ! क्या कॉन्ग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस को मजबूत करना चाहती है या फिर आंतरिक असंतोष को दूर करना चाहती है ? और क्या कार्यकारी अध्यक्ष कांग्रेस को मजबूत कर देंगे या कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद असंतोष दूर हो जाएगा, यह सवाल अभी भी जस का तस है क्योंकि हाईकमान को राज्यों के भीतर नेताओं का असंतोष तो नजर आ रहा है, मगर वह कार्यकर्ता नजर नहीं आ रहे जिनको नेताओं से नाराजगी और असंतोष है ? कांग्रेस कमजोर नेताओं की नाराजगी के कारण नहीं है बल्कि कांग्रेस कमजोर इसलिए है क्योंकि आम कार्यकर्ता अपने आप को उपेक्षित महसूस कर रहा है, और उस उपेक्षा के कारण आम कार्यकर्ता कुंठित होकर अपने घरों में बैठा हुआ है, कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के कुंठित होकर घरों में बैठने का परिणाम ही है की देश में भाजपा सरकार को घेरने के अनेक मुद्दे सामने हैं मगर सड़कों पर कांग्रेस का विरोध दम दारी के साथ नजर नहीं आ रहा है ! सवाल यह भी खड़ा होता है की भा जा पा सरकार के खिलाफ केवल राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अकेली आवाज फिर सुनाई देती है बाकी के नेता राहुल गांधी के स्वर में स्वर क्यों नहीं मिला तो इसकी वजह भी आम कार्यकर्ता ही हैं क्योंकि आम कार्यकर्ता को राज्यों के नेताओं पर अब शायद कम ही विश्वास है अब कांग्रेसका कार्यकर्ता नेताओं के पीछे खड़ा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है !
सवाल वही है की पार्टी हाईकमान राज्यों में कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर नेताओं के असंतोष और नाराजगी को तो दूर कर सकता है मगर कांग्रेस को मजबूती तो कांग्रेस का कार्यकर्ता ही दिला सकता है, और वह अभी होता नजर नहीं आ रहा क्योंकि हाईकमान की तरफ से राज्यों में जिन समन्वय समितियों का गठन किया है वह समितियां केवल नेताओं की नाराजगी पर ही अधिक ध्यान केंद्रित कर रही हैं आम कार्यकर्ताओं की तरफ उनका अभी भी ध्यान नहीं है और समितियां भी राज्यों में जाकर टी पार्टी कर दिल्ली लौट जाती है !
देवेंद्र यादव,कोटा राजस्थान
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