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Saturday, July 3, 2021

7/03/2021 07:56:00 AM

कॉन्ग्रेस की समस्या - नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी की दरकार है क्या?



-Devendra Yadav-

पंजाब और राजस्थान मैं कांग्रेस के भीतर चल रहे घमासान के बीच राजनीतिक गलियारों में एक प्रचलित राजनीतिक शब्द निकल कर आया कि पंजाब कांग्रेस के अंदर नाराज नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी हाईकमान कोई भी बड़ी जिम्मेदारी देने वाली है ! अटकल लगाई जा रही है कि सिद्धू को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया जा सकता है अटकलें यह भी है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है इसी बीच खबर यह भी आ रही है कि सिद्धू को 2022 में संपन्न होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया जा सकता है, अब समझ नहीं आ रहा है कि कांग्रेस हाईकमान सिद्धू को कौन सी बड़ी जिम्मेदारी सौंपने जा रही है !

कांग्रेस के भीतर नेताओं को संतुष्ट रखने के लिए लंबे समय से बड़ी जिम्मेदारी वाला शब्द अब कांग्रेस का तकिया कलाम बनता नजर आ रहा है !

यदि इस एक शब्द पर मंथन और चिंतन करें तो कांग्रेस को इस एक शब्द ने 7 सालों में कांग्रेस को बहुत नुकसान पहुंचाया है, शब्द तो सही है लेकिन उसके अमल करने में देरी होना नुकसानदायक रहा ! यूं तो इसके अनेक उदाहरण है लेकिन मध्य प्रदेश को इसका ज्वलंत उदाहरण मान सकते हैं !

जहां कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बड़ी जिम्मेदारी देने में देरी का परिणाम कांग्रेस और देश के सामने हैं, उदाहरण तो असम का भी सामने है हेमंत विश्व शर्मा को कांग्रेस बड़ी जिम्मेदारी समय रहते हुए नहीं दे पाई आज हेमंत विश्व शर्मा भाजपा में शामिल होकर असम के मुख्यमंत्री हैं ! राजस्थान और पंजाब मे भी सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू को बड़ी जिम्मेदारी देने की बात हो रही है लेकिन यह पता नहीं चल रहा है कि जिम्मेदारी कब मिलेगी और बड़ी जिम्मेदारी क्या होगी ? और कहीं जिम्मेदारी देने में कहीं देर तो नहीं हो जाएगी ?

मौजूदा वक्त में कांग्रेस की आंतरिक स्थिति " एक अनार -सौ बीमार " जेसी है ! सीमित पद है और पद पाने वाले नेताओं की संख्या अधिक है ! लंबे समय से कॉन्ग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर है और राजस्थान छत्तीसगढ़ और पंजाब के अलावा उनकी देश के अन्य किसी राज्य में अपनी सरकार नहीं है ! जब केंद्र और राज्यों में कांग्रेस की सरकार होती थी तब राज्यपाल  निगम आयोग और बोर्ड जैसे अनेक पद होते थे जिनमें बड़ी संख्या में नेताओं को जिम्मेदारियां मिल जाया करती थी ,मौजूदा कांग्रेस उस स्थिति में नहीं है कि वह नेताओं को संतुष्ट कर पाए ! लंबे समय तक केंद्र और राज्यों की सत्ता में रही कांग्रेस के नेताओं की आदत सत्ता सुख की पड़ी हुई है ऐसे में वह पद से बाहर कैसे रहे! जहां भी इन नेताओं को थोड़ी बहुत संभावना नजर आती है वही इन नेताओं का असंतोष सामने आ जाता है ! राज्यों में कांग्रेस की सरकार नहीं होने के कारण कांग्रेस के नेताओं को राज्यसभा में भेज कर संतुष्ट करने में भी दिक्कतें आ रही हैं ! मध्य प्रदेश मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजगी का कारण राज्यसभा का चुनाव भी था ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यसभा में जाना चाहते थे लेकिन कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाया जबकि सिंधिया ने नाराजगी के चलते कांग्रेस छोड़ी और भाजपा के टिकट पर वह उसी चुनाव में राज्यसभा पहुंचे, यदि कांग्रेस यह जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को दे देती तो शायद मध्यप्रदेश में भी आज कांग्रेस की सरकार होती!

बात बड़ी जिम्मेदारी और देरी ,देरी के कारण हो रहे नुकसान की हो रही है, तो जिम्मेदारी मैं देरी आम कार्यकर्ताओं और नेताओं की नियुक्ति को लेकर ही नहीं है बल्कि देरी राहुल गांधी और श्रीमती प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी देने पर भी हो रही है जिसका बड़ा नुकसान कांग्रेस को हो रहा है ! लंबे समय से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पा रहा है आवाज सुनाई देती है कि इस पद की जिम्मेदारी राहुल गांधी या फिर प्रियंका गांधी को मिलने वाली है लेकिन यह जिम्मेदारी कब और किसको मिलेगी इसका भी सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू को कब बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी इसी की तरह इंतजार करना होगा !


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