राजस्थान भाजपा :वसुंधरा के बाद कौन ?और क्या वसुंधरा तीसरी बार राज्य की मुख्यमंत्री बन पाएंगी ?
-Devendra Yadav-
राजस्थान मैं राजनीतिक सियासत गर्म है ! कॉन्ग्रेस जिसे वर्तमान कॉन्ग्रेस सरकार को बचाए रखने की चिंता है तो वही भाजपा को भविष्य में राजस्थान की सत्ता कैसे मिले इसकी चिंता है ! दोनों ही दलों में वर्तमान और भविष्य की चिंता स्थानीय क्षत्रप नहीं कर रहे हैं बल्कि चिंता दोनों ही दलों के हाईकमान कर रहे हैं !
दोनों ही दलों में एक जैसी समस्या है और समस्या नेतृत्व को लेकर है, क्योंकि कांग्रेस और भाजपा के अंदर जो नेतृत्व दिखाई दे रहा है उससे भविष्य के नेता चिंतित हैं और खुलेआम अपनी नाराजगी प्रकट करने में लगे हुए ! यदि भाजपा और कांग्रेस के इतिहास के पन्नों को खोल कर देखें तो, भाजपा के अंदर 1977 से लेकर 2017 तक प्रदेश सरकार का नेतृत्व राजपूत जाति के नेता ने ही किया है !
पहली बार राज्य में 1977 में गैर कांग्रेसी जनता पार्टी की सरकार बनी जिसमें भैरों सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने, शेखावत तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे उनके बाद श्रीमती वसुंधरा राजे राज्य की मुख्यमंत्री बनी जिन्होंने अपने दो कार्यकाल पूरे किए ! वरिष्ठता के आधार पर अनेक भाजपा के कद्दावर नेता हाथ मलते रह गए और वह मुख्यमंत्री के मुकाम तक नहीं पहुंच पाए ! यह टी स आज भी भाजपा के नेताओं और उनके समर्थक कार्यकर्ताओं मैं आज भी बरकरार है क्योंकि भाजपा के अंदर गैर राजपूत समुदाय के बड़े कद्दावर नेता मौजूद है लेकिन उन्हें अवसर नहीं मिल रहा है और अवसर नहीं मिलने का कारण ही है कि आज श्रीमती वसुंधरा के खिलाफ नाराजगी के स्वर उठ रहे हैं ! लेकिन सवाल फिर वही है की श्रीमती वसुंधरा के बाद भाजपा का चेहरा कौन होगा ! राजपूत या गैर राजपूत यह सबसे बड़ा सवाल है?
वसु मैडम के बाद जो चेहरे नजर आ रहे हैं और जिनकी राजनीतिक गलियारों में चर्चा है, उनमें राजेंद्र राठौड़ दीया कुमारी गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्यवर्धन सिंह राठौर का नाम प्रमुख है, यह चारों नेता भी राजपूत जाति से ही आते हैं, ऐसे में यदि हाईकमान इन चार नामों में से किसी एक को चेहरा बनाती है तो नाराजगी जस की तस दिखाई देगी ! क्योंकि इन चार नामों के अतिरिक्त भी भाजपा के अंदर ऐसे नेता मौजूद हैं जिन्होंने पार्टी अनुशासन में रहते हुए अपने आप से कंप्रोमाइज करके रखा इन नेताओं में गुलाबचंद कटारिया घनश्याम तिवारी मदन दिलावर ओम बिरला भूपेंद्र यादव ओम माथुर जैसे नेता मौजूद है!
बात यदि कांग्रेस के इतिहास की करें तो कांग्रेस ने राज्य में समय-समय पर अलग-अलग जातियों के मुख्यमंत्री दिए जिनमें हीरा लाल शास्त्री से लेकर मोहनलाल सुखाड़िया बरकतुल्लाह खान हरिदेव जोशी जगन्नाथ पहाड़िया हीरालाल देवपुरा और अब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं !
अशोक गहलोत तीसरी बात राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, कांग्रेस के भीतर एक गु ट विशेस उनके नेतृत्व का विरोध कर रहा है !
सचिन पायलट की अगुवाई में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का विरोध हो रहा है ! सचिन पायलट गुट का मानना है कि कांग्रेस की वर्तमान सरकार सचिन पायलट की मेहनत और प्रयासों के कारण बनी है इसलिए सचिन पायलट राज्य के मुख्यमंत्री होने चाहिए !
सचिन पायलट ने बड़े स्तर पर अपनी नाराजगी का इजहार भी किया था उस समय ऐसा लग रहा था की शायद राजस्थान की सरकार भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर गिर जाएगी लेकिन हाईकमान के दखल से सरकार तो बच गई लेकिन सचिन पायलट की नाराजगी दूर नहीं हो पाई !
बात यह सुनाई दे रही है कि पार्टी हाईकमान जल्दी ही सचिन पायलट को कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है जिम्मेदारी क्या होगी यह भी एक सस्पेंस है और इस सस्पेंस पर से पर्दा कब उठेगा इसका अभी इंतजार करना होगा ? कॉन्ग्रेस के भीतर तो अशोक गहलोत के बाद सचिन पायलट का चेहरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है लेकिन भाजपा के भीतर श्रीमती वसुंधरा के बाद दिखने वाला कोई एक चेहरा अभी भी स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है ! जो चेहरे दिखाई दे रहे हैं वह केवल राजनैतिक कयास मात्र हैं !
और यही वजह है कि श्रीमती वसुंधरा राजे ने तीसरी बार राज्य की मुख्यमंत्री बनने के लिए अपनी ताल मजबूती के साथ ठोक रखी है !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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