कांग्रेस: नेताओं की नाराजगी का समाधान करने का मतलब टाइमपास करना है क्या ?
-Devendra Yadav, Political Analyst-
राजस्थान और पंजाब कांग्रेस के अंदर नेतृत्व को लेकर लंबे समय से घमासान छी डा हुआ है ! राजस्थान में नेतृत्व को लेकर नेताओं की नाराजगी की अगुवाई सचिन पायलट कर रहे हैं तो वही पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू कर रहे हैं ! राजस्थान और पंजाब दोनों ही प्रांतों में नेतृत्व को लेकर एक जैसी समस्या है ! राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्दू को नाराजगी है ! नाराजगी इसलिए है क्योंकि गहलोत और कैप्टन दोनों ही लंबे समय से अपने-अपने राज्यों मैं राजनीतिक सत्ता पर का बीज है ! पायलट और सिद्धू दोनों नेताओं को गहलोत और कैप्टन के सत्ता में बने रहने के कारण अपना राजनीतिक भविष्य अंधकार में दिखाई दे रहा है!
दोनों ही नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं और दोनों ही नेताओं की नाराजगी का कारण भविष्य की चिंता ही है ! दोनों ही नेता अपने राजनीतिक भविष्य को सशक्त बनाने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही नेता अभी तक अपने अपने प्रयासों में सफल होते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि उनके सामने दो बड़े मजबूत क्षत्रप सामने हैं!भले ही ऊपर से यह लगे कि पार्टी हाईकमान दोनों ही नेताओं की नाराजगी को लेकर गंभीर है और हाईकमान इस प्रयास में भी है कि दोनों नेताओं की नाराजगी को उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देकर दूर किया जाए लेकिन अभी यह होता हुआ भी दिखाई नहीं दे रहा है! दोनों ही राज्यों में पार्टी हाईकमान ने पार्टी के भीतर समन्वय समिति भी बना रखी है, ! पार्टी कार्यकर्ताओं सत्ता में बैठे नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए बनाई गई कमेटी पर नजर डालें तो अभी तक कार्य के नाम पर केवल खानापूर्ति होती दिखाई दे रही है मतलब टाइमपास !
दोनों ही राज्यों में बार-बार एक आवाज सुनाई देती है की शीघ्र ही राज्य में मंत्रिमंडल का पुनर्गठन होगा और कार्यकर्ताओं को राजनीतिक नियुक्तियां मिलेंगी वही सचिन पायलट और नवजोत सिंह सिद्धू को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन समय गुजर गया स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है ना तो दोनों ही राज्यों में मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हो रहा है और ना ही राजनीतिक नियुक्तियां हो रही है और ना ही पायलट और सिद्धू को कोई जिम्मेदारी मिली, बल्कि मंत्रिमंडल पुनर्गठन और राजनीतिक नियुक्तियों में देरी के कारण कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है क्योंकि दोनों ही राज्यों में अगले विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है ! पंजाब में इसी साल 2022 को और राजस्थान में 2023 में विधानसभा के चुनाव होने हैं !
विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण हाईकमान शायद किसी भी प्रकार का कोई जोखिम लेना नहीं चाहती है खासकर पंजाब में जहां इसी वर्ष विधानसभा के चुनाव होने हैं !
कांग्रेस के लिए पंजाब और राजस्थान दोनों ही राज्य मौजूदा वक्त में खास राज्य हैं और हाईकमान के लिए अपने दोनों ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कैप्टन अमरिंदर सिंह भी खास है ! क्योंकि दोनों की दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव देश के आम चुनाव से पहले होने वाले हैं, कॉन्ग्रेस और पार्टी हाईकमान कतई नहीं चाहेगी की लोकसभा चुनाव से पहले इन दोनों ही राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो वह चाहेगी कि राजस्थान और पंजाब में लगातार दूसरी बार अपनी सरकार बने ? मौजूदा वक्त में दोनों ही राज्यों में प्रमुख विपक्षी दोनों की बात करें तो पंजाब में अकाली दल स्वयं सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, हालांकि उसने भाजपा से गठबंधन तोड़कर एक नया गठबंधन बहुजन समाज पार्टी के साथ किया है लेकिन इस नए गठबंधन के बाद भी अकाली दल पर कांग्रेस भारी नजर आ रही है !
राजस्थान की बात करें तो राजस्थान मैं कांग्रेस के सामने भा जा पा है लेकिन भा जा पा के अंदर नेता को लेकर लंबे समय से उठापटक चल रही है और उठापटक चुनाव के वक्त तक दिखाई देगी क्योंकि श्रीमती वसुंधरा राजे मानने को तैयार नहीं है की अगला विधानसभा चुनाव भा जा पा उनके बगैर लड़े, राजस्थान में भाजपा के सामने वसुंधरा राजे एकमात्र समस्या नहीं है बल्कि समस्या यह भी है कि इस बार प्रदेश में भाजपा की तरफ से गैर राजपूत नेता विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से प्रमुख चेहरा बने ! और यह मजबूत चेहरा गैर राजपूत जाति से अभी दिखाई नहीं दे रहा है अभी भी जो चेहरे मजबूती के साथ दिखाई दे रहे हैं वह चेहरे भी राजपूत जाति से हैं !
कुल मिलाकर राजस्थान और पंजाब में राजनीतिक मजबूरियां और स्थितियां गहलोत और कैप्टन के अनुकूल ही नजर आ रही हैं !
सवाल सिद्धू और पायलट का है तो दोनों के हाथ में बड़ी जिम्मेदारी वाला झुनझुना पकड़ा ही रखा है, झुनझुना टूटने से पहले दोनों ही राज्यों के विधानसभा चुनाव आ जाएंगे और बाद में लोकसभा चुनाव की तैयारियां होने लग जाएगी !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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