केंद्रीय मंत्रिमंडल का पुनर्गठन
हटाए गए मंत्रियों पर चर्चा अधिक क्यों हो रही है ?
-Devendra Yadav- Sr. Journalist
बुधवार 7 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हुआ जिसकी चर्चा गुरुवार 8 जुलाई को मीडिया में और देशभर में दिन भर होती सुनाई दी! चर्चा दो बातों पर अधिक सुनाई दी एक नए मंत्रिमंडल में डॉक्टर इंजीनियर वकील और ब्यूरोक्रेट की संख्या को लेकर दूसरी बात चर्चा की यह रही की भाजपा ने अपने कद्दावर नेताओं को मंत्रिमंडल से बाहर क्यों किया ?
चर्चा इस बात पर भी हो रही है कि गृहमंत्री अमित शाह को गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सहकारिता मंत्रालय क्यों दिया गया ! चर्चा तो दिल्ली सहित ज्यादातर राज्यों में पेट्रोल के दाम सो रुपए के पार होने पर भी हो रही है चर्चा इस बात को लेकर नहीं है कि पेट्रोल 100 के पार हो गया बल्कि चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विभाग बदलकर पेट्रोलियम विभाग पूरी को दिया गया है एक तरफ नवनियुक्त पूरी पेट्रोलियम मंत्रालय का चार्ज संभाल रहे थे तो वही दूसरी तरफ दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर पेट्रोल के दाम 100 से ऊपर का आंकड़ा छू रहे थे ! चर्चा कानून मंत्री रवी शंकर प्रसाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को मंत्रिमंडल से हटाए जाने पर अधिक होती सुनाई दी ! तीनों नेताओं के मंत्रिमंडल से हटाए जाने को लेकर राजनीतिक पंडित और विश्लेषकों के अलग-अलग तर्क सुनाई दिए ! यह तीनों मंत्री वह है जिन्होंने कोरोना महामारी के संकट के समय पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सुझावों का मजाक उड़ाया था ! जबकि डॉ मनमोहन सिंह और राहुल गांधी ने देश और जनता के हित में केंद्र सरकार को अपने सुझाव दिए थे लेकिन डॉ मनमोहन सिंह और राहुल गांधी के सुझावों पर अमल करने की जगह प्रकाश जावड़ेकर रवी शंकर प्रसाद और डॉ हर्षवर्धन ने प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं का मजाक उड़ा कर उनके बयानों की आलोचना की थी ! चर्चा अमित शाह को गृह मंत्रालय के अलावा सहकारिता मंत्रालय देने पर भी हुई, की अमित शाह को सहकारिता मंत्रालय क्यों दिया गया शायद देश कम ही जानता होगा की गृहमंत्री अमित शाह गुजरात में सहकारी आंदोलन से जुड़े रहे हैं वह गुजरात में डायरेक्टर और जिला अध्यक्ष भी रहे हैं और सहकारिता मंत्री भी रहे हैं सहकारिता विभाग से उनका लंबा जुड़ाव रहा है और वह सहकारिता विभाग को अच्छे से जानते और समझते हैं इस अनुभव के कारण ही उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्रालय के अलावा सहकारिता विभाग का भी कार्य सौंपा है !
कद्दावर मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर करने से उस पर हो रही चर्चा के बाद मुख्यधारा का मीडिया दिनभर यह भी बताता रहा कि नए मंत्रिमंडल में वकील डॉक्टर इंजीनियर और ब्यूरोक्रेट्स कितने शामिल हुए हैं ऐसा लग रहा था जैसे पहली बार देश की सरकार में बड़ी तादाद में डॉक्टर इंजीनियर वकील और ब्यूरोक्रेट शामिल हुए हैं, तो याद दिला दूं आजादी के बाद जब देश में पहली सरकार बनी थी तब देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू स्वयं एक वकील थे और उनके मंत्रिमंडल में ज्यादातर मंत्री विश्व स्तर के जाने-माने विद्वान थे! 1985 में जब देश में राजीव गांधी के नेतृत्व में सरकार बनी थी उस समय संसद के भीतर सबसे अधिक पढ़े-लिखे सांसद थे ! उस समय राजीव गांधी ने युवा भारत सशक्त भारत का सपना देखा था और तकनीकी शिक्षा पर जोर देते हुए देश में कंप्यूटर शिक्षा का श्रीगणेश किया था राजीव गांधी का शिक्षा को लेकर ग्रामीण भारत मैं ड्रीम प्रोजेक्ट नवोदय विद्यालय का था जिसे राजीव गांधी ने योजना बना कर जमीन पर उतारा था ! गुरुकुल परंपरा के अनुसार नवोदय विद्यालय की आधारशिला रखी गई थी जो अभी भी जारी है ! मीडिया भूतकाल को भूला कर वर्तमान दिखाता है इसलिए नई पीढ़ी को अपना गौरवान्वित इतिहास याद नहीं रहता है !
![]() |
Devendra Yadav Sr. Journalist |
0 Comments:
Post a Comment
THANKS FOR COMMENTS