एस्पिरेंट, इलाहाबाद और जिंदगी
●Nikhil Sharma●
तो बात ऐसी है कि एक aspirant के सपने बहुत बड़े होते हैं और उनको पूरा करने के लिए सालों बीत जाते हैं छोटे से कमरे में और शायद इतने समय बाद कोई option नहीं बचता कि कोई option नहीं है| बड़ी मोटी होती है चमड़ी हमारी, सर्दी-गर्मी, भूख-प्यास, त्यौहार खुशियां इन सब का कोई असर नहीं होता हम पर।
नए रिश्ते बनते नहीं कि पुराने टूट जाते हैं, शायद आप AC कमरे में बैठने वालों के लिए life happening ना हो लेकिन with all due respect हम उन कमरों में अकेले तपते हैं|
8 बाई 10 का एक कमरा होता है हमारा और 3 बाई 6 की बेड। उसी रूम में हम एक किचन बना लेते हैं, एक स्टडी रूम बना लेते हैं और अगर दोस्त यार आ गए तो समय के साथ-साथ उसे हम गेस्ट रूम भी बना लेते हैं।
इस 8 बाई 10 के छोटे से महल में हम कुकर की सीटी के साथ और जगजीत साहब की ग़ज़ल के साथ सुर लगाते हैं।
हमारा कमरा एक राष्ट्र है जिसका राष्ट्रीय भोजन दाल भात चोखा और राष्ट्रीय पेय चाय होता है।
यहां के लोग ड्यूड ब्रो नहीं बोलते यहां के लोग बाबा बोलते हैं। हर एक बात पर– और बाबा कैसे हो मल्लब मोका बाबा भुला गए। हर बात में बाबा शब्द का प्रयोग हमेशा करते हैं।
यहां पर संगम जहां पर गंगा यमुना और सरस्वती का वास है वहां की बातें करते हैं आज भी संगम किनारे हर रोज खुलता है प्रेम ग्रंथ। कहीं किसी पेड़ के नीचे तो कहीं घाट पर पड़ा जा रहा होता है प्यार का पहला स्पर्श और खाई जा रही होती है झूठी जन्म जन्म साथ निभाने की कसमें तो किसी दूसरी ओर किनारे पर चिल्लाते जलाते भरी आंखों से गुस्से में फाड़ दिए जाते हैं यह प्रेम ग्रंथ।
बड़े हनुमान जी के दरबार में मंगलवार को भीड़ जुटी रहती है यहां बड़े हनुमान जी हैं वहां काफी भीड़ रहती है तो जिसकी सुबह दही जलेबी से होती है तो किसी राहत बहुत भूखे पेट सोने का नाम भी है।
इलाहाबाद में पेट और सर के बाल कब हाथ से निकल जाते हैं पता ही नहीं चलता। अरे यहां यह तक पता नहीं चलता कि कब हाथ से निकल गई प्रेमिका थाम किसी सरकारी नौकर का हाथ।
अरे यह इलाहाबाद है, बाबा! अरे यह इलाहाबाद है! बाबा सब जानता है सिवाय इसके कि कब होगा हमारा सिलेक्शन।
Baba Allahabadi aspirant ke life ko kya mast connect Kiya hai...... Well done Nick!
ReplyDeleteBaba Allahabadi aspirant ke life ko kya mast connect Kiya hai...... Well done Nick!
ReplyDelete