जाति जनगणना और ओबीसी आरक्षण पर उठते सवाल ?
Devendra Yadav
लगभग 240 वर्ष बाद देश में जातीय आधार पर जनगणना की बहस एक बार फिर से शुरू हो गई है ! देश में पहली बार 1881 मैं जाति जनगणना हुई थी उसके बाद 2021 में जातिगत जनगणना करने की बात शुरू हो गई है, जाति जनगणना होगी या नहीं यह अलग बात है लेकिन इस पर राजनीति और बहस शुरू हो गई है ! जातीय जनगणना को लेकर राजनैतिक गलियारों में हो रही बहस के अलावा ओबीसी को मेडिकल में आरक्षण देने पर भी बहस होने लगी है !
जातीय जनगणना को लेकर लगभग अधिकांश पार्टियां एक स्वर में नजर आ रही हैं तो वही ओबीसी को मेडिकल में आरक्षण देने को लेकर भाजपा सरकार पर राजनीति करने के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं ! ओबीसी आरक्षण को लेकर स्वर कुछ इस तरह सुनाई दे रहे हैं की सरकार मेडिकल में ही आरक्षण क्यों दे रही है सरकार को न्यायालय यूनिवर्सिटी वह अन्य सरकारी संस्थानों में भी आरक्षण देना चाहिए, स्वर उठ रहा है और सरकार पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं की देश के सर्वोच्च न्यायालय और प्रदेश न्यायालयों में कितने जज दलित ओबीसी और आदिवासी हैं देश की कितनी यूनिवर्सिटी में दलित ओबीसी और आदिवासी वाइस चांसलर और प्रोफेसर हैं, भा जा पा सरकार को इनमें भी आरक्षण देकर भर्ती करनी चाहिए ! भाजपा के नेता जाति जनगणना और आरक्षण को लेकर सामाजिक बदलाव और सामाजिक मजबूती की बात कर अन्य राजनैतिक दलों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आज तक किसी भी राजनीतिक दल ने दलित आदिवासी समुदाय से अपनी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया है जबकि भाजपा ने बंगारू लक्ष्मण को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था जो दलित थे !
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एक निजी चैनल पर जाति गत जनगणना की बहस मैं शिरकत करते हुए बार-बार यह बात दोहरा रहे थे की भाजपा ने दलित को भा जा पा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था जबकि अन्य दलों ने किसी दलित को अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया है भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता का इशारा कांग्रेस की तरफ था ! भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और देश की जनता को याद दिला दूं की आजाद भारत में कांग्रेस के 11 व् राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबू जगजीवन राम बने थे सन 1970 से लेकर 1972 तक बाबू जगजीवन राम कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे थे ! कांग्रेस के संदर्भ में अक्सर भाजपा की तरफ से यह बात भी सुनाई देती है कि आजादी के बाद से अब तक कांग्रेस पर गांधी परिवार का कब जा रहा है गांधी परिवार के अलावा कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष अन्य जाति समुदाय से नहीं बना है
जबकि सच्चाई यह है आजादी के बाद कांग्रेस के 19 अध्यक्ष बने जिसमें से 14 अध्यक्ष गांधी नेहरू परिवार से अलग थे गांधी परिवार के अब तक केवल 5 सदस्य कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे हैं जबकि बारी बारी से 14 लोग कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे ! राजनीतिक रूप से दलित आदिवासी पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को मजबूत करने के लिए राजीव गांधी ने पंचायत राज और निकाय चुनावों में आरक्षण देने की व्यवस्था की थी उस आरक्षण की बदौलत अब दलित आदिवासी ओबीसी और महिलाएं ग्राम प्रधान ब्लॉक प्रधान जिला प्रधान नगर पालिका चेयरमैन और महापौर के पदों पर पहुंच रहे हैं, जबकि आरक्षण से पहले गांव का सरपंच बनना दलित आदिवासी और ओबीसी के लिए केवल महज एक सपना था इस सपने को राजीव गांधी ने आरक्षण देकर पहली बार साकार किया था ! ऐसा नहीं है की 75 वर्ष में किसी भी राजनीतिक दल में दलित आदिवासी और पिछड़ी जाति के लोगों को बड़े राजनीतिक पदों से महफूज रखा कांग्रेस ने देश के केइ राज्यों में मुख्यमंत्री भी बनाए राजस्थान में जगन्नाथ पहाड़िया जो एक दलित नेता थे वह मुख्यमंत्री बने और अशोक गहलोत जो ओबीसी से आते हैं वह राजस्थान के तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं ! इसलिए यह कहना कि जातिगत जनगणना और ओबीसी आरक्षण से दबा कुचला समुदाय राजनीतिक रूप से मजबूत होगा राजनीतिक रूप से यह समुदाय पहले से मजबूत है और इसका उदाहरण बिहार में लालू प्रसाद यादव उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव अखिलेश यादव और मायावती है जिन्होंने अपने दम पर दोनों राज्यों में सरकार बनाई!
और यह तीनों नेता अपने-अपने राज्यों में एक बार नहीं कई बार सरकार बना कर मुख्यमंत्री रह चुके हैं ! इसलिए यह कहना कि जाति जनगणना और ओबीसी आरक्षण मिलने के बाद राजनीतिक रूप से यह समुदाय मजबूत होंगे यह राजनीतिक फायदा उठाने के लिए तो ठीक है लेकिन जमीनी हकीकत यह है की राजनीतिक रूप से इस समुदाय में पहले से अधिक जागृति आई है ! यदि उत्तर प्रदेश बिहार नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में क्षेत्रीय दलों की बात करें तो ज्यादातर क्षेत्रीय दल दलित ओबीसी और पिछड़ी जाति के नेताओं ने बनाकर खड़े किए हैं !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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