राजनीति: यह कैसा दौर है ? शक और भ्रम !
Devendra Yadav--
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार और तृणमूल कांग्रेस की लगातार तीसरी बार जीत ने देश की राजनीति ने एक ऐसे दोर को जन्म दिया है, जिसमें शक और भ्रम दोनों मौजूद हैं !
राजनीतिक रणनीति कार, प्रशांत किशोर की शरद पवार और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी के साथ हुई मुलाकातों के बाद शक और भ्रम का सिलसिला शुरू हुआ, जो अभी तक राजनीतिक गलियारों में गर्म आ रहा है ! क्योंकि प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सुश्री ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार थे और बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को लगातार तीसरी बार जीत मिली, इस चुनाव में पूरी दमखम लगाने के बाद भाजपा चुनाव हारी थी ! सुश्री ममता बनर्जी तीसरी बार मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद पहली बात दिल्ली पहुंची जहां उन्होंने विपक्ष के अनेक नेताओं से मुलाकाते की ! सबसे बड़ी मुलाकात उनकी श्रीमती सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ रही शक और भ्रम यह हुआ कि भाजपा के खिलाफ 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष तीसरा मोर्चा बनाएगा, राजनीतिक गलियारों में भ्रम फैला की सुश्री ममता बनर्जी की विपक्षी दलों के साथ मुलाकातें इस ओर इशारा करती हैं की वह तीसरा मोर्चा खड़ा करने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बात कर रही हैं !
जेल से निकलने के बाद लालू प्रसाद यादव अपने घर पहुंचे और घर से स्वस्थ होकर दिल्ली पहुंचे उनकी भी इस बीच मुलायम सिंह यादव और शरद यादव से मुलाकात हुई इन मुलाकातों को लेकर भी शक और भ्रम फैला भ्रम वही जो प्रशांत किशोर और शरद पवार से शुरू हुआ था भाजपा के खिलाफ थर्ड फ्रंट बनाने का ! राजनीतिक गलियारों में इस समय दो मुलाकातों पर अधिक चर्चा हो रही है और शक और भ्रम दोनों दिखाई दे रहे हैं एक प्रशांत किशोर और कांग्रेस को लेकर है शक किया जा रहा है कि प्रशांत किशोर चुनावी रणनीति के बाद एक बार फिर से राजनीति में स्थाई कदम रखने जा रहे हैं प्रशांत किशोर किसी भी समय कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं प्रशांत किशोर को लेकर भ्रम यह है कि प्रशांत किशोर को कांग्रेस में कोई बड़ी जिम्मेदारी चाहिए, अब सवाल यह है की कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी वाला पद क्या है और जिसे प्रशांत किशोर लेना चाहते हैं, बड़ा पद तो राष्ट्रीय अध्यक्ष का ही है जिसके चुनाव होने बाकी हैं एक कयास यह भी लग रहा है कि कांग्रेस पूर्ण कालीन अध्यक्ष के बावजूद कुछ कार्यकारी अध्यक्ष भी बना सकती है क्या प्रशांत किशोर की नजर कार्यकारी अध्यक्ष पर है यह केवल शक है ?
दूसरा सोमवार को कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल के जन्मदिन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि कपिल सिब्बल के जन्मदिन की पार्टी में देश के लगभग 40 नेता शरीक हुए, इन 40 नेताओं को पार्टी के नजरिए से देखे तो करीब 17 पार्टी कपिल सिब्बल की जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुई थी ! इस पार्टी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भ्रम फैला की 17 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने भाजपा के खिलाफ थर्ड फ्रंट बनाने पर चर्चा की, कपिल सिब्बल की जन्मदिन की पार्टी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि इस पार्टी में उन पार्टियों के कद्दावर नेताओं को भी देखा गया जो विपक्षी एकता के नाम पर आहूत पार्टियों में पहले कभी नजर नहीं आए थे, राजनीतिक गलियारों में शक यह किया जा रहा है कि कांग्रेस का आंतरिक कलह जन्मदिन पार्टी के बहाने एक बार फिर से नजर आने लगा है क्या ? और क्या जी 23 के नेता कांग्रेस हाईकमान को अपनी ताकत का एहसास करा रहे हैं क्या ? क्योंकि कपिल सिब्बल के जन्मदिन की पार्टी से पहले कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने दो बार विपक्ष के तमाम नेताओं को चाय और ब्रेकफास्ट पर बुलाया था और उन्होंने राजनीतिक पंडितों को एहसास कराया था कि राहुल गांधी विपक्ष को एकजुट करने में सक्षम है ! लेकिन राहुल गांधी की टी पार्टी के चंद दिनों बाद कपिल सिब्बल की जन्मदिन पार्टी ने शक और भ्रम पैदा कर दिया, भ्रम और शक इसलिए बड़ा है क्योंकि राहुल गांधी की टी पार्टी में विपक्षी दलों के सांसद शामिल हुए थे जबकि कपिल सिब्बल के जन्मदिन की पार्टी में 17 विपक्षी पार्टियों के प्रमुख नेता शामिल हुए थे और उनमें भी वह नेता भी थे जो अभी तक किसी भी पार्टी में नजर नहीं आए ! क्या ज़ी23 के नेता कांग्रेस हाईकमान को यह संदेश दे रहे हैं कि कांग्रेस के असली रणनीति का वही हैं ? कपिल सिब्बल की जन्मदिन पार्टी को लेकर चर्चा यह भी थी कि पार्टी में देश के तमाम विपक्षी दलों के नेता नजर आए मगर कपिल सिब्बल की पार्टी में गांधी परिवार का कोई भी सदस्य क्यों नजर नहीं आया ! लोकसभा के आम चुनाव होने में अभी लगभग 2 साल का समय बाकी है , राजनीतिक गलियारों में हमें अभी ना जाने कितने शक और भ्रम के दौर से गुजरना होगा ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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