मानसून सत्र का अंतिम दिन क्या बयां करता है?
-Devendra Yadav-
11 अगस्त को लोकसभा का सत्र समय से पहले अनिश्चित काल तक के लिए स्थगित कर दिया गया है ! इस बार संसद का सत्र कोरोना महामारी के आहा कार को देखते हुए स्थगित नहीं किया गया बल्कि पेगासस मामले को लेकर संसद में विपक्ष के द्वारा मचाए जा रहे हंगामे के कारण शायद लोकसभा सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया है ? मानसून के शुरू होते ही विपक्ष पेगासस मामले पर संसद में बहस और इसकी जांच कराने की मांग कर रहा था इस बीच संसद के भीतर और बाहर विपक्षी दल पेगासस मामले को लेकर विरोध करते हुए नजर आए! संसद के भीतर विपक्ष का हंगामा इतना जोरदार था कि संसद सुचारू रूप से नहीं चल पा रही थी ! 17 दिन में केवल 21 घंटे ही कार्य हुआ ! विपक्ष के हंगामे के कारण संसद में महत्वपूर्ण कार्य नहीं हो पा रहे थे यह आरोप सत्ता पक्ष की तरफ से विपक्ष पर लगाए जा रहे थे !
संसद सत्र को स्थगित करने से पहले वह नजारा भी देखने को मिला, काश यह नजारा पूरे संसद के सत्र में देखने को मिलता ?
संसद सत्र स्थगित करने की घोषणा होने से पहले ओबीसी बिल को सारे विपक्ष और सत्ता पक्ष ने समवेत स्वर में संसद के भीतर पास करवाया, ऐसा नजारा संसद में अन्य बीलो के पास होने के पास होने पर नहीं दिखाई दिया एकता की जगह हंगामा होते सुनाई दिया !
संसद के लोकसभा सत्र की समाप्ति के बाद एक झांकी ऐसी भी नजर आई, जिसे देखकर मुख से काश शब्द निकल आया !
झांकी ऐसी थी जैसे, संसद का कार्य सुचारू रूप से चला और सारे काम निपटाने के बाद संसद का सत्र समाप्त हुआ !
लोकसभा अध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह सहित कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी सहित तमाम विपक्ष एक साथ बैठा हुआ नजर आया ! लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं से कहा कि आने वाला सत्र सुचारू रूप से चले, लेकिन काश शब्द अभी भी मुंह में अटका हुआ है क्या संसद के भीतर जब गतिरोध चल रहा था और हंगामा मच रहा था तब ऐसी झांकी दिखाई देनी थी या नहीं ? लोकसभा अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह यूपीए चेयर पर्सन श्रीमती सोनिया गांधी और विपक्ष के नेताओं को एक साथ बिठाकर समझा सकते थे की संसद का सत्र सुचारू रूप से चले जो बात लोकसभा अध्यक्ष ने अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सोनिया गांधी सहित तमाम विपक्ष के नेताओं से कहीं थी वह बात लोकसभा अध्यक्ष संसद सत्र के समय भी उन नेताओं को बुलाकर कह सकते थे ? पूर्ववर्ती सरकारों के समय ऐसे नजारे अनेक बार देखे गए हैं जब संसद के भीतर गतिरोध और विवाद होता था तब, ऐसी ही झांकियां निकल कर आती थी ! अंतिम दिन संसद के भीतर और संसद के बाहर जो देखा काश ऐसा नजारा संसद के सत्र में पूरे समय देखने को मिलता तो संसद का सत्र समय से पहले स्थगित नहीं होता ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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