क्या कांग्रेस की माली हालत ठीक नहीं है?
-Devendra Yadav-
देश आजादी की 75 वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा था उसी समय देश की सबसे पुरानी और देश पर सबसे अधिक समय राज करने वाली कांग्रेस पार्टी की तरफ से खबर आई कि कांग्रेस की माली हालत ठीक नहीं है ! कांग्रेस ने अपने खर्चों में कटौती करने का निर्णय लिया है ! इस खबर से राजनीतिक गलियारा अचंभित हो उठा और कांग्रेस पर सवाल उठने लगे, देश पर लंबे समय तक शासन करने वाली कॉन्ग्रेस की मात्र 7 साल में सत्ता से बाहर रहते हुए कैसे इतनी माली हालत खराब हो गई ! कांग्रेस की आर्थिक तंगी का एक कारण चंदा नहीं के बराबर मिलना है! सवाल उठता है कि क्या औद्योगिक घरानों को कांग्रेस पर भरोसा नहीं रहा की कॉन्ग्रेस केंद्र की सत्ता में फिर से वापसी करेगी, क्योंकि कॉन्ग्रेस एक के बाद एक लगातार दो लोकसभा के चुनाव हार चुकी है, और कांग्रेस की हार भी सामान्य नहीं हो चिंताजनक है क्योंकि कांग्रेस के पास लोकसभा में इतने सांसद भी नहीं हैं की उन्हें विपक्ष के नेता का दर्जा मिले ! क्या औद्योगिक घरानों पर सत्ता पक्ष का दबाव है ? क्योंकि पिछले 7 साल में भाजपा को बड़ी मात्रा में चंदा मिला भाजपा मालामाल हुई जबकि कांग्रेस के कंगाल होने के समाचार सुनने को मिल रहे हैं! सवाल यह भी है कि कॉन्ग्रेस में बड़ी कतार उन नेताओं की है जिन्होंने कांग्रेस में रहते हुए दशकों तक राज किया है, और आज भी वह नेता कांग्रेस के भीतर बड़ी जिम्मेदारी लेने के लिए हाईकमान पर दबाव बनाते हुए दिखाई दे रहे हैं क्या हाईकमान उन नेताओं को कांग्रेस की माली हालत सुधारने की बड़ी जिम्मेदारी देगी ?
देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी जिम्मेदारी को लेकर लंबे समय से आंतरिक कलह, चल रहा है, क्या हाईकमान बड़ी जिम्मेदारी की मांग करने वाले नेताओं को कांग्रेस की माली हालत ठीक करने की जिम्मेदारी देगी !
कॉन्ग्रेस के जी23 के नेता कांग्रेस की राजनीतिक बदहाली पर चिंता करते हुए क्या कांग्रेस की माली हालत पर भी चिंता करेंगे ? क्योंकि जी-23 के नेताओं ने ही सबसे ज्यादा कॉन्ग्रेस की सत्ता का मजा उठाया है ! कांग्रेस की राजस्थान छत्तीसगढ़ और पंजाब में अपनी सरकार है और महाराष्ट्र और झारखंड में कांग्रेस गठबंधन के साथ सरकार में है ! पंजाब में 6 महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं, पंजाब को लेकर शायद कांग्रेस को आर्थिक चिंता कम होगी क्योंकि पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह है कैप्टन आर्थिक स्थिति को संभाल लेंगे लेकिन सबसे बड़ा चुनाव 6 महीने बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा का है, लगभग तीन दशक से कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में सत्ता के इर्द-गिर्द भी दिखाई नहीं दे रही है, जबकि भाजपा लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रही है ऐसे में कांग्रेस की आर्थिक मंदी के चलते कांग्रेस भाजपा को कैसे चुनौती देगी यह सवाल खड़ा हो गया है जबकि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव श्रीमती प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति को बेहतर कर सत्ता में लाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही हैं !
उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव की भी तैयारियां शुरू हो जाएंगी, क्योंकि देश का चुनाव है इसलिए इस चुनाव में अर्थ की अधिक जरूरत होगी, सवाल यह भी है कि क्या कांग्रेस देश के आम चुनाव से पहले अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर लेगी लेकिन सवाल है कैसे, सवाल का उत्तर उन नेताओं पर आकर टिक जाता है जिन नेताओं ने दशकों तक कांग्रेस सत्ता की मलाई खाई है वही नेता मौजूदा वक्त में कॉन्ग्रेस की आर्थिक तंगी को दूर कर सकते हैं ! क्या वह नेता कांग्रेस की आर्थिक तंगी को दूर करने के लिए आगे आएंगे ? यह सवाल इसलिए भी है क्योंकि पार्टी ने जिन मदों में कटौती करने की घोषणा की है उनमें से एक यह भी है कि पार्टी महासचिव हवाई यात्रा की जगह रेल यात्रा करें उनके भत्ते में भी कटौती की जा रही है सवाल यह है कि जो नेता पार्टी के कार्यों के लिए पार्टी से किराया और भत्ता वसूल रहा है क्या वह कांग्रेस की आर्थिक तंगी को अपना सहयोग कर दूर कर सकता है ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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