कॉन्ग्रेस की सुष्मिता देव का यूंं कांग्रेस को छोड़ना
-Devendra Yadav-
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुष्मिता देव ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है, खबर बड़ी है मगर आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि सुष्मिता देव से पहले अनेक ऐसे नेताओं ने भी कांग्रेस को छोड़ा है जो कांग्रेस के भीतर जिम्मेदारी वाले पदों पर थे !
आश्चर्य तो इस बात पर है की कांग्रेस के बुरे वक्त में जिन नेताओं ने कांग्रेस का साथ छोड़ा है वह युवा नेता ऐसे परिवार से हैं जिनके पिताश्री ने कांग्रेस को संजोया था कांग्रेस को मजबूत किया था लेकिन कांग्रेस के बुरे वक्त में उन नेताओं के पुत्रों ने कांग्रेस को बुरे वक्त में मजबूत करने की जगह कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस को कमजोर किया है !
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी रीता बहुगुणा ज्योतिरादित्य सिंधिया जतिन प्रसाद और अब सुष्मिता देव यह वह युवा नेता हैं जिनके पिता स्वर्गवासी होने तक कांग्रेस को मजबूत करते रहें बुरे वक्त में उन नेताओं ने कभी कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस को बुरे वक्त में मजबूत किया और केंद्र की सत्ता में वापसी करवाई ! वाईएसआर रेड्डी हेमवती नंदन बहुगुणा माधवराव सिंधिया संतोष मोहन देव जैसे कद्दावर नेताओं ने बुरे वक्त में भी कांग्रेस को ताकत दी !
सुष्मिता देव के पिता स्वर्गीय संतोष मोहन देव नॉर्थ ईस्ट मैं कांग्रेस के कद्दावर नेता थे वह न केवल असम में बल्कि त्रिपुरा में भी अपना प्रभाव रखते थे !
संतोष मोहन देव सात बार लोकसभा के सदस्य रहे वह 5 बार असम राज्य से और दो बार त्रिपुरा राज्य से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए !
1980 में पहली बार लोकसभा सदस्य बने और 1986 में राजीव गांधी ने उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया वह देश के गृह राज्य मंत्री भी रहे ! संतोष मोहन देव की पुत्री सुष्मिता देव भी उनकी पारंपरिक सीट से एक बार सांसद बनी कांग्रेस ने उन्हें उचित सम्मान भी दिया उन्हें महिला कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया, मगर राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ा जबकि यह समय कांग्रेस में रहते हुए संघर्ष करने का था और अपने आप को देश की महिलाओं के सामने साबित करना था की वह महिलाओं के हक में संघर्ष कर रही है क्योंकि इस समय देश में महिलाएं संघर्ष करती हुई नजर आ रही है ! सुष्मिता देव के कांग्रेस छोड़ने के बाद चर्चा यह है कि वह तृणमूल कांग्रेस में शामिल होंगी, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सुष्मिता देव असम या त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस का चेहरा होंगी, लेकिन सवाल यह है कि असम में हाल ही के महीनों में विधानसभा के चुनाव निपटे हैं अब असम में चुनाव 5 साल बाद होंगे और लोकसभा के चुनाव में भी अभी 2 वर्ष का समय बाकी है, सवाल यह है कि क्या सुष्मिता देव भविष्य के विधानसभा चुनाव मैं तृणमूल कांग्रेस का चेहरा होंगी उसके लिए उन्हें असम में 5 साल तक मेहनत करनी होगी ? क्योंकि असम में तृणमूल कांग्रेस का ना तो वजूद है और ना ही केडर सुष्मिता देव को दोनों ही बनाने होंगे !, सवाल है कि क्या सुष्मिता देव सुश्री ममता बनर्जी और जगन मोहन रेड्डी के पद चिन्हों पर चलते हुए कांग्रेस से अलग होकर भविष्य में असम की मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं ?
यदि सुष्मिता देव का राजनीतिक इरादा यह है तो उन्हें यह भी याद करना होगा की सुश्री ममता बनर्जी और जगनमोहन रेड्डी ने कांग्रेस का दामन छोड़ने के बाद किसी अन्य पार्टी का दामन नहीं था मा था बल्कि बनर्जी और रेडी ने अपनी अलग पार्टी खड़ी की थी और उसके बाद मैं दोनों नेता राज्य की सत्ता पर काबीज हुए थे! कुल मिलाकर सवाल यह है कि कांग्रेस को उसके आम कार्यकर्ताओं ने कभी कमजोर नहीं किया कांग्रेस को कमजोर उन नेताओं ने किया है जो अपने पिता की दम पर कांग्रेस की राजनीति में आए अवसर मिला उसे कांग्रेस में रहते हुए भूनाया और जब कांग्रेस का बुरा वक्त आया तब वह नेता एक नए अवसर की तलाश में कांग्रेस को छोड़कर निकल पड़े !
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
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