पश्चिम बंगाल के बाद त्रिपुरा में खेला होवे की तैयारी कर ली है क्या ममता बनर्जी ने ?
-Devendra Yadav
असम और त्रिपुरा मैं भाजपा के जीत के रथ को सुश्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हरा कर रोका था ! भाजपा असम और त्रिपुरा में पहली बार अपनी सरकार बनाने के बाद उत्साहित थी, भाजपा के रणनीतिकार उम्मीद कर रहे थे कि भाजपा असम और त्रिपुरा की तरह पश्चिम बंगाल में भी पहली बार भाजपा की सरकार बना लेंगे लेकिन लाख कोशिश करने के बाद भी भाजपा पश्चिम बंगाल को नहीं जीत पाई, पश्चिम बंगाल में लगातार तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई !
भाजपा के विजय रथ को पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने रोका अब तृणमूल कांग्रेस अपने विजय रथ को त्रिपुरा ले जाने की तैयारी करने में जुट गई है क्या, और क्या तृणमूल कांग्रेस त्रिपुरा में भी पश्चिम बंगाल की तर्ज पर भाजपा को हराकर खेला करेगी, यह अभी बड़ा सवाल है लेकिन कांग्रेस छोड़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुई पूर्व सांसद सुष्मिता देव ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू कर दी है की तृणमूल कांग्रेस त्रिपुरा में भी खेला करने की तैयारी में लग गई है !
60 सीटों वाली त्रिपुरा विधानसभा में 38 सीट लेकर भा जा पा सत्ता में है ! पश्चिम बंगाल की तरह त्रिपुरा भी वामदलों का गढ़ रहा है ! वर्तमान विधानसभा मैं सीपीआईएम के 17 विधायक हैं, पश्चिम बंगाल की तरह त्रिपुरा में भी कांग्रेस का एक भी विधायक नहीं है ! असम त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल मैं कांग्रेस अधिक मजबूत नहीं है बल्कि कमजोर है, वही वामदल भी ज्यादा मजबूत नहीं है ऐसे में पश्चिम बंगाल की तरह त्रिपुरा में तृणमूल कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में खेला करेगी क्या? यह सवाल खड़ा हो गया है !
क्या सुष्मिता देव भा जा पा के मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव के विकल्प बनेगी? क्या सुष्मिता देव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा होगी ? और क्या त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस गठबंधन कर भाजपा को लगातार दूसरी बार सरकार बनाने से रोकेंगे ? यह अभी बड़े सवाल हैं मगर इन सवालों को जन्म दिया है सुष्मिता देव के अचानक कांग्रेस छोड़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने पर ! सुष्मिता देव के कांग्रेस छोड़ने पर कांग्रेस की तरफ से ज्यादा गंभीर प्रतिक्रिया नहीं हुई वही सुष्मिता देव ने भी तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन करने के बाद प्रेस के सामने कांग्रेस छोड़ने की ना तो कोई वजह बताई और ना ही कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए बल्कि सुष्मिता देव ने यह कहा कि कांग्रेस ने उन्हें सम्मानजनक पदों पर रखा और वह सांसद भी बनी ! जबकि पूर्व में रीता बहुगुणा ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन प्रसाद ने कांग्रेस छोडी थी तब गंभीर प्रतिक्रिया दी थी कांग्रेस और नेतृत्व पर गंभीर आरोप भी लगाए थे लेकिन सुष्मिता देव ने हाईकमान की तारीफ की ! इससे सवाल उठते हैं कि क्या सुष्मिता देव का कांग्रेस छोड़ना और तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस की आगामी विधानसभा चुनाव में त्रिपुरा में भाजपा को रोकने के लिए राजनैतिक रणनीति है ? त्रिपुरा में भले ही कांग्रेस का प्रभाव कम है लेकिन त्रिपुरा में कांग्रेस के स्वर्गीय नेता सुष्मिता देव के पिता श्री संतोष मोहन देव का बड़ा प्रभाव है संतोष मोहन देव ने त्रिपुरा में विकास के अनेक कार्य किए थे क्या सुष्मिता देव अपने पिताश्री संतोष मोहन देव की विरासत को समेटने में सफल होंगी, इसका अभी इंतजार करना होगा ?
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