पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम, क्या राज्य सरकारों के टैक्स घटाने से दाम घट जाएंगे ?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेलों के घटते दाम और देश में डीजल और पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर इन दिनों काफी चर्चा हो रही है ! प्रमुख विपक्षी दल कॉन्ग्रेस भाजपा सरकार को डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर घेर रहा है, वही सत्ता पक्ष के नेता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को कांग्रेस सरकार की गलत नीतियां बता कर अपनी सफाई दे रहे हैं ! सत्ता पक्ष और विपक्ष के द्वारा टीवी चैनलों पर हो रही बहस से एक सवाल यह भी निकलकर जनता के बीच आ रहा है कि केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा पेट्रोल और डीजल पर लिए जा रहे भारी टैक्स के कारण डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ रही हैं!
अब सवाल उठता है कि क्या केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर लिए जा रहे टैक्स में यदि कटौती कर दें तो क्या डीजल और पेट्रोल की कीमत घट जाएगी और क्या यह कीमतें हमेशा हमेशा के लिए स्थिर रहेंगी या फिर यह कुछ समय का जनता को राहत देने का समाधान है ?
सवाल यह भी खड़ा हो रहा है की पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें भी कोरोना महामारी की तरह केंद्र और राज्यों के बीच उलझ कर रह गया है क्या क्योंकि जब भी बढ़ती हुई कीमतों की जनता के बीच से आवाज उठती है तब विपक्ष के नेता आवाज उठाते हैं कि तेल की कीमत केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बढ़ रही है वही सत्ता पक्ष के नेता कहते हैं कि राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर टैक्स वसूल रही हैं इसलिए तेल की कीमतें बढ़ रही हैं यदि राज्य सरकार टैक्स वसूलना कम कर दे तो तेल की कीमतें घट जाएंगी ! देश में अधिकांश राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं तो वही कई राज्यों में कांग्रेस की भी सरकारें हैं अन्य दल भी विभिन्न राज्यों में सरकार में हैं, ऐसे में दोषी कौन है क्या देश की जनता कोरोना महामारी की तरह केंद्र और राज्य के बीच पिसती रहेगी क्या ?
बड़ा सवाल यह है कि तेल की कीमतें राज्य सरकार निर्धारित नहीं करती हैं बल्कि तेल की कीमतें देश की प्रमुख तेल कंपनियां करती हैं जो केंद्र सरकार के अधीन आती हैं, ऐसे में यदि राज्य सरकारें अपना टैक्स कम भी कर देंगे तो क्या तेल की कीमतें स्थाई रूप से स्थिर हो जाएंगी और क्या फिर तेल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी यह सबसे बड़ा सवाल है, यह सवाल इसलिए है क्योंकि अनेक बार विभिन्न राज्यों ने समय-समय पर डीजल और पेट्रोल से अपना टैक्स घटाया है, टैक्स घटने के बाद भी कुछ समय बाद तेल की कीमतें बढ़ती हुई नजर आई ! क्योंकि राज्य सरकारों ने अपने टैक्स को घटाया मगर पेट्रोलियम कंपनियों ने अपनी कीमत को नहीं घटाया पेट्रोलियम कंपनियां निरंतर तेल की कीमतें बढ़ाती रही इस कारण राज्य सरकारों ने जो टैक्स घटाया था उसका लाभ जनता को चंद दिनों मिला उसके बाद पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने से राज्य सरकारों के द्वारा घटाए गए टैक्स का स्थाई फायदा जनता को होता नहीं दिखाई दिया ! विगत दिनों देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए तब चुनाव संपन्न होने तक पेट्रोल के दामों में किसी भी प्रकार का इजाफा नहीं हुआ लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद में कीमतों का बढ़ना शुरू हो गया ! ऐसे में तेल की कीमतें राज्य सरकारों के द्वारा लिए जा रहे हैं टेक्स् के कारण अधिक नहीं पड़ रही है बल्कि पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा रोज-रोज कीमतें बढ़ाए जाने के कारण बढ़ रही हैं क्या ?
क्या महंगे तेल का समाधान केंद्र और पेट्रोलियम कंपनियों के हाथ में है ? और क्या समाधान होगा इसका हमें इंतजार करना होगा ?
●देवेंद्र यादव●Kota Rajasthan
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