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Saturday, August 28, 2021

8/28/2021 11:29:00 AM

राज्यों के विवाद ! कांग्रेस हाईकमान की लाचारी या कमजोरी ?

●Devendra Yadav●



पंजाब छत्तीसगढ़ और राजस्थान मैं कॉन्ग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद को देखकर ना केवल कांग्रेस कार्यकर्ता ही दुखी है बल्कि लोग भी चिंतित हैं लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी जिसने देश की सत्ता पर सबसे ज्यादा समय तक राज किया हो उस पार्टी में केंद्र की सत्ता से बाहर रहने के मात्र 7 साल में इतना बड़ा कलह देखने को मिलेगा ऐसा कभी सोचा नहीं था ? 

ऐसा भी नहीं है की कॉन्ग्रेस पहली बार केंद्र की सत्ता से बाहर रही है इससे पहले भी कॉन्ग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर रही है और कांग्रेस के भीतर विवाद भी रहा है ! जहां तक राज्य में नेतृत्व के विवादों की बात करें तो राज्यों में पहले भी विवाद देखे गए हैं ! राजीव गांधी युग में राजस्थान मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव के अंतिम समय में मुख्यमंत्री बदलते हुए देखे गए हैं ! उस समय मुख्यधारा का मीडिया और सोशल मीडिया प्रभावी नहीं था, आज न्यूज़ चैनल और सोशल मीडिया अधिक प्रभावशाली हैं इसलिए खबरें जनता तक तुरंत पहुंच जाती है, और पता चल जाता है कि राजनीतिक पार्टियों में अंदर खाने क्या क्या चल रहा है !

सवाल संचार प्रसारण का नहीं है बल्कि सवाल यह है की देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस आज कमजोर क्यों दिखाई दे रही है ?

क्या कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर है इसलिए क्या कॉन्ग्रेस के सामने आर्थिक तंगी है इसलिए क्या कांग्रेस के पास मजबूत रणनीतिकार का अभाव है इसलिए और क्या कांग्रेस टीम मैं बटी हुई है इसलिए ? पार्टी हाईकमान लाचार है या फिर मजबूर है ? इस पर ऊपर लिखें पॉइंट पर विश्लेषण करने से समझा जा सकता है ! क्योंकि विगत 7 वर्षों से कॉन्ग्रेस सत्ता में नहीं है, और कांग्रेस के नेताओं को सत्ता से बाहर रहने की शायद आदत भी नहीं है क्योंकि कांग्रेस के भीतर आज जो प्रमुख नेता मौजूद हैं उन नेताओं ने ही दशकों तक कांग्रेस की सत्ता और संगठन दोनों पर राज किया है, मगर आज केंद्र की सत्ता कांग्रेस के पास नहीं है केवल संगठन है, और संगठन में इतने पद भी नहीं हैं की सारे नेताओं को संगठन के पदों पर बैठाया जाए फिर भी हाईकमान में कोशिश की और कई प्रदेशों में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा 4 -4 कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाएं ! कांग्रेस केंद्र की सत्ता से बाहर होने के कारण उसे राजनीतिक चंदा भी कम मिल रहा है इसलिए उसके सामने आर्थिक संकट भी आ गया है, लेकिन आर्थिक संकट का कारण केवल चंदा मिलना ही नहीं है बल्कि एक कारण यह भी है की जिन नेताओं ने लंबे समय तक कांग्रेस की सत्ता पर राज किया है वह नेता भी शायद कांग्रेस के बुरे वक्त में आर्थिक मदद करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं, जो नेता मदद कर रहे हैं उन्हें सत्ता चाहिए जिसका वह भोग भी कर रहे हैं ! पंजाब राजस्थान और छत्तीसगढ़ को लेकर पार्टी हाईकमान के सामने सबसे बड़ी मजबूरी या फिर लाचारी यही है क्योंकि इन तीनों ही राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, कांग्रेस को बड़ी आर्थिक मदद इन तीनों ही राज्यों से मिलने की उम्मीद है ऐसे में नेतृत्व कैसे बदला जाए शायद हाईकमान के सामने यह एक मजबूरी है ?

कांग्रेस के भीतर टीम सोनिया गांधी टीम राहुल गांधी और टीम प्रियंका गांधी का भी खूब प्रचार होता देखा जा रहा है, उम्र दराज नेता तीन सोनिया गांधी के सदस्य माने जाते हैं जबकि अधिकांश युवा नेता टीम राहुल गांधी और टीम प्रियंका गांधी के सदस्य माने जाते हैं राज्यों में जो विवाद देखा जा रहा है उस विवाद में टीम का बड़ा महत्व है ! राज्यों में उम्र दराज और युवाओं के बीच में ही नेतृत्व को लेकर तकरार है !

पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी अध्यक्ष बनाना टीम राहुल और टीम प्रियंका का योगदान है लेकिन श्रीमती सोनिया गांधी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा का चुनाव लड़ने की बात कह कर टीम राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के सदस्य समझे जाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू नाराज हो गए और यह कह बैठे की यदि उनकी बात नहीं मानी गई तो वह ईट से ईट बजा देंगे, सिद्धू का यह बयान चौंकाने वाला है ! कांग्रेस के भीतर डैमेज कंट्रोल करने के लिए रणनीतिकारों की एक मजबूत टीम हुआ करती थी ! आरके धवन वी जॉर्ज और अहमद पटेल जैसे राजनीतिक रणनीतिकारों का स्पष्ट अभाव देखा जा रहा है कांग्रेस के पास गुलाम नबी आजाद मुकुल वासनिक जैसे अनुभवी रणनीतिकारों की भी टीम हुआ करती थी जिन्हें राज्यों के विवादों के निपटारे के लिए भेजा जाता था लेकिन मौजूदा वक्त में वैसी टीम भी अब नजर नहीं आ रही है !

 6 महीने बाद देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं 2022 से लेकर 23 मैं राज्य दर राज्य विधानसभा के चुनाव हैं और उसके बाद 2024 में आम चुनाव है ऐसे में कांग्रेस क्या करेगी यह देखना वाली बात है ?

 

Devendra Yadav
Sr. Journalist

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