संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह भी हंगामे की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है ?
●Devendra Yadav●
संसद के मानसून सत्र को शुरू हुए लगभग 3 सप्ताह होने जा रहे हैं ? पेगासस जासूसी प्रकरण को लेकर विपक्ष का सत्ता पक्ष पर संसद के अंदर जो हमला हुआ वह हमला हंगामे के रूप में अभी तक जारी है ! सत्ता पक्ष के नेता विपक्ष पर संसद को नहीं चलने देने का आरोप लगा रहे हैं तो वहीं विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर आरोप लगा रहा है कि सरकार जानबूझकर पेगासस प्रकरण पर बहस नहीं कराना चाहती है !
सोमवार 2 अगस्त को भाजपा नीत केंद्र सरकार के प्रमुख घटक जेडीयू नेता बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पेगासस मामले में बयान देकर देश की राजनीति को गरमा दिया है ! पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए नीतीश कुमार ने संसद में पेगासस मामले पर बहस कराने और इसकी जांच कराने की बात कही, उनके इस बयान से सत्ता पक्ष भाजपा को बड़ा राजनीतिक झटका लगा क्योंकि भाजपा अभी तक विपक्ष पर आरोप लगा रही है कि विपक्ष संसद को नहीं चलने दे रहा है, भाजपा सरकार में शामिल प्रमुख घटक के नेता के बयान से विपक्ष को राजनीतिक ताकत मिलती हुई दिखाई दे रही है !
विपक्ष भा जा पा के आरोपों पर पलटवार कर कह सकता है कि भाजपा सरकार में शामिल दल भी संसद के भीतर पेगासस जासूसी प्रकरण पर बहस और जांच चाहते हैं मगर सरकार बहस और जांच कराने से भाग रही है ! कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर से सारे विपक्ष को एकजुट करने के लिए मंगलवार 3 अगस्त को भोजन पर बुलाया है इससे पहले राहुल गांधी ने सारे विपक्ष को चाय पर बुलाया था और पेगासस जासूसी प्रकरण पर भाजपा सरकार को कैसे घेरा जाए इस पर रणनीति बनाई थी अब राहुल गांधी ने सारे विपक्ष को भोजन पर बुलाया है ! मंगलवार 3 अगस्त को विपक्ष क्या रणनीति बनाएगा यह तो चंद घंटों बाद पता चलेगा लेकिन चर्चा यह है कि विपक्ष संसद के बाहर एक और संसद चलाकर अपना विरोध जत आएगा ज्ञात रहे दिल्ली के जंतर मंतर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने भी अपनी संसद लगा रखी है, देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ संसद से बाहर अपनी संसद लगाकर बैठे हैं यदि विपक्ष भी यह रास्ता अपनाता है तो यह एक बड़ा इतिहास होगा !
हंगामा के शोर के चलते संसद के भीतर महत्वपूर्ण कार्य ठीक है नहीं हो पा रहे हैं, जनता के करोड़ों रुपया व्यर्थ में खर्च हो रहे हैं यह सर भी संसद के ठीक से नहीं चलने के कारण देश में सुनाई दे रहे हैं ! लेकिन सवाल यह भी है कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सारे विपक्ष को एकजुट करने के लिए भोजन पर बुला सकते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों नहीं सारे राजनीतिक दलों को भोजन पर बुलाकर यह कहे कि सब मिलकर सुचारू रूप से संसद को चलाएं !
इतिहास गवाह है जब भी संसद के भीतर गतिरोध पैदा होता है तब सत्ता पक्ष सारे दलों से मिलकर गतिरोध को समाप्त करने की पैरवी करता रहा है और गतिरोध का समाधान भी हुआ है ! पूर्व वर्ती सरकारों के कार्यकाल में भी इस तरह के हंगामे होते रहे हैं और सरकारों ने हंगामा को शांत भी किया है विपक्षी दलों के नेताओं से बात कर क्या सरकार को विपक्षी दलों के नेताओं को बुलाकर बात नहीं करनी चाहिए यह एक बड़ा सवाल है इसके जवाब का इंतजार करना होगा ?
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Devendra Yadav Sr. Journalist |
Ultimate analysis
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