क्या जल और जंगल मैं सुरक्षित नहीं है जानवर ? और क्यों जल और जंगल से निकलकर के शहर में विचरण करते हुए दिखाई दे रहे हैं ?
●Devendra Yadav●
देश के किसी ना किसी शहर से अक्सर यह समाचार आ ही जाता है की फला शहर में पैंथर घुसा और फला शहर की गलियों में मगरमच्छ विचरण करता हुआ दिखाई दिया ! आखिर जल और जंगल दोनों से निकलकर शहरों में विचरण करते हुए क्यों दिखाई दे रहे हैं जानवर ? जंगल की बात समझ में आती है की जंगलों का तेजी के साथ दोहन हो रहा है इसलिए जंगली जानवर जंगलों की जगह शहरों में भी दिखाई देते हैं कुछ इसी तरह नदियों का भी दोहन हो रहा है इसलिए मगरमच्छ घड़ियाल जैसे जानवर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस आते हैं ! जंगल और नदियों का दोहन रुकने का नाम नहीं ले रहा है, अभी भी नदियों से रेती का दोहन देखा जा सकता है ! मगरमच्छ और घड़ियाल सरकार के द्वारा घोषित सेंचुरी में आमजन को दिखाई दे या नहीं मगर मगरमच्छ और घड़ियाल को अक्सर जनता अपने द्वार पर विचरण करते हुए देख ही लेती है! इसी तरह हिरण बारहसिंघा जैसे जंगली जानवरों ने तो कंक्रीट के जंगल को ही मानो अपना घर बना लिया है, इसकी एक मिसाल शिक्षा नगरी कोटा में देखी जा सकती है कई सालों से जंगल से निकलकर बारहसिंघा आबादी वाले क्षेत्र में घूमता देखा जा सकता है! खास बात यह है की लोग बारहसिंघा का पूरा ध्यान सकते हैं भीम मंडी सरकारी अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉक्टर सुधीर उपाध्याय समय समय पर इसका मेडिकल चेकअप भी करते हैं, इस बारहसिंघा को पिछले 10 वर्षों से इसी तरह देखा जा रहा है
बारहसिंघा का कॉन्फिडेंस कितना लाजवाब है, वह जंगल में सुरक्षित रह पाता या नहीं लेकिन कंक्रीट के जंगल में वह सुरक्षित भी है और लोग उसका विशेष ध्यान भी रखते हैं वैसे राजस्थान हिरणों के मामले में काफी संवेदनशील है इसे बॉलीवुड फिल्म स्टार सलमान खान से ज्यादा कौन जानता होगा की राजस्थान के लोग जंगली जानवरों से कितना प्रेम करते हैं खासकर हिरण से !
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