" देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां "
भाजपा और कांग्रेस राजनीतिक रणनीति या मजबूरी ?
◆ Devendra Yadav ◆
सितंबर का महीना, राजनीतिक दृष्टि से मौजूदा भारतीय राजनीति में अहम महीना रहा है !
इसलिए क्योंकि देश की दो प्रमुख पार्टियां भा ज पा और कांग्रेस, ने अपनी अपनी पार्टियों के राजनैतिक भविष्य की चिंता करते हुए, गुजरात और पंजाब में चौका देने वाले फैसले किए !
यह राजनीतिक फैसले दोनों बड़ी पार्टियों की राजनैतिक रणनीति थी या फिर आंतरिक मजबूरी ?
इन दोनों ही पार्टियों का अपने-अपने राज्यों में जहां उनकी पार्टी की सरकार है, वहां उन पार्टियों का मास्टर स्ट्रोक था जा फिर केवल स्ट्रोक था, क्या दोनों ही पार्टियां अपने-अपने राज्यों में पार्टी के भीतर अंतर कलह को लेकर सदमे में थी और अपनी-अपनी पार्टियों की भविष्य की चिंता कर रही थी, और इसीलिए भाजपा और कांग्रेस ने गुजरात और पंजाब मैं अपने अपने मुख्यमंत्री बदलने का काम किया ! भले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह हो रही है कि गुजरात और पंजाब में भा ज पा और कॉन्ग्रेस ने मास्टर स्ट्रोक लगाया है, मगर दोनों ही राज्यों में बदले गए मुख्यमंत्री के चेहरों पर नजर डालें तो, गुजरात में विजय रुपाणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बहुत करीबी नेता है वही पंजाब पर नजर डालें तो कैप्टन अमरिंदर सिंह गांधी परिवार के बड़े नजदीकी नेता है !
विजय रुपाणी भी गुजरात में दूसरी बात मुख्यमंत्री बने थे और कैप्टन अमरिंदर सिंह भी पंजाब में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे लेकिन दोनों ही नेताओं ने अपना अपना दूसरा कार्यकाल पूरा नहीं किया पूरा करने से पहले ही वह मुख्यमंत्री के पद से हट गए !
सवाल यह है कि विजय रुपाणी और कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी-अपनी पार्टियों के हाईकमान के करीबी होने के बाद भी दोनों नेताओं को क्यों बदला ?
और दोनों नेताओं को बदल कर भाजपा और कांग्रेस ने सबको चौकाते हुए मुख्यमंत्री के नामों का एलान किया ? भाजपा ने गुजरात में पटेल समुदाय को साधते हुए भूपेंद्र पटेल को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया तो वही कांग्रेस में दलित वोटों को साधते हुए चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया, जबकि इन दोनों ही राज्यों में दोनों ही पार्टियों के पास अन्य कद्दावर नेता मौजूद थे जिन्हें मुख्यमंत्री बनाया जा सकता था, और जो नेता लंबे समय से मुख्यमंत्री की रेस में शामिल थे लेकिन रेस में शामिल नेताओं को मुख्यमंत्री की रेस से अलग कर उन नेताओं को मुख्यमंत्री बनाया जो कभी सोच भी नहीं सकते थे की वह भी कभी मुख्यमंत्री बनेंगे !
पंजाब के होने वाले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी तो अपने मुख्यमंत्री के ऐलान से पहले यह अपेक्षा कर रहे थे कि वह राज्य में उप मुख्यमंत्री बन जाए लेकिन भाग्य का क्या भरोसा की अब वह उपमुख्यमंत्री नहीं बल्कि पंजाब के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं ! कुल मिलाकर बात यह है कि देश के दो बड़े राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने राज्यों में राजनैतिक रणनीति के तहत बदलाव नहीं किया बल्कि राजनैतिक मजबूरी के कारण बदलाव किया है ?
2022 में भाजपा को गुजरात में क्या पटेल समुदाय का पहले से अधिक साथ मिलेगा या नहीं ?और कांग्रेस को पंजाब में दलितों का पहले से अधिक साथ मिलेगा या नहीं? इसका इंतजार करना होगा ।
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